- संघर्ष की कहानियों के बीच पांच ट्रिलियन इकोनॉमी पर हुई बात

- आईएमए के इंटरनेशनल कॉन्क्लेव में सामाजिक कार्यकर्ता और थर्मेक्स की पूर्व चेयरपर्सन अनु आगा को दिया गया लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

इंदौर। नईदुनिया रिपोर्टर

इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा शुक्रवार से अभय प्रशाल में शुरू हुए दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्क्लेव में पहले दिन कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने 'पांच ट्रिलियन इकोनॉमी- विजन टू रियलिटी' विषय पर बात की। सुबह के सत्र में समाजसेवी और थर्मेक्स कंपनी की पूर्व चेयरपर्सन अनु आगा को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। यह अवार्ड अनु को उनके प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के संघर्षों और समाज में बेहतर जगह स्थापित करने के लिए दिया गया। अनु ने अपने जीवन के संघर्षों पर बात करते हुए बताया कि यह जरूरी नहीं कि सिर्फ पुरुष ही बिजनेस और परिवार की उलझन में संघर्ष करते हैं। कई ऐसी महिलाएं भी हैं, जिनके परिवार में बहुत दुख आता है, लेकिन वे समाज के प्रति वे अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए मुकाम बनाती है।

बेटे की दुर्घटना में मृत्यु हो गई, पर खुद को टूटने नहीं दिया

अनु ने संघर्षों को चुनौती देकर सिद्घ किया है कि किसी भी काम को महिला या पुरुष होने के आधार पर वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कामयाबी महिला या पुरुष होने के आधार पर नहीं मिलती है। कामयाब होने के लिए केवल सहनशीलता, मुश्किलों से लड़ने और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। इसके बाद धारा अपने आप ही आपके बनाए रास्तों की ओर मुड़ जाती है। अनु ने बताया पिता बाथेना ने बायलर्स बेचने और बनाने के लिए वानसन नामक कंपनी की शुरुआत की थी। जब अनु ने रोहिंटन आगा से विवाह किया तो बाथेना ने अपने दामाद के हाथों में उस कंपनी की बागडोर दे दी। इसके बाद रोहिंटन ने कंपनी का नाम थर्मेक्स रखा। अनु ने बताया 1982 में उनके पति को हार्ट अटैक आया और वह पति का साथ देने के लिए कंपनी के मानव संसाधन विभाग में बतौर एक्जीक्यूटिव कार्य करने लगी थी। वह अपनी इस जिंदगी में खुश थी और कुछ अधिक पाने की चाह उन्हें थी भी नहीं।

इसके बाद अचानक उनकी जिंदगी में बदलाव आ गए। 1996 में पति की मृत्यु हो गई। अनु इस बीच खुद को संभाल पाती उससे पहले ही कंपनी के बोर्ड ने फैसला लिया कि उन्हें चेयरपर्सन बनाया जाए। वह कहती हैं बोर्ड ने मेरे पति की मृत्यु के दो दिन के अंदर यह फैसला कर दिया कि मुझे चेयरपर्सन बनाया जाएगा। मुझे उम्मीद थी कि जब उनका बेटा इंग्लैंड से पढ़ाई पूरी कर वापस आएगा तो वह इस दायित्व को अपने ऊपर ले लेगा। उनकी बेटी विवाह के बाद इंग्लैंड में रह रही थी। उस वक्त और कोई नहीं था जिसके हाथों में कंपनी की बागडोर सौंपी जाती। ऐसी स्थिति में उन्हें कमान संभालनी पड़ी। अगले ही वर्ष 25 वर्षीय पुत्र कुरुष की भी एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। मैं बिलकुल टूट गई थी और समझ नहीं पा रही थी कि अपने दर्द को कैसे समेटे। फिर दुख को बर्दाश्त करने की शक्ति उन्हें विपश्यना सीखने से मिली। बिना किसी अनुभव के जटिल इंजीनियरिंग कंपनी को संभालना आसान नहीं था। उन्हें कई बार लगातार नुकसान का सामना करना पड़ा। एक बार एक शेयर होल्डर का उन्हें पत्र मिला उसमें लिखा था कि यो तो आपके पास काफी पैसा है या आपको पैसे की परवाह नहीं है। आपने शेयर धारकों को नीचा दिखा दिया है। यह पढ़कर उन्हें एहसास हुआ कि बिजनेस की बारीकियों से वह कितनी अनजान है। मैं उस रात सो नहीं सकी। मैं और मेरे पति हमेशा चाहते थे कि निवेशकों का विश्वास हम पर बना रहे। इसके बाद से पूरे पैमाने पर सुधार करने में जुट गई और आज यह मुकाम हासिल किया।

कंपनी को बुलंदियों पर पहुंचाकर अब बच्चों को शिक्षा दे रही है

अनु ने बताया जिस समय मुझे कंपनी सौंपी गई थी उस समय टर्नओवर 650 करोड़ था। जब 2004 में अपनी बेटी को कंपनी सौंपी उस समय टर्नओवर 1281 करोड़ रुपए का हो चुका था। अनु आकांक्षा नामक एक एनजीओ की चेयरपर्सन हैं। इसके तहत हजारों बच्चों को शिक्षा सुविधाएं दे रही हैं। वे कहती हैं जीवन की घटनाओं ने मुझे इतना बोल्ड बना दिया कि अब किसी चीज से डर नहीं लगता है। अगर कभी लगता है कि मैं कमजोर पड़ रही हूं तो एक घंटा मेडिटेशन करती हूं। इससे मुझे शक्ति मिलती है।

