इंदौर। नगर निगम के इंजीनियर को हनीट्रैप में फंसाकर तीन करोड़ रुपए की मांग करने के मामले में पुलिस के हत्थे चढ़ी तीनों आरोपित महिलाओं को शुक्रवार को पुलिस ने जिला अदालत में पेश किया। आरोपितों से पूछताछ के लिए दो दिन का रिमांड मांगा था लेकिन अदालत ने इससे इंकार करते हुए तीनों को 4 अक्टूबर तक जेल भेज दिया। अदालत ने माना कि पुलिस रिमांड के लिए कोई आधार नहीं है। मामले में एक आरोपित महिला की तरफ से जमानत आवेदन भी आ गया। इस पर सोमवार को सुनवाई होगी।

हनीट्रैप मामले में आरोपित श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और बरखा अमित सोनी को पलासिया पुलिस शुक्रवार शाम करीब 4 बजे अदालत रूम नंबर 25 में लेकर पहुंची। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार पाटीदार के समक्ष अभियोजन ने तर्क रखा कि मामले में कुछ वीडियो मिले हैं।

आरोपितों से पूछताछ होना बाकी है कि ये वीडियो कब और कहां बनाए गए हैं? इसके अलावा एक बड़ी रकम भी जब्त हुई है। यह पूछताछ भी होनी है कि यह रकम कहां से आई थी? तीनों आरोपितों के वकीलों ने पुलिस रिमांड का विरोध किया।

श्वेता स्वप्निल जैन की तरफ से अभिभाषक अमरसिंह राठौर, श्वेता विजय जैन की तरफ से अभिभाषक धर्मेंद्र गुर्जर और बरखा अमित सोनी की तरफ से अभिभाषक सुरेंद्र कुमार वर्मा और आनंद सोसरिया ने पक्ष रखा। आरोपितों के वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके पक्षकार का मामले से कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले में पुलिस मोबाइल और लैपटॉप पहले ही जब्त कर चुकी है। मुख्य आरोपित 22 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर है।

तीनों आरोपितों को तीन दिन पहले हिरासत में लिया गया था लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं दिखाई। अदालत गुरुवार को तीनों आरोपितों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप चुकी है। ऐसी स्थिति में एक बार फिर पुलिस रिमांड पर सौंपने का कोई मतलब नहीं। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया जो देर शाम जारी हुआ। न्यायाधीश पाटीदार ने तीनों आरोपितों को पुलिस रिमांड पर सौंपने से इंकार करते हुए उन्हें 4 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।


आरोपित श्वेता स्वप्निल जैन की तरफ से शुक्रवार को ही जमानत आवेदन भी पेश हुआ। अभिभाषक राठौर ने बताया कि जमानत आवेदन में कहा गया है कि हमारा इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है। इधर श्वेता विजय जैन के वकील गुर्जर ने बताया कि वे भी जमानत आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। अदालत दोनों जमानत आवेदनों पर सोमवार को सुनवाई करेगी।


एक कार्यक्रम के सिलसिले में इंदौर आए प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा से पूछा गया कि हनीट्रैप कांड में अधिकारियों-राजनेताओं के नाम जुड़ने के बाद मामला दबाने के कयास लगाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार मामले में बैकफुट पर नहीं है बल्कि फ्रंट फुट पर है। पुलिस और गृहमंत्री की सजगता से ही मामले का खुलासा हुआ और षड्यंत्रकारी जेल में हैं। सरकार पूरे मामले की जांच कराएगी। जो भी शामिल है, कोई नहीं बचेगा।