Health Tips : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सोमवार से शारदीय नवरात्र आरंभ हो रहा है। मंदिरों के साथ-साथ घर में भी घट स्थापना की जाएगी। शक्ति के आगे मस्तक झुकाते भक्त व्रत भी रखेंगे। कोई नौ दिन तक निराहार रहेगा तो कोई एकासना कर मां की आराधना करेगा। व्रत करना सेहत के लिए भी बेहतर होता है, क्योंकि इससे पाचनतंत्र भी बेहतर होता है। शरीर के विषैले तत्व भी बाहर निकलते हैं, लेकिन व्रत करने के भी कुछ सिद्धांत व नियम हैं। हर व्यक्ति व्रत कर सकता है लेकिन हृदय रोगी, किडनी की बीमारी से ग्रसित, कैंसर रोगी, जिन्हें मधुमेह या रक्तचाप असंतुलन की समस्या है, उन्हें चिकित्सक और आहार व पोषण विशेषज्ञ की सलाह से ही व्रत करना चाहिए। साथ ही व्रत के दौरान क्या व कितनी मात्रा में खाएं, इसकी जानकारी भी प्राप्त करनी चाहिए।

आहार व पोषण विशेषज्ञ डा. मुनीरा हुसैन के अनुसार, व्रत करना गलत नहीं है। व्रत शरीर के लिए लाभकारी ही होता है। व्रत से चयापचय प्रक्रिया बेहतर होती है लेकिन नौ दिन तक बगैर कुछ खाए-पिए रहना, आपकी सेहत पर बुरा असर भी डाल सकता है। जिन्हें मधुमेह या रक्तचाप की समस्या है, वे अधिक वक्त तक भूखे न रहें। व्रत में खाए जाने वाले पदार्थ थोड़ी-थोड़ी देर में खाते रहें ताकि शरीर में शर्करा का स्तर संतुलित रहे। व्रत में ऐसा आहार लें जो पोषण व ऊर्जा युक्त हो।

फलों का जूस लें - आहार व पोषण विशेषज्ञ डा. आरती मेहरा के अनुसार, व्रत के दौरान पानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। व्रत में भी पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पानी यदि कम पीते हैं तो मौसंबी, अनानास का जूस, दूध, नारियल पानी, छाछ, दही पिएं। चाय-काफी का सेवन कम से कम करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। मधुमेह रोगी केला, चीकू आदि फल न खाएं। सलाद का सेवन करें जो शरीर में पानी को अवशोषित भी करके रखेगा और भूख भी कम लगेगी। साबूदाना खाने के बजाए पौषि्टक आहार लें। जिन्हें केवल रक्तचाप की ही समस्या है और उन्हें नियमित दवाई भी खाने की जरूरत नहीं पड़ती, वे व्रत के दौरान मौसमी फल जैसे सेब, संतरा, केला आदि ज्यादा मात्रा में खाएं। फल ताजे और स्थानीय होना चाहिए।

दूध से बने पदार्थों का सेवन करें - आहार व पोषण विशेषज्ञ डा. शिवानी लोढ़ा के अनुसार, दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करें। यदि एक वक्त भोजन करते हैं तो उसमें गरिष्ठ भोजन के स्थान पर सुपाच्य और पौषि्टक भोजन को शामिल करें। खाने में रोटी, दाल, हरी सब्जी, सलाद, दही, चटनी, पनीर या उससे बने पदार्थ शामिल करें। तेज मिर्च-मसालों का उपयोग न करें। मूंगफली दाने, सूखे मेवे भोजन के अतिरिक्त खाएं। साबूदाने की खिचड़ी या आलू, लौकी का हलवा खाने के बजाए कुट्टु, सिंघाड़े या राजगीर के आटे से बना फलाहार करें। सुबह उठने के बाद ज्यादा देर तक भूखे न रहें।

Posted By: Hemraj Yadav

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