इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि), Hospital Treatment Charge। कोरोना की पिछली लहर में सितंबर में जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम लगाने का आदेश जारी किया था। हर इलाज और जांच की अधिकतम दरें तय की गई थीं, लेकिन करीब आठ महीने में ही अस्पतालों ने इस आदेश को ताक में रख दिया। मरीजों को भर्ती करने और इलाज के नाम पर मनमाना पैसा वसूलने में जुट गए हैं। प्रशासन के पास ऐसी कई शिकायतें पहुंचने लगी हैं। बेड, पीपीई किट, आक्सीजन के अनाप-शनाप पैसे लिए जा रहे हैं। अस्पताल में डाक्टरों की विजिटिंग फीस अधिक ली जा रही है तो जो ड्यूटी डाक्टर मरीजों की देखभाल के लिए होता है, उसकी भी कंसल्टेंट फीस मरीज से वसूली जा रही है।

कलेक्टर मनीषसिंह के पास वी-केयर, यूनिवर्सल और आरके अस्पताल की शिकायतें पहुंची हैं, जहां मरीजों और उनके स्वजन ने अधिक पैसा लेने की बात कही है। शिकायतों के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने एक बार फिर अस्पतालों की फीस पर नकेल डालने के लिए धारा-144 के तहत आदेश जारी किया है। इसमें अस्पतालों में इलाज, बेड, जांच, पीपीई किट, आक्सीजन आदि की अधिकतम दरें तय की गई हैं।

अधिक बिल की जांच के लिए नियुक्त किए अधिकारी : अस्पतालों के अधिक और मनमाने बिलों की जांच के लिए कलेक्टर ने दो प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किए हैं। नगर निगम सीमा में निजी अस्पतालों के बिलों की शिकायत अपर कलेक्टर अजयदेव शर्मा को मोबाइल नंबर 9425152833 पर की जा सकेगी। जबकि निगम सीमा के बाहर और जिले की सीमा के अंदर के निजी अस्पतालों की शिकायत अपर कलेक्टर राजेश राठौर को 9303938924 पर की जा सकेगी। यह अधिकारी जोनल मेडिकल अधिकारी और अधीनस्थ चिकित्सा अधिकारियों के साथ शिकायतों और बिलों की जांच 48 घंटे के अंदर पूरी कराएंगे और इसकी रिपोर्ट कलेक्टर को पेश की जाएगी।

आक्सीजन के 1500 रुपये से ज्यादा नहीं ले सकेंगे

इंदौर कलेक्टर के आदेश के मुताबिक, कोई भी अस्पताल रूम में या जनरल वार्ड में बेड का किराया कोविड (फरवरी-मार्च 2020) के पहले लिए जाने वाले बेस रेट में अधिकतम 40 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी कर सकेगा। यानी कोविड संक्रमण के पहले यदि किसी अस्पताल में बेड 1000 रुपये में मरीजों को दिया जाता था तो अब उसके 1400 रुपये तक ही लिए जा सकेंगे।

- यदि अस्पताल में मरीज को आक्सीजन हाई फ्लो आक्सीजन छोड़कर दी जाती है तो इसकी अधिकतम सीमा प्रति मरीज प्रतिदिन 1500 रुपये होगी। अगर मरीज को कुछ ही घंटों के लिए आक्सीजन दी जाती है तो उस मान से अनुपातिक रूप में कम राशि मरीजों से ली जाएगी।

- बायपेप और वेंटीलेटर का उपयोग करने पर वही शुल्क लिया जाएगा जो कोविड संक्रमण आने से पहले लिया जा रहा था।

- हर मरीज से एक दिन में पीपीई किट के 500 रुपये से अधिक नहीं लिए जा सकेंगे। इस राशि में अस्पताल के अंदर कोविड प्रबंधन में लगे कंसल्टेंट डाक्टर, इंचार्ज ड्यूटी डाक्टर, अलग-अलग शिफ्ट में लगे नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, हाउसकीपिंग, लैब तकनीशियन, एक्स-रे स्टाफ, पैंट्री स्टाफ, सुरक्षा गार्ड, लिफ्टमैन सहित सभी अन्य कर्मचारियों को लगने वाली पीपीई किट का खर्च शामिल रहेगा।

- एक कोविड बेड पर मरीजों को भोजन, नाश्ता, चाय, स्टीम गार्गल, बेडशीट, तकिया कवर, रोगी गाउन, डेंटल किट, थर्मामीटर, कोविड वार्ड व कमरों की सफाई आदि के रूप में हर दिन अधिकतम 750 रुपये ही प्राप्त किए जा सकेंगे।

- विशेषज्ञ डाक्टरों से प्रशासन ने अनुरोध किया है कि वे अपनी विजिटिंग फीस 2000 रुपये से कम ही चार्ज करें। अस्पताल को निर्देशित किया गया है कि ड्यूटी डाक्टर की फीस अलग से मरीज से वसूलना पूरी तरह अनुचित है।

- निजी अस्पतालों और पैथालाजी लैब के लिए जांच की अधिकतम दरें भी तय कर दी गई हैं। आरटीपीसीआर के लिए 700, रैपिड एंटीजन टेस्ट के 300, सीटी स्कैन के 3000, एबीजी टेस्ट 600, डी-डाइमर टेस्ट 500, प्रो कैल्सीटोनिन टेस्ट 1000, सीआरपी टेस्ट 200, सीरम फैरिटिन टेस्ट 180 और आईएल-6 टेस्ट के 1000 रुपये से अधिक नहीं लिए जा सकेंगे। यदि घर से सैंपल लेना हो तो इसमें 200 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकेगा।

Posted By: Prashant Pandey

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