इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अब तक प्रबंध की शिक्षा देने वाला भारतीय प्रबंध संस्थान (आइआइएम) इंदौर देश को स्वच्छता का भी पाठ पढ़ाएगा। आइआइएम ने पिछले वर्षों में अपने परिसर से लेकर बाकी शहरों में स्वच्छता के लिए कई प्रयास किए हैं। संस्थान को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने के लिए सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाया गया है। इसके तहत देशभर के नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों, अफसरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

स्वच्छता के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्टार्टअप की भी आइआइएम मेंटरशिप करेगा। किसी भी शहर को कैसे स्वच्छ बनाया जा सकता है, इसके लिए आइआइएम पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है। इसमें थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह के विषय शामिल किए जाएंगे। पाठ्यक्रम करने वाले प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट और डिप्लोमा दिया जाएगा। आइआइएम इंदौर के साथ नगर निगम इंदौर जुड़ा रहेगा जो प्रशिक्षण लेने वाले प्रतिभागियों को शहर के विभिन्न स्थानों पर ले जाकर बताएगा कि किस तरह कचरे का निष्पादन किया जा रहा है।

अमेरिकी, ब्रिटिश और यूरोपीय विश्वविद्यालय से समझौता - आइआइएम के प्रो. हिमांशु राय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन- 2 के तहत गार्बेज फ्री भारत बनाने का विजन रखा है। इसके तहत वाश यानी वाटर सेनिटेशन और हाइजिन को बढ़ाने पर कोर्सेस होंगे। इसमें दो अमेरिकी और दो ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के साथ ही एक यूरोपीय विश्वविद्यालय के साथ भी हमने समझौता किया है। हम 50 से 75 बेस्ट परफार्म करने वाले नगरीय निकायों के लिए दस दिन का कार्यक्रम करेंगे। पांच दिन का कार्यक्रम आइआइएम इंदौर में होगा। इसमें इंदौर नगर निगम की बेस्ट प्रैक्टिसेस से भी प्रतिनिधियों का परिचय कराएंगे। पांच दिन का कोर्स हमारे पार्टनर संस्थाओं के यहां होगा।

स्टार्टअप की मेंटरशिप करेंगे - प्रो. राय ने बताया कि सेंटर इस तरह की सामग्री भी तैयार करेंगे कि लोगों की सोच को कैसे बदला जाए। उन्हें स्वच्छता के लिए कैसे प्रेरित किया जाए। यह मानक भी हम निर्धारित करेंगे, जिससे किसी दुकान, शोरूम, फैक्ट्री या संस्था के स्वच्छ होने का दावा किया जा सके। इसके लिए गोल्ड, प्लेटिनम या अन्य स्टैंडडर्स भी तय कर सकते हैं। छोटे-छोटे माड्यूल भी होंगे। मैनेजमेंट के थ्योरी और कांसेप्ट्स भी होंगे। यदि कोई स्टार्टअप शुरू करता है, तो हम उसकी मेंटरशिप करेंगे। यदि उस स्टार्टअप में टेक्नोलाजी से जुड़ा पहलू है, तो इसके लिए हमने आइआइटी इंदौर से एमओयू किया है।

स्वच्छता पर दी जाएगी कंसल्टेंसी - हम मिलकर उस स्टार्टअप की मेंटरशिप करेंगे। सेंटर के जरिए कंसल्टेंसी भी दी जाएगी। टाउनशिप या फैक्ट्री को स्वच्छता पर कंसल्टेंसी चाहिए तो हम उन्हें यह प्रदान करेंगे। सेंटर के लिए वन टाइम ग्रांट के तौर पर सरकार ने 19.95 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। दस करोड़ रुपये इसी साल मिलेंगे। पांच करोड़ अगले साल और फिर पांच करोड़ उसके अगले साल। इससे हम सेंटर कोआर्डिनेटर रखेंगे। एकेडमिक एसोसिएट होंगे। सेंटर की कमान आइआइएम निदेशके के हाथों में होगी।

अयोध्या और कानपुर को भी स्वच्छ बनाने के लिए हो रहा है काम - आइआइएम इंदौर कई वर्षों से इको फ्रेंडली परिसर के लिए काम कर रहा है। संस्थान में मैस में बचे खाने से खाद तैयार की जाती है। परिसर में पालीथिन पूरी तरह बैन है। सीमेंट की सड़कों की जगह डामर की सड़कें बनाई गई। हरियाली को बढ़ाया गया और परिसर में रहने वाले विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए परिसर में ही सब्जियां उगाई जा रही है। अयोध्या को सबसे स्वच्छ शहर बनाने के लिए आइआइएम इंदौर ने प्रशासन को सफाई का प्रारूप प्रस्तुत कर दिया है। आइआइएम इंदौर कानपुर को भी स्वच्छ और जाम मुक्त बनाने के लिए भी काम कर रहा है।

Posted By: Hemraj Yadav

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