इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। माता-पिता की तलाश में पाकिस्तान से भारत आई मूक बधिर गीता को उसके परिवार से मिलाने में शहर का योगदान अहम रहा। गीता 2015 में इंदौर आई थी और यहां सामाजिक संस्थाओं व प्रशासन की मदद से उसे जनवरी 2021 में अपनी मां मिल भी गई। इन दिनों गीता महाराष्ट्र के परभणी में मां मीना पांडरे के साथ रह रही है।

शहर में जब गीता आई तो उसके बाद उसे केवल अभिभावकों से मिलने के लिए संस्थाओं और प्रशासन ने मदद ही नहीं की बलि्क उसके विवाह के लिए भी प्रयास किया। परिवार की तलाश में इंदौर आई गीता स्कीम नंबर 71 सि्थत मूक बधिर केंद्र में रही। एक तरफ गीता के परिवार की तलाश भी जारी थी वहीं दूसरी ओर उसके विवाह के प्रयास भी हो रहे थे।

तात्कालिक विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के कहने पर गीता के विवाह के लिए जून 2017 में फेसबुक पर बकायदा विज्ञापन दिया गया था जिसके आधार पर करीब 60 युवकों ने बायोडेटा भेजा था। गीता से विवाह करने के लिए मध्यप्रदेश के ही नहीं बलि्क महाराष्ट्र, उत्तरांचल, ओडिशा, गुजरात, कर्नाटक आदि स्थानों के युवाओं ने बायोडेटा भेजे थे। प्राप्त बायोडेटा में दिव्यांग और सामान्य दोनों ही युवक शामिल थे।

इनमे से गीता ने 16 बायोडेटा का चयन किया जिसमें से सात युवक सामान्य, सात युवक मूक-बधिर और 2 पैरों से दिव्यांग थे। विवाह के लिए गीता ने दो शर्त भी रखी थी। पहली शर्त के अनुसार सामान्य युवक को सांकेतिक भाषा सीखना होगी औ दूसरी शर्त यह थी कि वह माता-पिता के मिलने के बाद ही विवाह करेगी। जून 2020 में गीता आनंद सर्विस सोसायटी रहने आई। यहा ज्ञानेंद्र पुरोहित और मोनिका पुरोहित ने गीता के माता-पिता तलाशने का प्रयास किया। यह तलाश 2021 जनवरी में खत्म हुई। डीएनए टेस्ट के जरिए यह बात पुख्ता हुई कि मीना ही गीता की मां है।

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