इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, High Court Indore। सीपी शेखर नगर के बाशिंदों की शिफ्टिंग को छह साल होने को आए हैं। अब तक यह तय नहीं हो सका कि शिफ्टिंग कानूनन सही थी या गलत। मामले को लेकर 2015 में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी। सोमवार को इसमें बहस होना है। महामारी के चलते लंबे समय तक सुनवाई टलती रही। याचिका में सभी पक्षों के जवाब आ चुके हैं। सिर्फ अंतिम बहस होना शेष है। इसके बाद तय होगा कि निगम और प्रशासन ने शिफ्टिंग कानून के दायर में रहकर की थी या नहीं और शासन ने शिफ्टिंग के साथ-साथ रहवासियों के रोजगार के पर्याप्त इंतजाम किए थे या नहीं।

करीब छब साल पहले सीपी शेखर नगर के 650 से ज्यादा परिवारों को नगर निगम ने बड़ा बांगड़दा और भूरी टेकरी में बने फ्लैटों में शिफ्ट किया था। इस शिफ्टिंग को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में दायर हुई। एडवोकेट शन्नाो शगुफ्ता खान इसमें याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी कर रही हैं। निगम का दावा है कि सीपी शेखर नगर के रहवासियों को जहां बसाया है वहां आवागमन, शिक्षा, सफाई के पर्याप्त इंतजाम कर दिए गए हैं। याचिकाकर्ता कह रहे हैं कि रहवासियों को न पर्याप्त रोजगार मिला न गुणवत्तापूर्ण आवास। याचिकाकर्ता ने अपने रिजाइंडर में कहा है कि सिर्फ 119 लोगों को रोजगार दिया था, वह भी एक महीने बाद छीन लिया गया। अधिकारियों ने सिर्फ वाहवाही लूटने के लिए दिखावा किया था। कई लोग अब तक बेरोजगार हैं।

बन चुकी है फिल्म भी..

सीपी शेखर नगर की शिफ्टिंग को लेकर 40 मिनट की एक लघु फिल्म भी बन चुकी है। इसमें शिफ्टिंग की वास्तविकता दिखाई गई है। शिफ्ट किए गए रहवासियों का आरोप है कि जिन मल्टियों में उन्हें शिफ्ट किया गया है उनकी हालत जीर्णशीर्ण है। वहां मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।

Posted By: gajendra.nagar

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