Indore Court News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सरकार को मंगलवार को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष बताना है कि उसे निजी और सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने में क्या दिक्कत है। अगर शासन का जवाब नहीं आता है तो हाई कोर्ट शासन पर हर्जाना भी लगा सकती है। सरकारी वकील के अनुरोध पर पिछली बार कोर्ट ने शासन को जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। एक पेज के आदेश में कोर्ट ने लिखा था कि अगली सुनवाई पर जवाब नहीं आया तो सरकार पर हर्जाना लगाया जा सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि मंगलवार को शासन का जवाब आ ही जाएगा।

सरकार को यह जवाब उस जनहित याचिका में देना है जिसमें प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र निजी और सरकारी अस्पतालों में नहीं खोलने का मुद्दा उठाया गया है। याचिका एडवोकेट विनोद द्विवेदी ने दायर की है। कहा है कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र अच्छी योजना है। इससे मरीजों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध हो रही हैं। सरकार ने जगह-जगह ये केंद्र खोले लेकिन सरकारी और निजी अस्पतालों में ये केंद्र नहीं हैं जबकि इन केंद्रों की अस्पतालों में ज्यादा आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि प्रदेश के सिर्फ सात अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र हैं। इंदौर में तो किसी भी अस्पताल में यह सुविधा नहीं है। याचिकाकर्ता के आरंभिक तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर उसे सरकारी और निजी अस्पतालों में इन औषधि केंद्रों को खोलने में क्या दिक्कत है।

सोमवार को शहर में मिला एक संक्रमित

शहर में सोमवार को कोरोना का एक संक्रमित मिला। इस दिन 69 सैंपलों की जांच की गई। इसी एकमात्र मरीज का इंदौर में कोरोना का इलाज चल रहा है। अब तक 3865623 सैंपलों की जांच हुई है। इनमें से 212514 संक्रमित मिले हैं।

Posted By: Sameer Deshpande

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