हर्षल सिंह राठौड़, इंदौर। कोरोना संक्रमण के डर और सन्नाटे को अपनी सकारात्मक से तोड़ते हुए शुक्रवार से इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ हो गया। नईदुनिया के प्रिंट सहयोग के साथ हेलो हिंदुस्तान द्वारा आयोजित मध्य भारत के इस सबसे बड़े साहित्यिक समारोह में पहले दिन विचारों का गहन मंथन तो हुआ ही, साहित्य, संस्कृति व कला पर भी खूब बात हुई। शुभारंभ सत्र में ठेठ देशज अंदाज में मुकेश चौहान ने साथियों के साथ कबीर गायन प्रस्तुत किया। फिर राजस्थान से आए कलाकार माजिद खान ने साथी कलाकारों के साथ 'पधारो म्हारे देस" की प्रस्तुति दी। दल ने गायकी के साथ घूमर नृत्य के माध्यम से उपस्थितजनों को मालवा में राजस्थान की रज का अहसास करा दिया। इसके बाद नन्ही वामिका पंड्या ने शिव तांडव स्त्रोत प्रस्तुत किया। उद्घाटन दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर डा. विक्रम संपत, डा. आनंद रंगनाथन, अनंत विजय, सद्गुरु शरण अवस्थी, अभिषेक श्रीवास्तव, वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णकुमार अष्ठाना और आरजे रवि उपस्थित थे। कार्यक्रम में डा. शरद पगारे, नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, सदाशिव कौतुक, हरेराम वाजपेयी, ज्योति जैन सहित कई साहित्यकार, कलाकार व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह सारस्वत आयोजन 28 नवंबर तक चलेगा।

नईदुनिया के सत्र में 'विचारों में पक्षपात पर हुई दिलचस्प बातचीत

नईदुनिया द्वारा प्रायोजित महत्वा सत्र 'विचारों में पक्षपात विषय पर युवा विज्ञानी और लेखक डा. आनंद रंगनाथन से नईदुनिया (मप्र-छग) के राज्य संपादक सदगुरु शरण अवस्थी और डा. सरिता राव ने बात की। डा. रंगनाथन ने कहा कि यह विचारों का ही पक्षपात रहा कि देश में कुछ वर्षों पहले तक सिक्के का एक ही पहलू दिखाया गया। देश की आजादी में जवाहरलाल नेहरू के योगदान के बारे देश को खूब जानकारी दी गई, साथ ही इंदिरा गांधी को 'मदर इंडिया की तरह प्रस्तुत किया गया। देश में सबकुछ अच्छा था, कहीं कोई कमी नहीं थी। वास्तव में वही बताया गया जो अच्छा था, लेकिन दूसरे पक्ष को बताया ही नहीं गया। आवश्यकता है कि हर पक्ष के बारे में जनता को बताया जाए। देश के आमजन को सत्य जानने का अधिकार है। टि्वटर द्वारा पहले अकाउंट प्रतिबंधित करने और फिर माफी मांगने के सवाल पर डा. रंगनाथन ने कहा कि 'वास्तव में इंटरनेट मीडिया आम व्यक्ति को ही प्रतिबंधित कर सकता है, लेकिन यदि कोई सत्य के साथ खड़ा हो तो चाहे टि्वटर हो या कोई और, उन्हें क्षमा मांगनी पड़ती है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने विनोदपूर्ण अंदाज में यह भी कहा कि 'लोग भले ही जाकिर नायक को बुरा कहें, उन्हें खलनायक मानें, लेकिन वे मेरे नायक हैं, क्योंकि उन्होंने ही मेरी आंखें खोली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल विचारधारा को व्यापार में शामिल किया जा रहा है। यह ठीक नहीं कि जिसे आप नापसंद करते हैं, उसका पूरी तरह से बहिष्कार कर देते हैं, जबकि व्यापार में यह नहीं होना चाहिए।

मोदी के उद्भव के बाद सुविधा वाली राजनीति खत्म हो गई : अनंत विजय

लेखक, आलोचक व वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने एक सत्र में कहा कि 'राष्ट्रीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उद्भव के बाद सुविधा वाली राजनीति खत्म हो गई है। उन्होंने सोनिया, प्रियंका या राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि 'यदि गांधी परिवार को लगता है कि उनकी लोकप्रियता राष्ट्रव्यापी है, तो उन्हें ग्रामीण्ा सीटों के बजाय अपेक्षाकृत बेहतर शिक्षा दर वाली शहरी सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए। वे उनकी लिखी पुस्तक 'अमेठी संग्राम : ऐतिहासिक जीत, अनकही दास्तान पर आयोजित सत्र 'अमेठी के अंगूर खट्टे भी, मीठे भी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 'बीते लोकसभा चुनाव में अमेठी में स्मृति ईरानी को कई कारणों से विजय मिली। अमेठी की जनता ने परिवारवाद को नकार दिया। जनता परिवारवाद से ऊब चुकी थी। कांग्रेस पार्टी के 100 साल से ज्यादा के इतिहास में यह उसकी सबसे बड़ी पराजय थी क्योंकि इसके पहले कोई भी कांग्रेस अध्यक्ष कभी पराजित नहीं हुआ था। यही कारण था कि 'अमेठी संग्राम' पुस्तक लिखने का विचार आया। उन्होंने कहा कि मेरी पुस्तक तथ्यों तथा शोध पर आधारित है। पुस्तक में मैंने राजनीति जैसे विषय को बेहद सरस तरीके से लिखा है।

