कपीश दुबे, इंदौर । ओलिंपिक में 41 साल बाद भारतीय हाकी टीम को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले मप्र के विवेक सागर प्रसाद के अनुसार कांस्य पदक के लिए मुकाबला अहम था, लेकिन टीम पर कोई दबाव नहीं था। टीम जानती थी कि हमारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है और पाने के लिए सबकुछ है।

नईदुनिया से विशेष चर्चा में विवेक ने कहा- 41 साल से भारतीय हाकी टीम ने ओलिंपिक पदक नहीं जीता और यदि इस बार भी इतने करीब आकर हम पदक नहीं जीतते तो पता नहीं अगला मौका कब मिलता। अंतिम छह सेकंड के रोमांच के बारे में पूछने पर विवेक ने कहा- सिर्फ वह छह सेकंड ही नहीं, बल्कि टाइमआउट के बाद जब मैच शुरू हुआ तो किसी तकनीकी खामी के कारण 10 सेकंड घड़ी ही शुरू नहीं हुई थी। वह भी एक फैक्टर रहा, लेकिन हमें अंदर से विश्वास था कि हमारे पास दुनिया के श्रेष्ठतम गोलकीपर में से एक है। हम पर अतिरिक्त दबाव नहीं था। हम जानते थे कि नकारात्मक सोच रखेंगे तो कुछ ठीक नहीं होगा। हमें एक-दूसरे के तालमेल पर भरोसा था।

डीएसपी की जिम्मेदारी संभालूंगा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सम्मानित करने और डीएसपी की नौकरी देने की घोषणा के बारे में विवेक ने कहा- मैं अभी पीएसपीबी (पेट्रोलियम स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड) की ओर से खेलता हूं, लेकिन मप्र शासन में जिम्मेदारी संभालना चाहंूगा। मैं डीएसपी का पद स्वीकार करूंगा। अभी मेरा करियर प्रारंभ ही हुआ है। आगे भी अपने अनुभव का इस्तेमाल कर मप्र की सेवा करना चाहता हूं।

ऐसे थामी हाकी

विवेक ने बताया कि मेरे गांव से कुछ दूर सेना की आर्डिनेंस फैक्ट्री के मैदान पर हाकी खेली जाती थी। मेरा भी मन हुआ तो मैं घर से अकेला वहां खेलने जाने लगा। तब सुविधाएं नहीं थीं। वर्ष 2012 में मुझे लगा कि अब खेल में करियर बनाया जा सकता है। अगले साल मप्र अकादमी में आया। इसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेरे पापा शिक्षक हैं और वे चाहते थे कि मैं इंजीनियर बनूं, ताकि अच्छी नौकरी लगे। हमारे परिवार में भी कोई खिलाड़ी नहीं है, मगर मैं खिलाड़ी बनना चाहता था।

धार्मिक स्वभाव के हैं विवेक

विवेक ने बताया कि मैं बहुत धार्मिक स्वभाव का हूं। हर साल शिर्डी जाता हूं, मगर ओलिंपिक पदक के लिए कोई मान-मन्न्त नहीं की थी। मेरे परिवार ने जरूर गांव के मंदिर में प्रार्थना की थी कि यदि मैं पदक जीतकर लौटा तो बैंडबाजे के साथ घर से मंदिर तक जाएंगे। जब मैं लौटा तो यह मान पूरी की। उन्होंने कहा कि मैं अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देता हूं। मैंने मेहनत की, लेकिन परिवार ने हर स्तर पर मेरा समर्थन किया। अब खुश हूं कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरा।

Posted By: Sameer Deshpande

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