उदय प्रताप सिंह, इंदौर। आलीराजपुर में बाल तस्करों के गिरोह की सक्रियता का पता जिस मासूम बच्चे के रेस्क्यू ऑपरेशन के कारण हुआ था, उसे जैविक माता-पिता का प्यार नहीं मिल पाएगा। उसके माता-पिता उसे त्याग चुके थे। डीएनए रिपोर्ट के बाद अब उसे गुजरात के दंपती गोद लेंगे। इसके लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकृत (कारा) की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि डेढ़ साल के उस बच्चे के कारण ही 13 अन्य मासूमों का भी पता चला था और उन्हें मुक्त कराया गया था, वे अपने जैविक माता-पिता के पास जा रहे हैं। इनमें से 10 बच्चे पिछले एक साल से इंदौर की संस्था के पास रह रहे थे। इनमें संस्था द्वारा न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार को दो साल के बालक को उसके आलीराजपुर में रहने वाले मातापिता को सौंपा गया और शनिवार को 5 साल के बालक को उसके केयरटेकर सौंपा गया है। संस्था के प्रतिनिधियों के अनुसार 10 में से 9 बच्चे जल्द ही अपने माता-पिता के पास जाएंगे।

एक साल से माता-पिता से दूर : स्कीम नंबर 54 स्थित संजीवनी सेवा संगम में मुक्त कराए बच्चों में 10 बच्चों को एक साल पहले रखा गया था। ये बच्चे 2 माह से 5 साल तक के थे। पिछले एक साल से संस्था द्वारा ही इन बच्चों का पालन-पोषण किया जा रहा है। इनमें चार बच्चे स्कूल भी पढ़ने जा रहे हैं। संजीवनी सेवा संगम प्रतिनिधियों के अनुसार बच्चों को आलीराजपुर पुलिस ने एक साल पहले बाल तस्करी के मामले में पकड़ा है। बच्चों के मातापिता ने अवैधानिक तरीके से उन्हें दूसरों को सौंप दिया था। पुलिस ने बच्चों को मुक्त करवाया व इंदौर भेजा था तब से वे इस संस्था में रह रहे हैं। एक साल से इन बच्चों ने न माता-पिता को देखा न वे जिन घरों में रहे थे, वहां के लोगों को।

दूसरा बच्चा केयरटेकर को दिया : शनिवार को इंदौर के संजीवनी सेवा संगम संस्था से एक अन्य बच्चे को कोर्ट के आदेश के बाद उसकी केयरटेकर मां को सौंप दिया गया। इस बालक की जैविक मां अभी तक नहीं मिली है। इस वजह से उसे केयरटेकर को सौंपने का आदेश कोर्ट ने दिया है।

डीएनए से एक साल बाद मिली माता-पिता की पहचान

बाल तस्करों से मुक्त कर इंदौर के बाल आश्रम में रखे गए 10 मासूम पिछले एक साल से अपने असली माता-पिता की पहचान का इंतजार कर रहे हैं। इन बच्चों के असली माता-पिता की पहचान के लिए उनकी डीएनए टेस्ट रिपोर्ट व न्यायालय के निर्णय का इंतजार हो रहा है। इसके बाद ही ये बच्चे जैविक माता-पिता को दिए जा सकते थे। अब एक साल बाद न्यायालय के आदेश ये बच्चे अपने असली माता-पिता के पास जा रहे हैं। न्यायालय के आदेश के बाद अभी फिलहाल 10 में से दो बच्चे अपने जैविक माता-पिता के पास जा चुके हैं और शेष 8 इंतजार कर रहे हैं।

आलीराजपुर से बाल तस्करों के गिरोह से मुक्त कराए गए 10 बच्चों को हमारी संस्था में भेजा था। इस बच्चे को जैविक मातापिता त्याग चुके हैं। अब उसे गुजरात के दत्तक माता-पिता को दिया जाएगा। -आशा सिंह राठौर, अधीक्षक संजीवनी सेवा संगम, इंदौर

Posted By: Prashant Pandey

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