Indore Dr. Jitendra Vyas Column: डा. जितेंद्र व्यास, इंदौर (नईदुनिया)। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा भाजपा के अभेद्य गढ़ कहे जाने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। लगभग 50 विधानसभाओं और पांच लोकसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली इस यात्रा से कांग्रेस के बिगड़े समीकरण भी सुधरते नजर आने लगे हैं। अब इंदौर में कांग्रेस की राजनीति को ही लीजिए। 15 महीनों की कांग्रेस सरकार गिरने के बाद शहर की राजनीति में विधायक संजय शुक्ला, विशाल पटेल, सज्जन वर्मा और शहर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल खेमा मजबूती से काबिज है। राऊ विधायक जीतू पटवारी प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और उत्तरप्रदेश के प्रभारी हैं। राहुल गांधी की यात्रा के पहले इन दो खेमों की नजदीकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। निगम चुनाव में भी दोनों खेमों ने एक-दूसरे की मदद की और अब यात्रा के लिए भी एक साथ तैयारी में जुटे हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेसी फिर एक नए समीकरण से रूबरू होंगे।

'योग" की राजनीति या राजनीति का 'योग"

अच्छी सेहत के लिए योग की महत्ता सभी जानते हैं लेकिन जब राजनेता योग करने लगते हैं तो ये किसी के लिए सुयोग बनता है तो किसी के लिए 'कष्ट" योग। कुछ ऐसे ही अलगअलग योग इन दिनों शहर के वार्डों में नजर आ रहे हैं। दरअसल महापौर पुष्यमित्र भार्गव अल सुबह शहर के किसी भी वार्ड के बगीचे में पहुंचकर योग करते हैं। इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद, निगम अधिकारी भी मौजूद रहते हैं। इसके बाद लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं महापौर जानते हैं और वहां मौजूद अफसरों को उनके त्वरित निराकरण के निर्देश देते हैं। महापौर का यही 'योग" कई लोगों के लिए 'कष्ट योग" हो गया है। उन्हें इतनी सर्दी में सुबह-सुबह योग तो करना पड़ ही रहा है, साथ ही शिकायतों को लेकर सुबह-सुबह 'क्लास" भी लग रही है। योग की राजनीति से और किसी को फायदा हो न हो क्षेत्र की जनता जरूर लाभ उठा रही है।

खामोशियां गुनगुना रही हैं. . . कुछ तो बात है

भाजपा की शहरी राजनीति में प्रबंधन की पाठशाला कहा जाने वाला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो और छोटी अयोध्या या रणक्षेत्र कहलाने वाला क्षेत्र क्रमांक चार चर्चा के केंद्र में हैं। 'मिनिस्टर इन वेटिंग" विधायक रमेश मेंदोला की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया से बीते दिनों एक के बाद एक हुई मुलाकातों के मायने राजनीतिक गलियारों में तलाशे जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं के इस बारे में पूछने पर मेंदोला मुस्कुराकर जवाब दे देते हैं-मैं तो छोटा कार्यकर्ता हूं वरिष्ठ ही बता सकते हैं। उधर, क्षेत्र क्रमांक चार में संगठन पदाधिकारियों के बीच चल रही खींचतान वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच गई है। पार्षद और महिला नेत्री के बीच हुए विवाद का मामला कोर्ट पहुंचने के साथ ही मंडल पदाधिकारियों के बीच हुए विवाद को संगठन पदाधिकारी किसी तरह सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

आदिवासी महाकुंभ और टारगेट चिंतन

मालवा-निमाड़ के आदिवासी वोटों की चिंता इस बार भाजपा-कांग्रेस दोनों ही ज्यादा कर रहे हैं। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के रूट में मालवा-निमाड़ की आदिवासी बहुल सीटें कवर हो रही हैं तो भाजपा 4 दिसंबर को इंदौर में आदिवासी महाकुंभ आयोजित कर रही है। आयोजन में क्षेत्र के आदिवासी बहुल जिलों से एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य भाजपा ने रखा है। इसकी जिम्मेदारी शहर के साथ-साथ संबंधित जिलों के सांसद-विधायकों को दी गई है। पिछले दिनों हुई बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जिस अंदाज में संख्या को लेकर जिम्मेदारी तय की उससे कई विधायक-सांसद तनाव में आ गए। उन्हें कहा गया कि इस बार संख्या को लेकर दिए गए लक्ष्य की मानीटरिंग को लेकर भी एक आडिट टीम मौजूद रहेगी। बैठक से बाहर निकलकर जनप्रतिनिधि एक- दूसरे से यही पूछते नजर आए तुम्हें कितने का टारगेट मिला। पूरा कैसे करोगे।

Posted By: Hemraj Yadav

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