इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बीआरटीएस में स्कूली बसों को चलाने की अनुमति देने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में 42 बसें इस कॉरिडोर में चलती हैं। 60 हजार से ज्यादा लोग रोजाना इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हैं। तीन हजार स्कूली बसों को बीआरटीएस में चलने की अनुमति दे दी तो स्थिति भयावह हो जाएगी। किसी भी कीमत पर बच्चों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।

हाई कोर्ट ने यह आदेश बीआरटीएस को लेकर चल रही दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में इंटरविनर की तरफ से एक आवेदन आया था। इसमें कहा था कि जब तक याचिकाओं का अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक स्कूली बसों को इस कॉरिडोर में चलने की अनुमति दी जाए। इंटरविनर की तरफ से गुरुवार को एडवोकेट अजय बागड़िया ने पैरवी की।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि स्कूली बसों को बीआरटीएस में चलने की अनुमति दी जाती है तो मुख्य सड़क का भार कम हो जाएगा। सुबह के वक्त कॉरिडोर में यातायात का दबाव कम रहता है। कोर्ट ने बहस सुनने के बाद यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि बीआरटीएस सिर्फ बसों के परिवहन के लिए है। इसमें स्कूली बसों को चलने की अनुमति दे दी तो बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती है। फिलहाल इस कॉरिडोर में 42 बसें चल रही हैं। अनुमति देने के बाद इनकी संख्या तीन हजार 42 हो जाएगी। ऐसे में अनुमति नहीं दी जा सकती।

मुख्य मुद्दे पर बहस अब अगले सप्ताह

बीआरटीएस प्रोजेक्ट को लेकर दो जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में चल रही हैं। दोनों सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने लगाई हैं। पहली याचिका में प्रोजेक्ट को चुनौती देते हुए कहा है कि यह प्रोजेक्ट ही गलत है। कॉरिडोर में जितने लोग यात्रा कर रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा इसकी वजह से परेशान हो रहे हैं। पूरा बीआरटीएस दाएं हाथ के हिसाब से डिजाइन किया गया है, जबकि भारत में बाएं हाथ पर चलने का नियम है। दूसरी याचिका में मांग की है कि रेलिंग तोड़कर कॉरिडोर को अन्य वाहनों के लिए शुरू किया जाए।