कालेज में जाकर समिति विद्यार्थियों के दर्ज करेंगी बयान

Indore Crime News: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धार्मिक कट्टरता फैलाने और भड़काऊ शिक्षा देने के आरोप में घिरे शासकीय विधि महाविद्यालय के छह शिक्षकों के खिलाफ जांच शुरू हो चुकी है। जांच समिति ने पूछताछ के लिए कालेज के बाकी प्राध्यापक और स्टाफ को बुलाकर भी बयान लिए हैं। धारा 370 और भारतीय सेना का विरोध करने वाले शिक्षकों से करीब दस से पंद्रह प्रश्नों के माध्यम से लिखित जवाब दिया। यहां तक कि समिति शिक्षकों की पृष्ठभूमि भी पता करने में लगी है, क्योंकि दो मूलत: कश्मीर से हैं, जबकि अन्य शिक्षकों व स्टाफ से कालेज के माहौल और पढ़ाने की पद्धति से जुड़े सवाल किए गए हैं। सभी शिक्षकों से विवादित किताब से पढ़ाने का कारण पूछा तो सभी ने मना कर दिया। उधर समिति सदस्यों ने लाइब्रेरी से विवादित किताब को नहीं हटाने के बारे में भी पूछा। मगर कोई जवाब नहीं दे पाया।

कालेज प्राचार्य डा. इनामुर्रहमान के इस्तीफे के बाद मामला और गरमा गया है। प्रदेश सरकारी भी पूरे मामले में गंभीर नजर आ रही है। उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है। इसे देखते हुए समिति ने आनन-फानन में रविवार को कालेज के शिक्षकों को बुलाया, जिसमें प्रो. अमीक खोखर, डा. मिर्जा मोजिज बेग, डा. फिरोज अहमद मीर, डा. सुहैल अहमद वाणी के साथ प्रो. मिलिंद कुमार गौतम व डा.पूर्णिमा बीसे सहित अन्य शिक्षकों व स्टाफ को बुलाया।

सूत्रों के मुताबिक दो शिक्षक अपने साथ कुछ विद्यार्थियों को भी लेकर अतिरिक्त संचालक कार्यालय पहुंचे थे। मगर समिति सदस्यों ने आपत्ति ली और विद्यार्थियों से बाद में पूछताछ करने की बात कही। अतिरिक्त संचालक डा. किरण सलूजा, डा. सुरेश सिलावट, डा. अनूप व्यास और डा. आरसी दीक्षित ने एक-एक कर शिक्षकों को बुलाकर चर्चा की। पहले उन छह शिक्षकों से पूछताछ में एबीवीपी द्वारा लगाए आरोपों के बारे में पूछा गया।

छात्र संगठन ने इन शिक्षकों पर धारा 370, भारतीय सेना, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों सहित छात्राओं को अकेले में बुलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन्होंने मौखिक रूप से इन आरोपों को गलत ठहराया है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यालय की तरफ से कुछ विशेषज्ञों ने प्रश्न तैयार किए थे। उनके जवाब इन शिक्षकों से लिखित में दर्ज करवाए हैं। पूछताछ करीब छह घंटे चली। इस बीच 13 शिक्षक, प्राध्यापक और स्टाफ शामिल थे।

मंगलवार को होंगे बयान

शिक्षकों और स्टाफ से बयान होने के बाद समिति विद्यार्थियों से पूछताछ करेगी, जिसमें एलएलबी, एलएलएम, बीएएलएलबी के फर्स्ट से लेकर फाइनल ईयर के छात्र-छात्राएं हैं। समिति मंगलवार-बुधवार को बयान ले सकती है। इनके बयान गोपनीय रखे जाएंगे।

निलंबन की हो सकती है कार्रवाई

छह शिक्षकों को फिलहाल पांच दिन के लिए कालेज से कार्यमुक्त किया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग की तरफ से कार्रवाई तय है। छह में से एक ही शिक्षक नियमित है। बाकी पांच जनभागीदारी समिति से कालेज में पढ़ाने आए हैं। इसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद इनका निलंबन तय माना जा रहा है।

तीन सदस्य समिति ने दी मंजूरी

किताब को खरीदने की जिम्मेदारी पुस्तक क्रय समिति की रहती है। उस दौरान विवादित किताब को खरीदने की मंजूरी तीन सदस्य समिति ने दी थी, जिसमें डा. पगारिया, डा. प्रवीण चौधरी और जेके जैन थे। 2019-2021 के बीच किताब को लेकर विवाद हुआ। मगर कालेज प्रबंधन ने लाइब्रेरी से नहीं हटाई। मामले में लाइब्रेरियन पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि किताब से जुड़ा विवाद की जानकारी कालेज के प्रत्येक प्राध्यापक को थी।

ये थे प्रश्न

- धारा 370 का विरोध क्यों?

- भारतीय सेना पर टिप्पणी की वजह?

- छात्राओं को अकेले बुलाने की क्या जरूरत?

- नहीं आने पर छात्रों को फेल करने की धमकी क्यों?

- विवादित किताब से पढ़ाने की क्या जरूरत?

- राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रम व आयोजन को बढ़ावा देने की क्या जरूरत?

- राष्ट्र विरोध विषय पर मूक कोर्ट की क्यों करवाते है तैयारी?

(कुछ विशेष प्रश्न छह शिक्षकों से पूछे)

- क्या कालेज में धर्म विशेष की बातें बताई जाती है?

- क्या छात्राओं ने कभी इन शिक्षकों के बारे में शिकायत की?

- क्या शिक्षक कालेज परिसर के बाहर भी विद्यार्थियों से मिलते है?

(ये कुछ सवाल बाकी प्राध्यापक व स्टाफ से किए गए)

दोषियों पर कार्रवाई तय

जांच में अभी शिक्षकों व स्टाफ से लिखित में बयान दर्ज किए है। उनके कुछ सवाल भी पूछे गए है। पहले दिन 13 लोगों के बयान हुए है। विद्यार्थियों से चर्चा के लिए अगले कुछ दिनों में समिति कालेज में जाकर पूछताछ करेंगी। वैसे दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डा. किरण सलूजा, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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