इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शनिवार 26 मार्च को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह की मौजूदगी में होने वाले व्याख्यान को प्रशासन के दबाव में रद्द करवाने पर राजनीति और विरोध गहराने लगा है। इस व्याख्यान में वक्ता के रूप में यूं तो सात नाम शामिल थे लेकिन माना जा रहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर शमशुल इस्लाम के नाम पर प्रशासन ने आपत्ति ली। आयोजकों ने आरोप लगाया था कि पुलिस अधिकारियों ने उनका व्याख्यान हटाने के लिए कहा था। शनिवार को प्रोफेसर इस्लाम ने पत्रकार वार्ता में इंदौर और मध्य प्रदेश के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और कहा कि एक विचारधारा से प्रभावित होने के कारण उन्हें बोलने से रोका गया। अधिकारियों को वह पार्टी ही ज्वाइन कर लेना चाहिए।

व्याख्यान के आयोजत और कांग्रेस नेता डा अमीनुल खान सूरी ने कहा कि दबाव बना कर कार्यक्रम निरस्त करवाने के प्रशासन के आदेश के खिलाफ वे कोर्ट में लड़ाई लडेंगे। प्रो. इस्लाम ने कहा कि मैं हमेशा से धार्मिक कट्टरता का विरोध करता रहा हूं। भले ही वह किसी भी पक्ष की हो। प्रो.इस्लाम ने कहा कि मेरे खिलाफ तो आज तक कोई एक मुकदमा भी दर्ज नहीं है। उसके बावजूद अधिकारियों ने आयोजन नहीं करने दिया क्योंकि सच और स्वतंत्र विचारों को एक खास विचारधारा के लाभ के लिए वे रोकना चाहते हैं। दरअसल प्रो.इस्लाम दिल्ली विवि में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर रहे लेकिन वे बीते समय में कई किताबें भी लिख चुके हैं।

भारत विभाजन और 187 की क्रांति के साथ ही इस्लाम ने आरएसएस और सावरकर को निशाने पर लेते हुए भी कई किताबें हाल ही में लिखी है। आयोजक मान रहे हैं कि इसी वजह से प्रदेश सरकार के दबाव में प्रशासन ने प्रो.इस्लाम का व्याख्यान इंदौर में होने नहीं दिया।कांग्रेस नेता सूरी ने आजाद यूथ फाउंडेशन के बैनर तले स्वतंत्र भारत की आवाज नाम से व्याख्यान श्रृंखला आयोजित की थी। तुकोगंज स्थित जाल सभागृह में शनिवार सुबह 10 बजे से व्याख्यान शुरू होना था।

व्याख्यान में दिग्विजयसिंह के साथ ही प्रो.शमशुल इस्लाम, इतिहासकार अशोकर कुमार पांडेय, शिक्षाविद डा.जसविंदरसिंह भाटिया, मोहम्मद मंजर कासमी, नासिर खान और कुलसुम लोखंडवाला के नाम वक्ता के तौर पर शामिल थे। आयोजक डा.सूरी दावा कर रहे हैं कि सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने की दिशा में आयोजन किया जा रहा था लेकिन प्रदेश सरकार और प्रशासन ही चाहता नहीं है कि सच और सही बाते समाज में हो। समाज को बांटने वालों के इशारे पर ऐसी कोशिशों को रोका जा रहा है।उल्लेखनीय है कि इससे पहले सूरी को प्रशासन ने जिलाबदर का नोटिस भी दे दिया था।

Posted By: Prashant Pandey

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