इंदौर। महानिशीथ काल से पूर्व व भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन करना उचित रहेगा। होलिका दहन का शुभ समय रात 8.59 मिनट से रात 12.31 मिनट के बीच रहेगा। 22 मार्च को एकम तिथि का क्षय होने की वजह से होलिका रंग महोत्सव पूर्णिमा तिथि यानी 21 मार्च गुरुवार को मनाया जाएगा। 20 मार्च को सुबह 10.45 मिनट से पूर्णिमा तिथि लगेगी जो दूसरे दिन 21 मार्च सुबह 7.12 मिनट तक रहेगी। इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा तिथि प्रदोषकाल में सिर्फ 20 मार्च को ही मिल रही है। होलिका दहन भी प्रदोषकाल में भद्रा रहित पूर्णिमा तिथि में किया जाता है। 20 मार्च बुधवार को सुबह 10.44 मिनट से रात 8.59 मिनट तक भद्रा रहेगी।

महाकाल में संध्या आरती के बाद जलेगी होली

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में बुधवार को संध्या आरती के बाद परिसर में होली जलेगी। पुजारी परिवार की महिलाएं पूजा करेंगी। संध्या आरती में पुजारी भगवान को गुलाल अर्पित कर होली मनाएंगे। मंदिर की परंपरा अनुसार महाकाल के आंगन में प्रदोषकाल में होली जलाई जाती है। इसके पहले पुजारी परिवार की महिलाएं भरगोलिए की माला (कंडों से बनी) अर्पित कर वासंती फूलों से होलिका का पूजन करती हैं।पुजारी संध्या आरती में भगवान को गुलाल अर्पित करते हैं। इसके बाद वैदिक मंत्रों से होली का दहन किया जाता है।

धुलेंडी पर पहली बार राजा की फूल होली

गुरुवार को तड़के 4 बजे भस्मारती में सबसे पहले राजा के आंगन में होली मनाई जाएगी। पहली बार पुजारी भगवान के साथ फूल होली खेलेंगे। पं.महेश पुजारी ने बताया राजा की फूल होली के लिए 1 क्विंट गुलाब के फूल मंगवाए गए हैं।