उदय प्रताप सिंह, इंदौर। इस बार मौसम ने जो तेवर दिखाए हैं, उसका एक नमूना बीते दो दिनों से नजर आ रहा है। दो दशक बाद इस बार वर्षाकाल में इतना कोहरा छा गया कि विमानों को उड़ान भरने और उतरने के दौरान रनवे विजुअल सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ा। आमतौर पर इस व्यवस्था का उपयोग ठंड के दौरान कोहरे में किया जाता है।

इंदौर में बारिश का आंकड़ा 50 इंच पार करने के बाद भी प्रतिदिन एक या दो बार तेज बारिश हो रही है। सुबह कोहरा भी छा रहा है। मंगलवार सुबह 6 बजे कोहरा होने के कारण दृश्यता 100 मीटर तक रह गई थी। इस कारण विमानतल से विमानों को उड़ान भरने और उतरने के लिए रनवे विजुअल रेंज (आरवीआर) का इस्तेमाल करना पड़ा। बुधवार को भी कोहरा था। हालांकि दृश्यता 1500 मीटर तक थी। जबकि सामान्यतः दृश्यता 2 हजार मीटर तक होती है। तेज बारिश में भी दृश्यता जब एकाएक कम हो जाती है तो तब भी आरवीआर का इस्तेमाल किया जाता हैं। इस सीजन में दो से तीन बार जब तेज बारिश में भी आरवीआर का उपयोग किया गया।

नमी और बादलों के कारण कोहरा

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर में नमी ज्यादा आने और बदली छाने से कोहरा पैदा हो रहा है।

मौसम केंद्र के विशेषज्ञ ने रनवे को देखा, फिर दिया ग्रीन सिग्नल

कोहरा या बारिश के कारण जब कभी क्षैतिज दृश्यता 800 मीटर से कम होती है, उस दौरान विमानतल के रनवे पर लगी 30 व 60 मीटर दूरी की रनवे लाइट को चालू किया जाता है। मौसम विशेषज्ञ रनवे पर पहुंच कर लाइटों की गणना दृश्यता के अनुरूप करता हैं। आरवीआर के आधार पर मौसम विभाग एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम को सूचना देता है। फिर पायलट को दृश्यता व आरवीआर की जानकारी दी जाती है। उस आधार पर विमान उड़ान भरते हैं या उतरते हैं।

20 साल बाद इंदौर में बारिश में दिखा कोहरा

अपने कार्यकाल के दौरान 20 साल पहले मैंने बारिश में कोहरा देखा था। इतने वर्षों बाद अब दो दिन से बारिश के दौरान मुंबई, दिल्ली जैसे विमानतल पर मौसम की ऐसी विषम परिस्थिति में कैट लाइट का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए कंट्रोल रूम में बैठे-बैठे ही दृश्यता का आकलन कर लिया जाता है।

-प्रमोद दुबे, सेवानिवृत्त मौसम वैज्ञानिक, इंदौर

Posted By: Nai Dunia News Network