हार्डवेयर से हो रही नई तरह की हैकिंग

ल्यूसिडस टेक के को-फाउंडर राहुल त्यागी कहते हैं सायबर सिक्योरिटी देश के लिए बड़ा चैलेंज है। नई तरह के सायबर अपराध होने लगे हैं। अब हार्डवेयर में वायरस डालकर डाटा चुराने का काम हो रहा है। भविष्य में हो सकता है कि कंप्यूटर के माऊस और अन्य उपरकरणों के हार्डवेयर में कोई ऐसे वायरस आने लगे जो आपका डाटा चोरी करवा रहे हों। उन्होंने बताया दुनिया की कई बैंकों ने भी इस बारे में चिंता जाहिर की है। कई बैंकों का पैसा हैकर उड़ा चुके हैं। एक कंपनी का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी के नाम से मिलता-जुलता ईमेल आईडी बनाकर किसी हैकर ने करोड़ों रुपए कमा लिए। इस तरह के कुछ हैकर ऐसे भी हैं जो हजारों करोड़ रुपए चुराकर अपने चेहरे तक प्लास्टिक सर्जरी से बदलवा चुके हैं। राहुल ने ईमेल और वेबसाइट से किए जाने वाले सायबर अपराध के कुछ उदाहरण प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किए।

हमें मेडिसिन क्षेत्र में खुद की सामग्री तैयार करनी होगी

सिप्ला के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वायके हामिद ने फार्मेसी क्षेत्र के चैलेंज पर बात करते हुए कहा कि भारत में मेडिसिन तैयार करने में लगने वाली सामग्री बहुत कम है। गंभीर बीमारियों की मेडिसिन बनाने वाली कच्ची सामग्री के लिए भी हम चायना देशों पर निर्भर है। सरकार को इस बात पर जोर देना चाहिए कि फार्मेसी तैयार करने वाले कंटेंट देश में ही बनाए जाएं। बाहर के देशों में अगर किसी तरह का विवाद होता है और स्थिति अगर खराब हो जाती है तो ऐसे में हमारे देश में मेडिसिन बनाने वाली कंपनियां हाथ खड़े कर देगी। उन्होंने कहा पीथमपुर क्षेत्र के फार्मेसी मैन्युफेक्चरों को बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधा के अलावा काम करने का अच्छा माहौल मिल रहा है।

टिकटोक अब नॉलेज कंटेंट की ओर जा रहा है

टिकटोक फॉर गुड की प्रमुख डॉ. सुबी चतुर्वेदी ने कहा भारत ने इंटरनेट के मामले में चायना को भी पीछे कर दिया है। यहां के 60 लाख लोग ऑनलाइन रहते हैं। हालांकि ग्रामीण का 40 फीसदी क्षेत्र आज भी इससे दूर है। अब हम नॉलेज आधारित वीडियो कंटेंट की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इसके लिए शिक्षण और अन्य संस्थानों से बात कर रहे हैं। यूनिसेफ जैसे संस्थान हमारे साथ जुड़े हैं। ऐसे में हम समाज को आगे बढ़ाने वाले कंटेंट पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने बताया इंटरनेट का उपयोग तो बढ़ा है, लेकिन लोगों के पास समय कम होता जा रहा है। इसके लिए हमने वीडियों के माध्यम से अपनी बात पहुंचाने का प्लेटफार्म दिया है। भारत को पांच ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर बढ़ाने में छोटे बिजनेस बड़ा योगदान दे सकते हैं।

पैसा कमाने से जरूरी है खुशियां बनी रहे

आईआईएम के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहा पांच ट्रिलियन इकोनॉमी के लिए सभी को अपना कंट्रीब्यूशन देना होगा। इसमें एमएसएमई क्षेत्र के व्यापार-उद्योग बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। महिलाओं के बिना भी ग्रोथ मुमकिन नहीं है। महिलाओं की संख्या लीडरशिप में बढ़ानी होगी। जॉब एक बड़ी समस्या है। इसका अभाव रहने से युवाओं को सही दिशा में बढ़ने का रास्ता नहीं मिल पाता है। राय का कहना है पैसा कमाना से ज्यादा जरूरी है जीवन में खुशियां लाएं। इसके लिए जरूरी है कि नेगेटिव सोच न रखते हुए समाज को पॉजिटिव मोड की ओर ले जाए। हमें लीडरशिप की परिभाषा बदलनी होगी। लोगों को अपनी पहचान बनानी होगी। पब्लिक पॉलिसी को बेहतर करने के लिए काम करना होगा। तकनीक को भी ज्यादा से ज्यादा अपनाना होगी। इसका उपयोग शिक्षा प्रदान करने में अच्छे से किया जा सकता है। आईआईएम में प्रवेश के लिए होने वाली केट परीक्षा की ही बात करे तो इसमें करीब दो लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे, लेकिन कुछ ही प्रतिशत को प्रवेश मिल पाता है। ऐसे में हमें ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से हमें विद्यार्थियों तक पहुंचना होगा।

नोट- फोटो ऑनलाइन है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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