इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जावरा कंपाउंड में रहने वाले 48 वर्षीय कर सलाहकार ने गुरुवार सुबह इमारत की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। सात दिन पहले उनके घर जीएसटी टीम ने छापामार कार्रवाई की थी। अधिकारियों ने उनके ऑफिस को सील कर दिया और रोजाना देर रात तक पूछताछ के लिए बुलाने लगे। पत्नी से पूछताछ का दबाव बनाया तो उन्होंने आत्महत्या कर ली। परिजनों ने दो सीए और अधिकारियों पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है।

संयोगितागंज थाने के एसआई अक्षय कुशवाह के अनुसार घटना सुबह करीब 9 बजे कृष्णा अपार्टमेंट (जावरा कंपाउंड) की है। सूचना मिली थी कि दूसरी मंजिल पर रहने वाले 48 वर्षीय गोविंद पिता दुर्गाप्रसाद अग्रवाल को गंभीर अवस्था में गीताभवन चौराहा स्थित निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। पुलिस अस्पताल पहुंची, तब तक डॉक्टर उन्हें मृत घोषित कर चुके थे।

बेटे उमेश (सीए छात्र) ने बताया कि पिछले शुक्रवार को सुबह करीब 12 बजे चार जीएसटी अधिकारी आए थे। उन्होंने सर्च वारंट बताया और घर की तलाशी शुरू कर दी। उस वक्त गोविंद घर पर नहीं थे। करीब दो घंटे बाद जब घर पर आए तो अधिकारियों ने शाम पांच बजे तक पूछताछ की और दस्तावेज जब्त कर ले गए। जिस वक्त गोविंद के फ्लैट में सर्चिंग हुई, सात दिन पहले हुई छानबीन के बाद ऑफिस को किया था सील जीएसटी छापे से तनाव में चल रहे कर सलाहकार ने दी जान उस वक्त उनके ऑफिस (प्रगति चैम्बर मुराई मोहल्ला) और किबे कपाउंड स्थित ट्रैक्टर शोरूम पर भी छापा मारा गया था। अधिकारियों ने ऑफिस सील कर दिया और शोरूम पार्टनर ईश्वर गिल व गोविंद से घंटों पूछताछ की।

रोजाना शोरूम और दफ्तर बुलाकर देर रात छोड़ते थे अधिकारी

भाई संतोष अग्रवाल (महू) ने आरोप लगाया कि छापे के बाद अधिकारी पूछताछ के लिए कभी दफ्तर तो कभी ट्रैक्टर शोरूम पर बुलाते थे। गोविंद से देर रात तक दस्तावेजों का परीक्षण और पूछताछ की जाती थी। गोविंद बुधवार को भी डेढ़ बजे घर आए थे। कार्रवाई के कारण वे बहुत तनाव में थे। उनका आरोप है कि कार्रवाई सीए रवि गोयल और देवेंद्र शर्मा के इशारे पर हुई है।

किसी ने नहीं देखा कूदते

बेटे उमेश के अनुसार पिता को कूदते किसी ने नहीं देखा। घटना के समय मां आरती पौधे में जल अर्पित करने गई थी। जोर से धड़ाम की आवाज सुनकर दौड़ीं तो पिता गलियारे में गमले पर गिरे हुए थे। एसआई कुशवाह के अनुसार बालकनी की ऊंचाई करीब 5 फीट है। यहां से गिरना संभव नहीं है। इससे यह तो स्पष्ट है कि उन्होंने आत्महत्या ही की है। जिस ट्रैक्टर शोरूम पर छापा मारा, उस फर्म में पत्नी आरती का भी नाम है।

विभाग ने न डिमांड की, न किसी तरह के आरोप लगाए : जीएसटी आयुक्त

राज्य जीएसटी आयुक्त डीपी आहूजा का कहना है कि 5 जुलाई को विभाग ने 30 फर्मों-कंपनियों पर जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में करीब 250 करोड़ के बोगस बिलों के जरिए करीब 50 करोड़ रुपए के कर अपवंचन के तथ्य विभाग को मिले हैं। जांच के दायरे में आई कंपनियों में से एक गोविंद अग्रवाल की पत्नी के नाम से रजिस्टर्ड है। उनके साथ जो हादसा हुआ है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। अब तक न तो अग्रवाल, न ही उनकी पत्नी को विभाग ने बयान के लिए बुलाया, न ही टैक्स आदि की कोई मांग निकाली थी। सीधे तौर पर उनकी संलिप्तता की बात भी सामने नहीं आई है। बुधवार शाम वे अपने वकील के साथ मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने कार्रवाई की समयसीमा को लेकर जानकारी चाही थी।

आयुक्त ने बताया कि नियमों के मुताबिक सर्च-सीजर की कार्रवाई की समय सीमा को लेकर कोई मियाद निर्धारित नहीं है। गुरुवार को हादसे के बाद उनके परिजन ने संपर्क कर निवेदन किया था कि ऑफिस की सील खोल दी जाए क्योंकि उठावना उसी जगह करना है। उनके निवेदन पर हमने दफ्तर से रिकॉर्ड व कम्प्यूटर जब्त कर सील खोल दी। आयुक्त के अनुसार पुराने किसी मामले में उनके नाम से कोई शिकायत पुलिस में की थी। उसे लेकर पुलिस का फोन उनके पास पहुंचा था। हमारे विभाग का उस शिकायत से ताल्लुक नहीं है।