Indore Crime News : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर में सट्टे में फंसाने की धमकी देकर वसूली करने वाले पुलिसकर्मी खुद ही फंस गए हैं। पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि हो गई। एसीपी की जांच रिपोर्ट मिलते ही डीसीपी ने दोषी पुलिसवालों को चार्जशीट थमा दी है। उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

मामला लसूड़िया थाने का है। ग्वालियर निवासी आयुष राजावत, आदर्श राजावत और दोस्त मनीष झा ने जोन-2 के डीसीपी संपत उपाध्याय को शिकायत की थी। युवक महालक्ष्मी नगर में बंटी नामक युवक के घर में किराए से रहते थे। किसी बात पर विवाद हुआ तो बंटी ने लसूड़िया थाने के पुलिसकर्मी ब्रजेश सेंगर, राजवीर सिंह, पवन शर्मा, श्यामपाल जाट, धर्मेंद्र को बुलाया और आयुष को थाने भिजवा दिया। पुलिस वालों ने आयुष को आइपीएल के सट्टे में फंसाने की धमकी दी और उससे रुपयों की मांग की। थाने के समीप बने एटीएम से रुपये निकाल कर पुलिसवालों को दिए गए। इसके बाद फोन कर और रुपयों की मांग की। आयुष ने पुलिसवालों की आवाज रिकार्ड कर ली और शिकायत पत्र के साथ डीसीपी को सौंप दी। डीसीपी ने विजय नगर एसीपी राकेश गुप्ता को जांच सौंपी। दोषी पुलिसवालों के कथन लिए और रिपोर्ट बनाकर डीसीपी को भेज दी। डीसीपी ने एएसआइ अनिल सिलावट, ब्रजेश सेंगर, श्यामपाल जाट, राजवीर सिंह, पवन शर्मा, धर्मेंद्र व एक अन्य को चार्जशीट सौंप दी है। उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई है।

एडवाइजरी-सट्टा संचालकों से वसूली करते हैं पुलिसवाले - विजय नगर, लसूड़िया, एमआइजी और खजराना थाने के कई पुलिसवाले अवैध वसूली में लिप्त हैं। अफसरों को शिकायत मिली है कि कुछ दिनों पूर्व खजराना थाने के सिपाही और एसआइ ने एक एडवाइजरी कंपनी संचालक को पकड़ा और चार लाख रुपये ले लिए। एमआइजी थाने के एसआइ और दो सिपाहियों ने भी ओमेगा टावर से एडवाइजरी कंपनी वालों को पकड़ कर पांच लाख रुपये लिए थे। इसी तरह विजय नगर थाने के तीन पुलिसकर्मियों ने आर्बिट माल से एडवाइजरी कंपनी के संचालक को पकड़ कर चार लाख रुपये लिए हैं।

Posted By: Hemraj Yadav

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