Hello Doctor: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिकलसेल एनीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है। माता-पिता में से किसी एक को भी यह बीमारी है तो बच्चों में भी इसके होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि विवाह से पहले कुंडली मिलान के साथ-साथ युवक-युवती की रक्त जांच भी करवा लेनी चाहिए। रक्त जांच से स्पष्ट हो जाता है कि भविष्य में इस विवाह से होने वाले बच्चों को सिकलसेल एनीमिया होने की आशंका तो नहीं है। सिकलसेल एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य व्यक्तियों के मुकाबले बहुत कम होती है। यही वजह है कि ये लोग आसानी से किसी भी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।

यह बात हीमेटोलाजिस्ट डा.मनीष नीमा ने कही। वे बुधवार को नईदुनिया के साप्ताहिक आयोजन हेलो डाक्टर में पाठकों को सिकलसेल एनीमिया से जुड़े सवालों के जवाब दे रहे थे। डा. नीमा ने बताया कि सिकलसेल एनीमिया माइनर और मेजर दो तरह का होता है। सिकलसेल एनीमिया माइनर से पीड़ित व्यक्ति पूरा जीवन बगैर किसी मुश्किल से गुजार सकते हैं। सिकलसेल एनीमिया मेजर से पीड़ित व्यक्ति को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है। सामान्यत: इस बीमारी का पता बचपन में ही चल जाता है। बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है, उसके शरीर में बार-बार खून की कमी हो जाती है, सांसें फूलने लगती हैं, हड्डियां कमजोर हैं, शरीर में अलग-अलग जगह दर्द होने लगता है तो वह सिकलसेल एनीमिया से ग्रसित हो सकता है। डा.नीमा ने बताया कि रक्त की सीबीसी और हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस दो जांचों से पता चल जाता है कि व्यक्ति सिकलसेल एनीमिया से ग्रसित है या नहीं।

सिकलसेल एनीमिया को लेकर हीमेटोलाजिस्ट डा.मनीष नीमा ने पाठकों के सवालों के दिए जवाब

सवाल - सिकलसेल एनीमिया के लक्षण क्या हैं? - असलम खान

जवाब - यह लाल रक्त कोशिकाओं की बीमारी है। इसमें कोशिकाओं का आकार हंसिए जैसा हो जाता है। इससे हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन का काम शरीर के अंगों तक आक्सीजन ले जाने का होता है। सिकलसेल एनीमिया में हीमोग्लोबिन में गड़बड़ी होने से शरीर में आक्सीजन नहीं पहुंच पाता। शरीर में थकान रहती है। कहीं भी दर्द होने लगता है। शरीर के अंग खराब होने लगते हैं। मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से वह संक्रमण की चपेट में आ जाता है।

सवाल - सिकलसेल एनीमिया से बचाव कैसे करें? - राजेश अग्रवाल

जवाब - यह वंशानुगत बीमारी है। इसका इलाज सिर्फ बोनमेरो ट्रांसप्लांट है। इस बीमारी का पता सीबीसी और हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच से हो जाता है। विवाह से पहले लड़का-लड़की को ये दोनों जांचें करवा लेनी चाहिए। एक बार यह बीमारी हो जाए तो शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

सवाल - मुझे एक वर्ष में चार बार रक्त चढ़ाना पड़ा। रक्त चढ़ाने के बाद कुछ दिन अच्छा लगता है। फिर दिक्कत होने लगती है। शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। खाना नहीं खाने में आता है। - मनोरमा द्विवेदी

जवाब - सिकलसेल एनीमिया बचपन में होता है। अधिक उम्र में नहीं। इस बीमारी में शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है। संभवत: आपको पेट की कोई बीमारी है। आपको इसके लिए किसी पेट रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

सिकलसेल एनीमिया के लक्षण -

इन बातों का ध्यान रखें -

  • अगर परिवार में किसी को सिकलसेल एनीमिया है तो पूरे परिवार की स्क्रीनिंग की जाना चाहिए।
  • सिकलसेल एनीमिया पीड़ित व्यक्ति को सर्जरी से पहले डाक्टर को इस बारे में बता देना चाहिए।

पीड़ित इन बातों का रखें ध्यान -

  • ठंड से बचाव रखें
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं
  • बुखार आने पर तुरंत अपने डाक्टर को दिखाएं, लापरवाही बिल्कुल न करें
  • अपने मन से दर्द निवारक दवाइयां न लें
  • सभी टीके अनिवार्य रूप से समय पर लगवा लें।

ये भी कहा -

  • अगर सिकलसेल माइनर है तो व्यक्ति सावधानी पूरा जीवन आसानी से गुजार सकता है, लेकिन अगर सिकलसेल एनीमिया मेजर है तो सावधानी बरतना पड़ेगी। नियमित जांच और दवाइयां जरूरी है।
  • विवाह से पहले कुंडली मिलान के साथ-साथ वर-वधू की रक्तजांच अनिवार्य रूप से करवा लें।

Posted By: Hemraj Yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close