इंदौर। इंदौर जिला अस्‍पताल में ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी जाने के मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने अंधत्व निवारण समिति के जिला प्रभारी टीएस होरा को रविवार को निलंबित कर दिया। उन्होंने मामले की जानकारी छिपाने पर उन्हें फटकार भी लगाई।

मंत्री ने अंधत्व निवारण अभियान के प्रदेश नोडल अधिकारी डॉ. हेमंत सिन्हा, धार सीएमएचओ और इंदौर सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीनों अधिकारियों पर जानकारी छिपाने के संबंध में जवाब मांगा गया है।

इसके अलावा पूरे प्रदेश में बिना अनुमति स्वास्थ्य शिविर लगाने पर मंत्री ने रोक लगा दी। उधर, रविवार को शंकरा नेत्रालय चेन्नई के डॉ. राजीव रमन ने चोइथराम नेत्रालय में पीड़ित 11 मरीजों का परीक्षण किया। इनमें से तीन मरीजों को सोमवार को विमान से चेन्न्ई भेजा जाएगा। बाकी आठ में से चार मरीजों का ऑपरेशन रविवार को किया गया। अन्य चार मरीजों की विभिन्न जांचों के बाद उनके इलाज का निर्णय लिया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री सिलावट रविवार को चोइथराम नेत्रालय पहुंचे। उन्होंने मरीजों से बात की और इलाज का भरोसा दिलाया। धार से कितने लोग आए और एक अगस्त से अब तक उस अस्पताल में कितने ऑपरेशन हुए, मंत्री ने इसकी जानकारी भी मांगी। साथ ही 50 हजार की सहायता मिलने का ब्योरा भी लिया। डॉ. रमन से मरीजों को मिलवाया और इलाज कराने का आश्वासन दिया। साथ ही अन्य जगह भेजना पड़ा तो डॉक्टरों को इसके लिए समय पर बताने को कहा। सूचना नहीं देने पर मंत्री ने धार सीएमएचओ डॉ. श्रीकृष्ण सरल और इंदौर सीएमएचओ पर नाराजगी भी जताई।

चोइथराम नेत्रालय में रविवार को दो और महिला मरीज पहुंचीं, जिन्होंने पांच अगस्त को इंदौर आई अस्पताल में इलाज कराया था। इलाज और ऑपरेशन के बाद दोनों की एक-एक आंख में मवाद हो गया था। एक मरीज स्कीम नंबर 51 निवासी मुन्नीबाई रघुवंशी की दाईं आंख डॉक्टर ने निकाल दी थी। साथ आए नाती शुभम ने बताया कि वे पांच अगस्त को अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद मोतियाबिंद होना बताया गया। फिर 10 अगस्त को ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के बाद आंख में दर्द हुआ तो सुबह फिर अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने सही जानकारी नहीं दी, सिर्फ दवाई दे दी। फिर भी लाभ नहीं हुआ। डॉक्टर ने कहा मवाद के कारण आंख खराब हो चुकी है। नहीं निकाली तो इंफेक्शन से जान का खतरा हो सकता है। नानी दर्द से परेशान थीं, इस पर परिजन ने आंख निकालने की अनुमति दे दी। 14 अगस्त को हुए इस ऑपरेशन के पैसे भी नहीं लिए।

पांच अगस्त को महिला राधा यादव निवासी पवनपुरी का ऑपरेशन भी किया गया था। ऑपरेशन के बाद आंख में दर्द होने पर वे जांच के लिए पहुंचीं तो डॉक्टर ने बताया मवाद हो गया है, फिर से ऑपरेशन करना होगा। परिजन ने दूसरे डॉक्टर से भी चेकअप कराया तो उन्होंने इंफेक्शन होने के बाद सूजन आने की बात कही, लेकिन ऑपरेशन करने से मना कर दिया।

इसके बाद परिजन इंदौर आई अस्पताल पहुंचे और वहीं ऑपरेशन कराया। ऑपरेशन के बाद भी राधा की आंख की रोशनी नहीं आई। दोनों महिला मरीजों की चोइथराम अस्पताल में रविवार को जांच की गई।

लोगों की आंख खराब होना बड़ी चूक: शिवराज

भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि इंदौर सीएमएचओ ने पांच दिन तक आला अधिकारियों से इस मामले को छुपाकर रखा। अस्पताल प्रबंधन के साथ ही शासन-प्रशासन की तरफ से भी यह बहुत बड़ी चूक है।

उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि सभी पीड़ितों को उचित सहायता राशि व प्रतिमाह 12 हजार स्र्पए पेंशन दी जाए, जिससे उनका जीवन सुखमय व्यतीत हो सके।

चौहान ने कहा कि इंदौर में जिन 11 नागरिकों का जीवन डॉक्टरों की लापरवाही के कारण अंधकारमय हो गया, उन्हें मात्र 50 हजार स्र्पए की सहायता राशि देकर क्या कमलनाथ सरकार कोई उपकार कर रही है? उस व्यक्ति की मानसिक अवस्था के बारे में तो सोचें, जिसके साथ इतनी बड़ी त्रासदी गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते हुई।