संदीप चौरे, इंदौर । सालभर के लंबे इंतजार के बाद आज गणपति बप्पा फिर 10 दिनों के लिए घर-घर में विराजेंगे और 10 दिन तक उत्साह व जोश के साथ गणेश उत्सव मनाया जाएगा, लेकिन इकोफ्रेंडली गणेश उत्सव मनाने का जो जोश इंदौर के इस शख्स में दिखता है, वो शायद और कहीं देखने को नहीं मिलेगा।

जब भी इकोफ्रेंडली गणेश की बात होगी, तो इंदौर के देवेंद्र अत्रे के प्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देवेंद्र इंदौर की कई स्कूलों में बीते चार वर्षों में 25 हजार से ज्यादा छात्रों को मिट्टी के गणेश बनाने का हुनर सिखा चुके हैं।

बीते 4-5 वर्षों से सिर चढ़ा जुनून

प्रिंटिग के कारोबार से जुड़े देवेंद्र अत्रे का कहना है कि बीते चार-पांच वर्षो में हर स्कूल और कॉलेज में छात्रों को मिट्टी के गणेशजी बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और मिट्टी की मूर्ति बनाना सिखा रहे हैं। देवेंद्र बताते हैं कि इस काम में कॉलेज व स्कूल के प्रबंधन का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। अब तो गणेश महोत्सव के शुरू होने से पहले ही उनके पास स्कूल और कॉलेजों से ट्रेनिंग देने के लिए फोन आने लगे हैं।

इकोफ्रेंडली गणेश के प्रति जागरूकता बढ़ी

देवेंद्र बताते हैं कि इकोफ्रेंडली गणेशजी को लेकर पहले इतनी जाग्रती नहीं थी, लेकिन अब इसके प्रति लोग जागरूक हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब मिट्टी की गणेश मूर्ति में वे सीड बॉल भी डाल रहे हैं। गणेशजी की मूर्ति में तुलसी के बीज डाल रहे हैं, जिससे लोगों को तुलसी के पौधे प्राप्त हो जाते हैं।

ऐसे हुई इस मुहिम की शुरूआत

देवेंद्र बताते है कि उनके पिता विट्ठलराव अत्रे बचपन में मुझसे हाथ से बने हुए गणेशजी की ही स्थापना करवाते थे। उन्होंने ही मुझे हाथ से मिट्टी की गणेश मूर्ति बनाना सिखाया। पिता का सिखाया हुआ हुनर ही वे आज स्कूल कॉलेज में बच्चों को सिखा रहे हैं।

हर साल मुफ्त बांटते हैं 50 गणेश मूर्तियां

उन्होंने बताया कि शुरूआत में तो सिर्फ घर में मिट्टी के गणेशजी की मूर्ति स्थापित करते थे, लेकिन बाद में मूर्तियां बनाकर बच्चों में वितरित भी करने लगे। देवेंद्र अब हर साल अपने मोहल्ले और रिश्तेदारों में अपने हाथ से बनी 50 से ज्यादा गणेशजी की मूर्तियां मुफ्त में बांटते हैं।