जिसे व्याख्यान भी न समझा सकें, वह बात समझा देता है नृत्य

पद्मविभूषण सोनल मानसिंह ने सुचित्रा हरमलकर और सुगंधा बेहरे से 'संस्कृति के रंग, सोनल मानसिंह के संग" विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि जब हम शिक्षा ले रहे थे तब टीवी, मोबाइल, इंटरनेट मीडिया आदि नहीं थे, इसलिए एकाग्रचित्त होकर साधना कर पाते थे। भीतर की आग ही आपको कलाकार के रूप में गढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि नृत्य केवल नाचने का नाम नहीं है। यदि ऐसा होता तो शिव को नटराज नहीं कहा जाता। भारतीय नृत्य परंपरा वह है, जिसकी प्रस्तुति हृदय में समाहित हो जाती है और जो बात शब्दों, व्याख्यानों से भी नहीं समझाई जा सकती, उसका रहस्य नृत्य से समझाया जा सकता है। यह खुशी की बात है कि भारत में महिला-पुरुष अनुपात समानता पर आ रहा है। नारी वह है जो संग्रह, सृजन और संरक्षण करती है। भारत में महिला-पुरुष के बीच स्पर्धा की भावना नहीं होती बल्कि यहां तो दोनों एक ही रथ के दो पहिए हैं। उन्होंने धार्मिक परंपराओं के कमजोर ज्ञान पर कहा कि हम भारतीय पढ़ना ही नहीं चाहते, जिससे ज्ञान अधूरा रह जाता है। इसका लाभ उठाकर हमारी परंपराओं में अनर्गल चीजें डालकर उन्हें अशुद्ध कर दिया गया है। उन्होंने नई शिक्षा नीति में भारत की महानता पढ़ाए जाने की उम्मीद जताई।

अन्य सत्रों में भी हुआ मंथन

एक सत्र में लेखिका ममता कालिया ने कहा कि इंदौर की जमीं ऐसी है, जिसने कई कलाकारों, सृजनाकारों को जन्म दिया है। मेरे मन में अब भी इस नगर की वही छवि है, जो दशकों पहले बस गई थी। जो लेखक यह सोचते हैं कि वे इंदौर में धक्के खा रहे हैं, यह समझ लें कि वास्तव में ये धक्के नहीं बल्कि आगे बढ़ने की तैयारी है। मेरा मन करता है कि मैं अब लिखूं 'जीते जी इंदौर"। अपने लेखन के बारे में उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में घर में मुझे आलोचना सुनना पड़ी, उनसे में निखरती गई। जिन्हें घर में आलोचना मिलती है वे बाहर निखरे नजर आते हैं और जिन्हें घर में ही प्रशंसा मिल जाती है वे अच्छे लेखक नहीं बन पाते। ममता कालिया के साथ सपना शिवाले सोलंकी व डा. वाजदा खान ने चर्चा की। आयोजन में एसके मिश्रा की किताब 'जीरो एंड बियांड" तथा अदिती सिंह भदौरिया की पुस्तक 'खामोशियों की गूंज" का विमोचन भी हुआ। इसके अलावा 'मैं भी कवि" सत्र में स्थानीय रचनाकारों ने रचनाएं पेश की।

आज के महत्वपूर्ण सत्र

-सुबह 9.30 बजे से - आजादी के रंग (कविता सत्र)

-सुबह 10.05 बजे - तुम आती हो मन के द्वार (कविता सत्र)

-सुबह 10.40 बजे - मालवी-निमाड़ी कविता सत्र

-सुबह 11.20 बजे - 'अच्छी कहानी छांटना, खदान में से रत्न खोजने जैसा" विषय पर डा. इंदिरा चंद्रशेखर से अपर्णा कपूर और डा. सोनाली नरगुंदे चर्चा करेंगी। सत्र नईदुनिया द्वारा प्रस्तुत ।

-सुबह 11.50 बजे - 'कहानियां जो मुझे सुनानी ही होंगी" विषय पर कबीर बेदी से विभा सेठी और ममता बाकलीवाल चर्चा करेंगी।

-दोपहर 12.40 बजे - 'कश्मीर : जन्न्त की राह कितनी कठिन?" विषय पर राम माधव से नईदुनिया मप्र-छग के राज्य संपादक सद्गुरु शरण अवस्थी और मनमोहन जोशी चर्चा करेंगे। सत्र नईदुनिया द्वारा प्रस्तुत।

- दोपहर 2.15 बजे- 'हां विभाजन रोका जा सकता था" विषय पर उदय माहूरकर से डा. निशांत खरे चर्चा करेंगे।

-दोपहर 2.45 बजे- 'अपराध बिकता है" विषय पर संजीव पालीवाल व मनोज राजन त्रिपाठी से सोनाली नरगुंदे व गरिमा मुद्गल चर्चा करेंगी।

-दोपहर 3.20 बजे- 'कविता कुंभ"

-दोपहर 3.50 बजे- स्टोरीबाजी विषय पर दिव्य प्रकाश दुबे संबोधित करेंगे।

-शाम 4.20 बजे- 'घर का जोगी सिद्ध" विषय पर शिखा शर्मा, अनमोल ठाकुर और राहुल भोसले चर्चा करेंगे।

-शाम 4.50 बजे- लघुकथा सत्र

-शाम 5.30 बजे- मैं भी कवि : इस सत्र में नए कवि अपनी कविता प्रस्तुत करेंगे।

Posted By: gajendra.nagar

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