इंदौर। शाम ढलने के साथ राजवाड़ा पर होलकरकालीन सरकारी होलिका का दहन किया गया। विधि विधान से पूजन के बाद होली जलाई गई।

शहर में अनेक स्‍थानों पर गाय के गोबर के कंडों से होली जलाकर गाय, जंगल और पर्यावरण बचाने की पहल की जा रही है। नईदुनिया द्वारा प्रदेशभर में लगातार तीन साल से चलाए जा रहे अभियान में 500 से अधिक संस्थाएं सक्रिय रूप से जुड़ीं। इनके जरिए पांच लाख से अधिक कंडे से होलिका दहन किया जाएगा।

समाज, संस्थाएं, साधु-संत, पर्यावरणविद्, बच्चे, युवा, महिलाएं सहित हर वर्ग इस अभियान से जुड़ा। इस अभियान की वजह से बड़े पैमाने पर जंगल कटने से बचे हैं। वन विभाग के अनुसार इंदौर जैसे बड़े शहरों में ही होली के दिन बिकने वाली लकड़ियों की मात्रा में 80 फीसदी तक गिरावट आई है।

इससे सिर्फ जंगल ही नहीं बचे बल्कि इतनी लकड़ियां जलने से वायुमंडल में घुलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में भी काफी कमी आई है। गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र, नागपुर में हुए शोध के मुताबिक गाय के गोबर के कंडों के दहन से आसपास के बड़े इलाके में कीटाणु और विषाणु नष्ट हो जाते हैं। होलिका दहन से भी वातावरण को फायदा होगा।

मालवा-निमाड़ में सबसे ज्यादा इंदौर में सबसे अधिक गाय के गोबर के कंडों की होली जलाई जाएगी। इनमें तीन सौ साल पुरानी सरकारी होली शामिल है, वहीं किष्किंधा धाम के माध्यम से 1.35 लाख कंडों का निशुल्क वितरण किया जा रहा है। उज्जैन, बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन में भी बड़ी संख्या में कंडों से होलिका दहन होगा।

बुरहानपुर में स्वामी विवेकानंद गणेशोत्सव समिति द्वारा 3100 कंडों और पांच कि लो कपूर की होली जलाई जाएगी। शहर के समाजसेवी डॉक्टर दवा की पर्ची में नईदुनिया मुहिम का समर्थन करते हुए कंडों की होली जलाने की अपील कर रहे हैं।

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