इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर शहर के अलग-अलग हिस्सों में हो रही तोड़फोड़ पर नगर निगम कठघरे में खड़ा हो गया है। एक पूर्व पार्षद ने जनहित याचिका दायर कर निगम की तोड़फोड़ पर सवाल खड़े किए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निगम स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ लोगों के घर तोड़ रहा है लेकिन असलियत यह है कि प्रोजेक्ट में अरसे पहले शुरू हुआ काम भी आज तक पूरे नहीं हुए हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार और प्रशासन से तमाम बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

पूर्व पार्षद महेश गर्ग की ओर से न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। गर्ग की ओर से पैरवी कर रहे अभिभाषक मनीष यादव के अनुसार हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ की युगल पीठ ने प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग के साथ इंदौर कलेक्टर और कमिश्नर को भी नोटिस जारी कर याचिका के बिंदुओं पर 6 सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। शहर में अलग-अलग क्षेत्रों में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बड़े पैमाने पर लोगों के घर-दुकान तोड़े जा रहे हैं।

याचिकाकर्ता के तर्क...

- वर्षों पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शुरू किए गए काम ही अब तक पूरे नहीं हुए हैं जबकि नियत सीमा बीत चुकी है तो ऐसे में नई तोड़फोड़ करना अनुचित है।

- पूरे शहर के नागरिकों को परेशानी हो रही है। सड़कें जगह-जगह खोद दी गई हैं।

- जाम की समस्या पैदा हो रही है।

- जयरामपुर-गोराकुंड मार्ग पर भी तोड़फोड़ में जल्दबाजी की गई। वहां पर 8-8 फीट की फुटपाथ रखी जा रही है। यह अनुचित है क्योंकि पहले शहर के चौड़े फुटपाथों को अतिक्रमण होने के कारण उन्हें छोटा किया जा चुका है।

...और तर्क से कोर्ट सहमत

तर्कों से सहमत होकर प्रशासनिक न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति शैलेंद्र शुक्ला की बेंच ने सरकार से जवाब मांगा है।

टैक्स के पैसों से चुका रहे मोटी फीस

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर तोड़फोड़ और कामों पर पहले से सवाल उठ रहे हैं। कनाड़िया रोड से लेकर गणेशगंज और जयरामपुरगोराकुंड की तोड़फोड़ में तमाम नागरिकों के मालिकी हक के मकान भी बिना मुआवजा दिए तोड़े गए थे। इन सब कामों में निगम ने आपात व्यवस्था बताकर मलबा सफाई से लेकर रिमूवल तक में ट्रकों-डंपरों और मजदूरों को अनाशशनाप भुगतान किया गया। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में काम भले ही पूरे नहीं हो रहे लेकिन प्रोजेक्ट डिजाइनिंग से लेकर कंसलटेंसी के नाम पर लाखों की फीस चुकाई जा रहा है। जनता के टैक्स के पैसों से चुकाई जा रही इस कंसलटेंसी फीस में भी कमीशनखोरी के आरोप लगते रहे हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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