इंदौर। जेईई एडवांस का परिणाम रविवार की सुबह घोषित हुआ। विषम परिस्थितियों में भी जिसने हार नहीं मानी उसने अपनी मेहनत से लक्ष्य हासिल किया। संपन्न परिवारों के होनहारों ने भी लक्ष्य साधते हुए टॉपर्स की लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया। कामयाबी का जश्न किसी ने दोस्तों के साथ मनाया तो कोई परिवार के साथ खुशियां बांटता नजर आया।

शहर के अर्पित प्रजापति ने ऑल इंडिया रैंकिंग में जनरल कैटेगरी में 46 और आरक्षित वर्ग में छठवां स्थान प्राप्त कर शहर में टॉप किया है। गत वर्ष की तरह इस बार भी टॉप 100 में शहर के दो ही विद्यार्थी अपना नाम दर्ज करा सके। शहर में दूसरे क्रम पर वर्धन जैन का नाम दर्ज है। वर्धन ने ऑल इंडिया रैंकिंग में 86वां स्थान प्राप्त किया है। टॉपर्स बेशक अलग-अलग परिवेश के रहे लेकिन दोनों में समानता इस बात की है कि इन्होंने कल पर नहीं आज पर ध्यान दिया और वर्तमान में रहकर भविष्य का निर्माण किया।

टॉपर्स टॉक: अर्पित प्रजापति

रैंक: 46 एआईआर (जनरल कैटेगरी) व 6 एआईआर (ओबीसी कैटेगरी)

पिता-माता: हरिनाम प्रजापति व रामवती प्रजापति

पेशा: पिता माली और माता गृहिणी।

हार-जीत का दबाव कभी नहीं रहा

अर्पित कहते हैं कि उन्होंने कभी तनाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और अभिभावकों ने भी कभी हार-जीत का दबाव नहीं डाला। मैं केवल यही सोचकर पढ़ता था कि जितनी देर पढ़ना है अच्छे से पढूं और जो इच्छा हो वही विषय पढूं। इस परीक्षा की सफलता के लिए मैं औरों को यही कहूंगा कि कैमेस्ट्री ज्यादा गंभीरता से पढ़ें क्योंकि वह स्कोरिंग विषय है और फिर मैथ्स पर ध्यान दें। सीबीएसई स्कूल में पढ़ाई नहीं होने के कारण मुझे एनसीईआरटी की किताबों पर विशेष ध्यान देना पड़ा लेकिन बैसिक क्लीयर होने से ज्यादा दिक्कत नहीं आई।

वर्धन जैन

रैंक: 86 एआईआर (जनरल कैटेगरी)

पिता-माता: अजय जैन व रीना जैन

पेशा: व्यवसाय

टेस्ट सीरिज पर दिया ज्यादा ध्यान

वर्धन जैन कहते हैं कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी कभी कल के टेंशन में नहीं की बल्कि इस बात पर ही ध्यान दिया कि बेसिक क्लीयर रखना है और धीरे-धीरे अपना स्तर बेहतर करना है। टेस्ट सीरिज पर ज्यादा ध्यान दिया जिससे परीक्षा में गलतियां कम हुई और तनाव भी नहीं हुआ। तनाव से बचे रहने के लिए पढ़ाई के साथ खेल पर भी ध्यान देता था जिससे ताजगी बनी रहती थी। मुझे मैथ्स पसंद था इसलिए उसकी तैयारी सहजता से हो गई और जिन विषयों में थोड़ी परेशानी थी उसपर भी ध्यान दिया। इससे पेपर सहज हो गया।

मिले बोनस अंक, बढ़ गया कटऑफ

पेपर सहज होने के कारण इस बार कटऑफ बढ़ गया इसलिए रैंक ज्यादा बेहतर नहीं आ सकी। गत वर्ष 175 अंक पर 1000वीं रैंक गई थी, जबकि इस बार 260 अंक पर यह रैंक गई है। जिन विद्यार्थियों ने मैथ्स की प्रैक्टिस ज्यादा की थी उन्हें ज्यादा फायदा हुआ। इस बार 18 बोनस अंकों ने भी परिणाम में बड़ा बदलाव लेकर आया। हरेक विद्यार्थी को बोनस में मिले 18 अंकों का असर यह हुआ कि कम और ज्यादा मेहनत करने वाले विद्यार्थी समान अंक ले आए। इन बोनस 18 अंकों में से 11 अंक गलत सवाल और 7 अंक मिस प्रिटिंग के लिए दिए गए थे।

विजित जैन, कल्पवृक्ष

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