Indore Abhishek Chendke Column: अभिषेक चेंडके, इंदौर, नईदुनिया। तुलसी सिलावट जब इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री थे तो खूब बैठकें लीं, दौरे किए। उनकी सक्रियता से अफसर भी परेशान हो चले थे। कभी भी फोन आ जाता था कि मंत्रीजी यहां के दौरे पर रहेंगे, आपको भी साथ चलता है। जिले का प्रभार बदलने के बाद सिलावट की सक्रियता इंदौर में कम हो गई, उन्हें हरदा जिले का प्रभार दिया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वे अभी तक वहां भी नहीं गए। इंदौर और हरदा के बजाए आजकल वे भोपाल को ज्यादा समय दे रहे हैं और जल संसाधन विभाग की परियोजनाओं के दौरे पर ज्यादा जा रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के मालवा निमाड़ के बचे जिलों में होने वाले संभावित दौरों की तैयारियों की जिम्मेदारी भी उन पर है। हरदा वाले उनका इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनको संदेश भेज दिया गया है कि एक-दो दिन बाद हरदा आना होगा।

हाथ तो टूटे लेकिन मकान टूटना मुश्किल

कोरोनाकाल के पहले माफिया को लेकर पुलिस और प्रशासन सख्त था। शराब ठेकेदार पर गोली चलाने वाले गुंडों को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भले ही कड़ी कार्रवाई की बात कहीं, लेकिन गुंडों के साथ पुलिस की वैसी सख्ती नहीं दिखी, क्योंकि एक भाजपा नेता ने पूरी योजना के साथ दोनों को सरेंडर करवाया। दिखावे के लिए पुलिस ने सतीश भाऊ की थोड़ी पिटाई कर हाथ में पट्टी जरूर बंधवा दी, लेकिन पुलिस के हत्थे चढ़े माफिया के मकानों पर बुलडोजर चलना मुश्किल है। नगर निगम भले ही माफिया की संपत्ति की जांच करवा रहा हो, लेकिन हकीकत तो यह है कि कोर्ट ने निर्माण तोड़ने पर रोक लगा रखी है। वर्षाकाल में सिर्फ खतरनाक मकान ही तोड़े जा सकते हैं।

जाते- जाते मिला वीडी का आश्वासन

राजेश सोनकर सालभर से बगैर टीम के कप्तान हैं। उन्होंने कई ग्रामीण नेताओं को जिला कार्यकारिणी में शामिल करने का सपना सांवेर उपचुनाव में दिखाया था, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया। सोनकर जिस गांव में जाते हैं तो समर्थक पूछ ही लेते हैं, भैया कब दिलवा रहे हो हमें पद। दो दिन पहले जब भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा इंदौर में थे तो सोनकर ने भी उनसे पूछ ही लिया कि भैया कब जारी करवा रहे हो सूची। रायशुमारी के बाद नाम तो पहले ही भेजे जा चुके हैं। शर्मा ने भी आश्वासान दिया कि अब बहुत जल्दी ही सूची जारी हो जाएगी, चिंता मत करो। सूची तो नगर कार्यकारिणी की भी रुकी हुई है, लेकिन महामंत्री पद के लिए एक अनार सौ बीमार जैसी स्थिति है। अब देखना यह है कि पहले ग्रामीण की सूची जारी होती है या नगर की।

गलत जगह दे आए ज्ञापन

रघु परमार पुराने नेता हैं। कांग्रेस की सरकार थोड़े समय के लिए आई तो आइडीए अध्यक्ष बनने की इच्छा थी, लेकिन सरकार गिर गई। पार्टी में ज्यादा करने को नहीं बचा तो समाज की राजनीति में दिलचस्पी ले रहे हैं। हाल ही में क्षत्रिय महासभा के प्रदेशाध्यक्ष बने और फिर से शहर में सक्रियता बढ़ाने के बारे में सोचा, लेकिन गलत जगह ज्ञापन दे आए। हुआ यूं कि एक ज्ञापन टाइप कराकर परमार पहुंच गए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मिले। ज्ञापन में मांग थी कि एमवायएच में जल्द से जल्द सीटी स्कैन की सुविधा मिले। पांच कार्यकर्ताओं के साथ परमार ज्ञापन देने पहुंचे तो सीएमएचओ ज्ञापन देख मुस्कराए और बोले कि एमवाय अस्पताल तो मेडिकल कालेज के अधीन है। अब यहां आ गए तो ज्ञापन रख लेता हूं।

Posted By: Prashant Pandey

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