इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंजीनियरिंग करना उतना मुश्किल नहीं जितने तकनीकी कौशल में महारथ हासिल करना है। अपने तकनीकी कौशल को निखारना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। अपने सपनों को पूरा करने के लिए आपको अपनी नींद को भी दाव पर लगाना पड़े तो पीछे न हटें। सफलता तब ही प्राप्त होगी जब आप अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह से समर्पित होंगे।

यह बात एस्पायर टू इंजीनियरिंग विषय पर निजी कंपनी के पूर्व उपाध्यक्ष विनोद साठे ने इंजीनियरिंग कर रहे विद्यार्थियों से कही। शहर के एक निजी शैक्षणिक संस्थान में चर्चा आयोजित की गई। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित हुई इस चर्चा में साठे ने कहा कि हम उन महत्वकाक्षांओं की पूर्ति के लिए प्रयासरत रहते हैं जो हमारी होती है क्योंकि उस महत्वकांक्षा को हमने संजोया है। उस महत्वकांक्षा की पूर्ति के लिए हम अधिक प्रयास करते हैं और अपने सपनों को पूरा करने की जवाबदारी भी हमारी ही होती है। हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए एक मां की तरह सोचना होगा जो बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे तार्किक और वैचारिक ज्ञान को बढ़ाएं। यह न केवल परीक्षा में काम आते हैं बल्कि जीवन में भी काम आते हैं। जीवन से अंधविश्वास को दूर करें। इस विषय में उन्होंने कुछ रोचक अनुभव भी साझा किए। इस अवसर पर संस्थान के वाईस चेयरमैन डा. अशोक कुमट, डा. संजय टी. पुरकर, डा. निर्मल दगधी आदि पदाधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. ऋतु गुप्ता ने किया। आभार प्रो. ब्रजेश चतुर्वेदी ने माना।

Posted By: Sameer Deshpande

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