इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, High Court Indore News। फर्जी आदेश के जरिए आइएएस बनने के मामले में जांच के लिए एसआइटी गठित होगी या नहीं, यह फैसला अब मप्र हाई कोर्ट की मुख्य पीठ से होगा। इस संबंध में इंदौर खंडपीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका की सुनवाई अब जबलपुर में होगी। बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी हो गया।

इंदौर खंडपीठ ने पिछली सुनवाई पर कहा था कि इस जनहित याचिका में राहत कोर्ट के अधिकारियों के खिलाफ चाही गई है। रजिस्ट्री कार्यालय को देखना चाहिए कि क्या इस मामले को सुनवाई के लिए मुख्यप ीठ को भेजा जाना चाहिए। बुधवार को रजिस्ट्री कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए मुख्य पीठ को भेजने का आदेश दे दिया।

गौरतलब है कि विशेष न्यायाधीश विजेंद्रसिंह रावत की शिकायत पर एमजी रोड पुलिस ने कोर्ट का फर्जी आदेश तैयार कर उसे सामान्य प्रशासन विभाग में प्रस्तुत करने का मामला दर्ज किया है। फर्जी आदेश के जरिए आइएएस अवार्ड प्राप्त करने वाले संतोष पुत्र रुमालसिंह वर्मा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वह फिलहाल 13 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में है। इस फर्जी आदेश पर विशेष न्यायाधीश रावत के न्यायालय की मुहर लगी है। मामले में पुलिस ने जिला अभियोजन अधिकारी मो. अकरम शेख से भी लंबी पूछताछ की थी। न्यायाधीशगणों के अलावा कई न्यायिक कर्मचारियों के बयान भी लिए गए। मामले में जांच अब भी जारी है।

इस बीच मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता आलोक कुमावत ने एडवोकेट गगन बजाड़ के माध्यम से एक जनहित याचिका दायर कर दी। इसमें कहा है कि चूंकि इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, न्यायिक कर्मचारियों आदि का नाम आ रहा है। ऐसे में मामले की जांच पुलिस करती है तो इस बात की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि ये लोग जांच को प्रभावित कर दें। इसलिए कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित की जाना चाहिए। कोर्ट ने रजिस्ट्री कार्यालय से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की थी। बुधवार को यह रिपोर्ट प्रस्तुत हो गई। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए मुख्य पीठ के समक्ष रखने के आदेश दिए। मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।

Posted By: gajendra.nagar

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