इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आयकर ने इस बार जिस अंदाज में करदाताओं को नोटिस जारी किए हैं उससे आयकर की धारा 148 सबसे क्रूरतम प्रविधान बनती दिख रही है। दिल्ली से आए सुप्रीम कोर्ट के वकील और सीए कपिल गोयल ने इंदौर में यह बात कही। शुक्रवार को आइसीएआइ (सीए) की इंदौर शाखा ने प्रत्यक्ष कर कानून पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू की। कर और कानून विशेषज्ञों ने आयकर से लेकर आडिट तक के नियमों का सूक्ष्म विश्लेषण किया। उन्होंने साफ किया कि तमाम किसानों में भ्रांति है कि उनकी सभी तरह की आय कर से मुक्त है। इसे दूर करने कि जरूरत है। नवनिर्वाचित महापौर पुष्यमित्र भार्गव कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने शहर के विकास में चार्टर्ड अकाउंटेंट समुदाय से सहयोग का आव्हान किया।

इंदौर सीए शाखा के चेयरमैन सीए आनंद जैन ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि इस बार आयकर रिटर्न फाइल करने की तिथि आगे न बढ़ाकर सरकार ने अच्छा कार्य किया। आइसीएआइ ने पहले से तय कर लिया था कि संस्थान की ओर से तारीख बढ़ाने की मांग नहीं रखी जाएगी। सीए शाखा की ओर से अध्यक्ष ने घोषणा की आसपास के ग्रामवासियों को वित्त और कर की जानकारी दे कर जागरूक करने और नए करदाता जोड़ने का बीड़ा शाखा ने उठाया है। इंदौर शहर में वसीयत लेखन को लेकर जनमानस को जागरूक किया जाएगा।

सीए सोशल आडिटर भी है - कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सीए सिर्फ फाइनेंशियल आडिटर ही नहीं बल्कि सोशल आडिटर भी है। शहर को स्वच्छ बनाने से लेकर अन्य कार्यों में भी सीए सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा है। आगे इस शहर को सुगम यातायात, पेड़ पौधों से युक्त, स्मार्ट और फाइनेंशियल सिटी के रूप में डेवलप करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका अहम रहने वाली है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इंदौर में विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से सिटी फारेस्ट डेवलप करने की योजना है। इंदौर सीए ब्रांच भी इसमें भाग लेकर अपना सामाजिक दायित्व निभाए।

विभाग का काम कानून बनाना नहीं - दिल्ली के एडवोकेट गोयल ने कहा कि कोर्ट और अथारिटी का काम कानून की व्याख्या और पालन करना है ना कि कानून बनाना, परंतु जिस तरह के निर्णय आ रहे हैं यह लगता है कि अथारिटी कानून बना रही है। कार्यक्रम के स्पीकर और डायरेक्ट टैक्स कमेटी के चेयरमैन सीए सीवी चितले ने कहा कि आइटीआर फाइलिंग के बाद अब आडिट का समय आ गया है। अब आडिट सिर्फ सामान्य आडिट ना रह कर फोरेंसिक आडिट की तरह ही हो गया है। टैक्स के साथ साथ अन्य ल और रेगुलेशन की भी रिपोर्टिंग होती है। एक छोटे करदाता का आडिट करने में कम से कम चार से पांच दिन लगते हैं और जितनी जानकारी आडिट में मांगी गई है उनकी तैयारी करने में सीए लोगो को अधिक समय देना पड़ेगा, जिस कारण प्रोफेशनल फीस का अतिरक्त भार करदाता पर आएगा।

भ्रम में न रहें किसान - कैपिटल गेन विषय पर सीए आशीष गोयल ने कहा कि किसानों को यह भ्रम होता है कि किसानों की किसी भी आय पर इनकम टैक्स नहीं लगता है, जो कि सही नही है। यदि किसी किसान ने कोई मकान बेचा है या ज्वेलरी बेची है या कृषि भूमि बेची है जो कि शहरी क्षेत्र में है, तो उस पर भी कैपिटल गेन का दायित्व आता है। कांफ्रेंस में रीजनल काउंसिल मेंबर सीए कीर्ति जोशी, सीए अतिशय खासगीवाला, सीए मौसम राठी, सीए अमितेश जैन, सीए स्वर्णिम गुप्ता, सीए मनोज फड़नीस, सीए अभय शर्मा सहित कई वरिष्ठ सदस्य सम्मिलित हुए।

Posted By: Hemraj Yadav

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