Road Safety Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अगर आप नियम का पालन करेंगे, तो चालान नहीं बनेगा। साथ ही आपका सफर सुरक्षित हो जाएगा। ऐसा करेंगे, तो आपके साथ दोस्त और स्वजन भी ऐसा ही करेंगे। इस तरह से धीरे-धीरे लोग यातायात नियमों के प्रति जागरूक हो जाएंगे।

यह कहना था एआरटीओ ह्रदयेश यादव का। वे बुधवार को नईदुनिया के सड़क सुरक्षा अभियान कार्यक्रम के तहत राऊ में मां उमिया कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में छात्राओं से चर्चा कर रहे थे। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में प्राचार्य बबीता हार्डिया ने कहा कि यातायात नियमों का पालन कर जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाना चाहिए। यहां प्रशिक्षण के बाद सभी प्रतिज्ञा लें कि अब ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं करेंगे।

एआरटीओ यादव ने कहा कि आप सभी जीवन में लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, लेकिन कोई एक गलती आपकी तपस्या को खराब कर सकती है। ट्रैफिक को लेकर जागरूक होना होगा। हम सीट बेल्ट नहीं पहनने को अपनी समझदारी समझते हैं। गाड़ी में अगर सीट बेल्ट नहीं पहना तो दुर्घटना के समय एयरबैग खुलने में देरी हो सकती है। वहीं अगर आपने गाड़ी का बंपर बचाने के लिए बुलगार्ड लगवा लिया है, तो दुर्घटना के समय बंपर तो बच जाएगा, लेकिन आपका एयरबैग थोड़ी देर से खुलेगा और आप चोटिल हो जाएंगे।

यादव ने छात्राओं से कहा कि आप देश का भविष्य हैं। बड़े होकर देशहित में कुछ करेंगे। आप लोगों को कुछ भी होने पर देश के लिए नुकसान दायक होगा। यातायात को लेकर शिक्षित होने की काफी जरूरत है।

राऊ थाने के सब इंस्पेक्टर केएस बामनिया ने कहा कि दुघर्टनाओं में सबसे अधिक मौतें हेलमेट नहीं लगाने से होती हैं। इसलिए हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि गाड़ी चलाते समय हेलमेट पहनें जिससे हम सुरक्षित रहें। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के अध्यक्ष बाबूलाल भूत, सचिव धनश्याम चक्कीवाले, लेखराज पाटीदार आदि मौजूद थे।

छात्रा बोली घर वाले नहीं पहनते सीट बेल्ट

कार्यक्रम के दौरान 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने एआरटीओ यादव से कहा कि मैं चाहती हूं कि मेरे घर वाले सीट बेल्ट पहनें, हेलमेट पहने लेकिन वे सुनते नहीं है। ऐसे में क्या करना चाहिए। इस पर एआरटीओ ने कहा कि आप अपनी पसंदीदा वस्तु मंगवाने और अपनी बात मनवाने के लिए जिस तरह से स्वजन के सामने जिद करते हैं, उसी तरह से इस बात को लेकर भी जिद करें।

आप केवल 21 दिन तक लगातार उन्हें टोकें इसके बाद वे खुद इसका पालन करने लगेंगे। एक अन्य छात्रा ने पूछा कि दुर्घटना के समय किसी घायल की मदद करने में डर लगता है। कुछ लोग इस तरह से आपराधिक घटनाओं को भी अंजाम देते हैं। इस पर अधिकारियों ने कहा कि आप केवल डायल 100 को फोन कर दें।

चालकों से कहा- डैश बोर्ड पर रखें परिवार का फोटो

आप बच्चों को लेकर जाते हैं। कई बार जल्दबाजी में तेज गाड़ी भी चला लेते हैं। मेरा एक ही निवेदन है कि आप डैश बोर्ड पर अपने परिवार की फोटो लगा लीजिए या सामने कांच पर चिपका लीजिए। इससे ध्यान रहेगा कि घर पर आपका कोई इंतजार कर रहा है। यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। जिसका हम उपयोग करते हैं। यह बात एआरटीओ ह्रदयेश यादव ने स्कूल में ड्राइवरों के प्रशिक्षण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करें। अगर आपका चालान बनता है तो इसे खुद भरें। स्कूल प्रबंधन से नहीं भरवाएं। आपके वेतन से चालान राशि कटेगी तो पता चलेगा कि आप गलत हैं। गाड़ी चलाते समय सभी नियमों का पालन करें। स्पीड गर्वनर से कोई छेड़छाड़ नहीं करें।

Posted By: Sameer Deshpande

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