Furniture Cluster Indore: लोकेश सोलंकी, इंदौर। फर्निचर क्लस्टर में उद्योग लगाने का संपना संजोये बैठे उद्योगपति 22 महीने बाद भी खाली हाथ है। एमएसएमई मंत्री ने 50 हेक्टेयर जमीन देने का दावा किया था। वन विभाग के अडंगे के बाद इस जमीन और क्लस्टर के क्षेत्रफल को आधा किया जा रहा है। इस बीच छोटी बेटमा में फर्निचर क्लस्टर की जमीन पर उद्योगपतियों की बनाई बाउंड्री और फेंसिंग वन विभाग ने हटाकर अपना बोर्ड लगा दिया है। क्लस्टर की जमीन के आसपास वन विभाग ने नाली भी खोद दी है। सरकार की घोषणा पर भरोसा कर शासन को एक करोड़ रुपये जमा कर चुके उद्योगपति अब ठगा महसूस कर रहे हैं।

आटो शो के मंच से भी एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ने प्रदेश में बनाए 19 नए औद्योगिक क्लस्टरों में इंदौर के फर्निचर क्लस्टर की गिनती भी करवा दी। असलियत ये है कि क्लस्टर का काम अब तक शुरू भी नहीं हो सका है। फर्निचर क्लस्टर के लिए 50 हेक्टेयर जमीन देने की घोषणा की थी। छोटी बेटमा में यह जमीन चिन्हित की गई। इस जमीन के 38 हेक्टेयर हिस्से पर वन विभाग ने दावा जता दिया है। इससे पहले उद्योग विभाग ने कागजों पर जमीन उद्योगपतियों को सौंप भी दी थी। पटवारी पहुंचा और जमीन दिखाकर लौट आया।

उद्योगपतियों के अनुसार जमीन पर कब्जे के लिए जब वे वहां पहुंचे तो वन विभाग के अमले ने उन्हें लौटा दिया। अब वहां अपने स्वामित्व का बोर्ड लगाते हुए किसी तरह के निर्माण पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दे दी गई है। साथ ही चिन्हित जमीन के आसपास प्रवेश रोकने के लिए नाली भी खोद दी गई है। पांच दिन पहले प्रमुख सचिव उद्योग संजय शुक्ला से मिलकर उद्योगपतियों ने अपनी परेशानी बताई। सचिव ने जिला प्रशासन से बात कर समस्या हल करवाने का आश्वासन दिया। हल के तौर पर अब क्लस्टर ही आधा किया जा रहा है।

जमीन का एडवांस भी ले लिया

फर्निचर क्लस्टर के विकास की जिम्मेदारी भी उद्योग विभाग ने नहीं ली है। बल्कि उद्योगपतियों की समिति बनाकर विकास करने का काम सौंप दिया है। उद्योगपतियों ने इसके लिए 22 महीने पहले ही पैसा इकट्ठा कर एक करोड़ रुपये शासन के खजाने में जमा भी करवा दिया। फर्निचर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश नागर के अनुसार रुपया देने वाले उद्योगपति हमसे जवाब मांग रहे हैं कि जमीन कब मिलेगी। हम विभागों के चक्कर काट रहे हैं। कहीं से कोई जवाब नहीं मिल रहा। पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहा है।

अप्रैल तक सब कुछ हल होने का दावा भी खुद विभागीय मंत्री ने कहा था लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। 170 उद्योगपति यहां निवेश के लिए पैसा समिति के पास जमा करवा चुके हैं। रोड व सुविधाओं के विकास के बाद सिर्फ 20-22 हेक्टेयर जमीन बच रही है उससे 25 प्रतिशत उद्योगपतियों की यूनिट भी नहीं लग सकेगी।

वन विभाग से बचे हिस्से पर बनेगा क्लस्टर

फर्निचर क्लस्टर के लिए जमीन आवंटित करते समय वन विभाग को लिखा गया था। उस समय उनका जवाब नहीं आया था। काम शुरू होने के बाद उन्होंने अपना दावा जताया। वनक्षेत्र के रूप में एक बार जमीन अधिसूचित होने के बाद वापस नहीं किया जा सकता। अब क्लस्टर में से उतना हिस्सा कम करना पड़ेगा। शेष हिस्से पर क्लस्टर विकसित होगा।

- मनीष सिंह, कलेक्टर

Posted By: Sameer Deshpande

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