इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Niranjanpur Mandi Indore। आइडीए ने 30 करोड़ रुपये खर्च कर निरंजनपुर सब्जी मंडी तैयार की, लेकिन उससे गुंडे कमाई कर रहे हैं। पिछले दिनों पकड़े गए गैंगस्टर सतीश भाऊ की अवैध कमाई की जब पुलिस ने पड़ताल की तो निरंजनपुर सब्जी मंडी में उसके गुर्गों की अवैध दुकानों का पता चला। भाऊ के अलावा मंडी में गुंडे युवराज के गुर्गों ने भी अवैध गुमटियां लगा रखी हैं। पूरी मंडी में 40 से ज्यादा अवैध गुमटियों से गुंडे लाखों रुपये किराया वसूल रहे हैं। एक गुंडे ने तो पिछले ही दिनों चार लाख रुपये मंडी में शेड लगाने के लिए खर्च किए। अब वह उस शेड के नीचे बैठकर सब्जी बेचने वालों से रोज डेढ़-दो सौ रुपये वसूल रहा है।

15 एकड़ एरिया में तैयार इस मंडी की जमीन सहित कीमत 30 करोड़ रुपये है। डेढ़ साल पहले जब नगर निगम ने राजकुमार मिल सब्जी मंडी को हटाया था, तो सब्जी व्यापारियों ने निरंजनपुर मंडी में कारोबार शुरू कर दिया। अब यहां भी सब्जी मंडी संचालित हो रही है और राजकुमार मिल तालाब के पास भी फिर मंडी लगने लगी है। लेकिन आइडीए को न तो पैसा मिला और न ही संचालन की जिम्मेदारी ली।

मंडी के संचालन की व्यवस्था दबंगों ने संभाल रखी है और अपने हिसाब से नियम बनाकर रोज सब्जी बेचने के लिए आने वालों से पैसा लिया जाता है। मंडी बंद होने के बाद सुरक्षा के नाम पर भी पैसा लिया जा रहा है। मंडी के असली मालिक आइडीए का रुख भी गुंडों को लेकर सख्त नहीं है और अभी तक कब्जों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि छोटे लोग छोटी भी शर्तों का पालन नहीं करते तो लीज उल्लंघन का नोटिस मिल जाता है। सब्जी मंडी में हो रहे अवैध कब्जों के बारे में अफसरों का कहना है कि आइडीए के पास अतिक्रमण हटाने का अधिकार नहीं है।

फल वालों से ले लिए पैसे, नहीं बनाए शेड

मंडी में पहले सब्जियां बिकती थीं, लेकिन ग्राहकी बढ़ने के बाद अब फल व्यापारी भी यहां दुकानें लगाने में दिलचस्पी ले रहे हैं। तीन गुंडों ने कुछ व्यापारियों से शेड बनाकर देने के लिए एडंवास में रुपये ले रखे हैं, लेकिन अभी तक शेड तैयार नहीं किए। अब मंडी के खाली हिस्से में बड़े शेड लगाकर गोदाम बनाने की तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए बल्लियां गाड़ दी गई हैं।

मंडी समिति ने कर दिया इन्कार

आइडीए ने स्कीम- 78 पार्ट-2 में जब मंडी का निर्माण शुरू किया था तो मंडी समिति इसे लेने के लिए राजी थी, लेकिन मंडी बनने के बाद समिति ने इसे लेने से इन्कार कर दिया और आइडीए ने भी अवैध कब्जों की तरफ ध्यान नहीं दिया। तीन साल पहले मंडी के ओटले हटाकर व्यावसायिक प्लाट काटने की सहमति भी आइडीए बोर्ड में बनी थी, लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया।

Posted By: Sameer Deshpande

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