इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Fire In Forest Indore। महीनेभर के भीतर जंगल में आगजनी की घटनाएं बढ़ गई है। आग के चलते इंदौर वनमंडल के कई हेक्टेयर जंगल जल गया है। चालीस से ज्यादा स्थानों पर आग ने नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों के मुताबिक गांवों में एेसी मान्यता है कि मन्नत पूरी होने के बाद जंगल में आग लगाई जाती है। ये घटनाएं शिवरात्री से होली के बीच अधिक देखने में आई है, जबकि वनकर्मियों का कहना है कि महुआ बिनने के लिए पेड़ों के आसपास सफाई करते है। तब जंगल में ग्रामीण आग लगाते है। घटनाएं ज्यादातर शाम के वक्त होती है। एेसी स्थिति में आग पर काबू पाने में समय लगता है। हालांकि कुछ प्रकरणों में ही वन विभाग आरोपी ढूंढ पाया है।

इंदौर, चोरल, महू और मानपुर रेंज में सात मार्च से दस अप्रैल के बीच आगजनी की घटनाएं अधिक हुई है। इंदौर में देवगुराडिया, उज्जैनी, रणभंवर, तिल्लौर, तिल्लोरखुर्द, असरावद, तिंछा में वनक्षेत्र जला है। जबकि चोरल में सेंटल-मेंटल, आशापुरा, उमठ, रसकुडिया, महू में बड़िया, घौड़ाखुर्द, बड़ी जाम-छोटी जाम, बड़गौदा और मानपुर में भी आठ स्थानों पर आग लगी है। सूत्रों के मुताबिक आग की घटनाएं बढ़ने के पीछे नियमित रूप से जंगल में निगरानी नहीं करना सामने आई है।

मामले में वनमंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने काफी नाराजगी जताई है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जंगल में अतिक्रमण करने वाले भी काफी सक्रिय है, जो कब्जा करने की दृष्टि से वनक्षेत्र को नुकसान पहुंचा रहे है। वन संरक्षक नरेंद्र पंडवा का कहना है कि अधिकांश मामलों में महुआ बिनने वालों ने जंगल में आग लगाई है। इसके लिए स्टॉफ को वनक्षेत्र में निगरानी बढ़ाने को कहा है।

रिपोर्ट में कम दर्शाएं आंकड़े

आगजनी की घटना से वनक्षेत्र में पहुंचे नुकसान को लेकर चारों रेंजर से एक रिपोर्ट मांगी है, जिसमें 100 से ज्यादा हेक्टेयर जंगल को जलना दर्शाया है। जबकि इसे ज्यादा जंगल जला है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक आंकड़े कम दर्शाए है। वैसे 30 मई तक वनकर्मियों को ज्यादा सर्तक रहने की जरूरत है, क्योंकि तापमान बढ़ने से जंगल में आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती है। इसके लिए वनकर्मियों ने ग्रामीणों का समूह बनाया है, जिनकी मदद से आग पर काबू पाया जा सकता है।

सैटेलाइट से मिलती हो लोकेशन

आगजनी की घटनाओं पर नजर रखने के लिए फॉरेस्ट सर्वे अाफ इंडिया (एफएसआइ) ने फायर अलर्ट सिस्टम बना रखा है। सैटेलाइट के जरिए जंगल में आग की घटना के बारे में पता चलता है। आग लगते ही विभाग के अमले को तुरंत वेबसाइट से जानकारी पहुंचती है। मैसेज से संबंधित वनमंडल और रेंज के अधिकारियों को लोकेशन मिलती है। फिर आग बुझाने को लेकर कोशिश शुरू करते है। फायर अलर्ट सिस्टम पर भी आगजनी की घटनाओं का पूरा ब्यौरा है।

Posted By: Sameer Deshpande

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