इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि GST On Copper Wire। कापर वायर यानी तांबे के तार पर जीएसटी दर कम करने की मांग उठी है। राजस्थान और मप्र दोनों राज्यों के कारोबारी इस मुद्दे पर एक हो गए हैं। कृषि और औद्योगिक एसोसिएशनों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कर की दर घटाने की मांग की है। कारोबारियों के मुताबिक तांबे के वायर पर ज्यादा टैक्स का सीधा लाभ चीन को मिल रहा है। देश के उद्योग तो प्रभावित हो ही रहे हैं कर चोरी भी बढ़ रही है।

बीते दिनों इंदौर में कापर कारोबारियों पर टैक्स चोरी के मामले में केंद्रीय जीएसटी ने छापेमार कार्रवाई की थी। इसके बाद कारोबारी के बेटे को जेल भी भेज दिया गया था। इंदौर में पड़े छापों के बाद से देशभर में कापर वायर पर जीएसटी की अधिक दर मुद्दा बन गई है। आल राजस्थान एग्रीकल्चर एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एराटिया) ने मामले पहल करते हुए टैक्स कम करने की मांग उठाई। मप्र के उद्योग और कारोबारियों ने भी इसका समर्थन किया।

एराटिया के अध्यक्ष बनेचंद जैन के अनुसार देश में हर साल करीब 1000 टन कापर राड बिकती है। इसकी कीमत करीब 80 करोड़ रुपये होती है। तांबे की कीमत करीब 800 रुपये प्रति किलो है। इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। यानी 800 रुपये के तांबे पर 144 रुपये सिर्फ जीएसटी देना पड़ रहा है। यह पूरी तरह अव्यवहारिक है। तांबे के वायर मुख्य तौर पर कृषि उपकरणों, पंप, घरेलू इलेक्ट्रिक फिटिंग में उपयोग होते हैं। ऐसे में हो ये रहा है कि बड़ी वायर कंपनियां तो चीन से सस्ता कापर वायर मंगवाने लगी है। स्थानीय वायर फैक्ट्रियां बंद हो रही है। साथ ही घरेलू इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रानिक उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं।

रिप्रोसेस का गणित

भारत में ज्यादातर कापर रीप्रोसेस यानी पुर्नउत्पादन से बनता है। दरअसल कापर के पुराने स्क्रैप को गलाकर बनाया जाता है। इस तरह हो ये रहा है कि पुराने कापर पर तो पहले से ही 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाया हुआ होता है। उससे बने माल पर फिर से 18 प्रतिशत देना पड़ता है। स्थानीय रिप्रोसेसर इकाइयों पर टैक्स की यह दर भारी पड़ रही है।

मप्र के व्यापारी संगठनों ने कहा है कि यदि टैक्स की दर कम होती है तो कापर का आयात कम होगा और इससे विदेशी मुद्रा भी बचेगी। एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मप्र के अध्यक्ष प्रमोद डफरिया के अनुसार जीएसटी काउंसिल के सामने हम भी आंकड़े और रिप्रोसेसिंग यूनिट की समस्याओं के साथ प्रस्ताव भेजेंगे। उम्मीद है काउंसिल संवेदनशीलता से विचार करेगी।

कर चोरी का कारण

जीएसटी में 18 प्रतिशत टैक्स दर सबसे उच्च दर है। जीएसटी के अनुसार टैक्स की यह दर लग्जरी आयटम्स पर लगती है। सरकार की सोच होगी की उपभोग व सुखसुविधा के इलैक्ट्रानिक उपकरण पर छूट न दी जाए। लेकिन इससे कृषि व अन्य घरेलु जरुरतों पर भी असर पड़ता है। देखा गया है कि जिस वस्तु पर ज्यादा टैक्स लगता है टैक्स चोरी भी उस पर ज्यादा होती है। यदि टैक्स कम लगेगा तो कर का पालन प्रतिवेदन भी बढ़ेगा।

- केदार हेड़ा, अध्यक्ष कमर्शियल टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन मप्र

Posted By: Sameer Deshpande

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