IIM Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। उद्योग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की ओर बढ़ रहे हैं। नई प्रौद्योगिकी हमारे लिए चुनौती नहीं है बल्कि चुनौती यह है कि हम प्रौद्योगिकी के साथ तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम नहीं है। इसके लिए समाधान खोजने की जरूरत है ताकि रोबोट, इंसान और ह्यूमनाइड साथ-साथ में अपनी उन्नति कर सके।

यह कहना है भारतीय प्रबंध संस्थान आइआइएम रायपुर के निदेशक प्रो. भरत भास्कर का। शुक्रवार से भारतीय प्रबंध संस्थान आइआइएम इंदौर में तीन दिवसीय आनलाइन अनुसंधान और शिक्षा में उत्कृष्टता सम्मेलन की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का विषय मैनेजमेंट मेटामारफोसिस- लिविंग विथ दी पेंडमिक है। सम्मेलन के तहत अनुसंधान उत्कृष्टता के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड की घोषणा 20 जून को की जाएगी।

पहले दिन आइआइएम रायपुर के प्रो. भास्कर सहित आइआइएम तिरुचिरापल्ली के निदेशक प्रो. पवन कुमार सिंह, आइआइएम बैंगलुरु के निदेशक प्रो. ऋषिकेश टी. कृष्णन और आइआइएम रांची के निदेशक प्रो. शैलेंद्र सिंह भी शामिल हुए। सभी ने कोविड की चुनौतियों पर पैनल डिस्कशन में भी हिस्सा लिया।

प्रो. पवन कुमार ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में चुनौतियां महामारी से पहले भी मौजूद थी हमें अब चुनौतियाें का समाधान कैसे किया जाए इस पर विचार करना हैं। आफलाइन और आनलाइन दोनों शिक्षा प्रक्रिया में चुनाैतियां हैं लेकिन शिक्षण संस्थानों को अब उन समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है जिनका हम लंबे समय से सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा विद्यार्थियों में इस तरह से कौशल विकसित करना चाहिए कि वे बदलती दुनिया का सामना करने में सक्षम हो सके। प्रो. ऋषिकेश टी. कृष्णन ने बताया कि डाटा में वृद्धि हमें बेहतर शोध में मदद करेगी। अब हमारे पास प्रचुर मात्रा में डाटा है। हम डाटा एनालिटिक्स के महत्व को समझते हैं इसलिए डाटा प्रौद्योगिकी के साथ शैक्षणिक संस्थानों को अब अधिक विशिष्ट और तकनीक संचालित कार्यक्रम प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

प्रो. शैलेंद्र सिंह ने कहा कि अब शैक्षिक संस्थानों को एक संशोधित पाठ्यक्रम प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए। इसमें कौशल को बढ़ावा देने वाले विषयों को शामिल किया जाना चाहिए। महामारी ने हमें अवसरों की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित किया है और यह सोचने के लिए भी समय दिया है कि प्रकृति ने हमें न केवल जीवित रखा है बल्कि समय के साथ विकसित भी किया है।

दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी शिक्षा देंगे

आइआइएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहा कोविड ने सभी के जीवन पर प्रभाव डाला है। शिक्षा ही नहीं सभी क्षेत्र इससे प्रभावित हुए है। हमें आफलाइन से आनलाइन माध्यम से शिक्षा देने के लिए काफी बदलाव करने पड़े हैं। महामारी ने दया और सहानुभूति का भाव सिखाया। हम जोर दे रहे हैं कि सभी आनलाइन कक्षाओं को रिकार्ड किया जाए और दूरदराज में रहने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचाए।

सम्मेलन के पहले दिन चार कार्यशालाएं भी आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों को अपने शोध पत्रों की जानकारी देने के लिए मंच प्रदान किया गया । इसमें ओजीगिन विश्वविद्यालय के प्रो. अबरार अली सैय्यद द्वारा पेपर डेवलपमेंट पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन आइआइएम इंदौर के प्रो. श्रीनिवास गुंटा कार्यशाला का आयोजन करेंगे। इस दिन प्रबंधन में अनुसंधान पर कोविड का प्रभाव विषय पर चर्चा भी होगी। कार्यक्रम में 180 से ज्यादा विद्यार्थी पेपर प्रजेंटेशन देंगे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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