इंदौर (ब्यूरो)। इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की तारीख 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। व्यक्तिगत करदाताओं को इस तारीख के बाद आयकर रिटर्न दाखिल करने पर पैनल्टी चुकाना पड़ेगी। कमाई के हिसाब से इनकम टैक्स के दायरे में आ रहे तमाम करदाता अब भी रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं। पांच लाख तक की आय को करमुक्त मानकर रिटर्न जमा करने से बचा जा रहा है, जबकि छूट की यह सीमा इस बार के रिटर्न में लागू ही नहीं हुई है।

वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट स्वप्निल जैन के मुताबिक इस बार के व्यक्तिगत आयकर रिटर्न वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जमा किए जा रहे हैं। यानी एक अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक जो भी आय किसी भी व्यक्ति को हुई है, इस रिटर्न में उसका पूरा ब्योरा और आय के लिहाज से टैक्स जमा करना है।

असल में इस वित्त वर्ष के लिए इनकम टैक्स स्लैब की सीमा वही बरकरार है जो बीते वर्षों में थी। यानी ढाई लाख रुपए तक की आय ही कर से मुक्त है। इससे ज्यादा आय होने पर नियमानुसार टैक्स चुकाना होगा। कई करदाताओं में संशय की स्थिति बनी हुई है कि पांच लाख तक की आय पर टैक्स नहीं जमा करना होगा। दरअसल पांच लाख की आय पर टैक्स से छूट की घोषणा पहले अंतरिम बजट में हुई और फिर बीते दिनों आए आम बजट में।

विभाग दे रहा है हिदायत

चुनाव के पहले लाए गए अंतरिम बजट और फिर नई सरकार के आम बजट में यह घोषणा हुई, ऐसे में कई लोगों को गलतफहमी हुई है कि पिछले बजट में घोषणा हो गई थी, इसलिए इस बार से यह छूट लागू हो गई है, जबकि पांच लाख तक आय पर कर से छूट का लाभ वित्त वर्ष 2020-2021 के लिए जमा होने वाले आयकर रिटर्न में मिलेगा। वह रिटर्न अगले वर्ष जमा होना है। उसके लिए भी छूट को रिटर्न जमा कर क्लेम करना पड़ेगा। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कोई भी करदाता बिना रिटर्न जमा करे ही खुद को आयकर से मुक्त मान ले या छूट का लाभ ले ले। आयकर विभाग लगातार शिविर लगाकर रिटर्न जमा करने की हिदायत दे रहा है।