Indore Ke Shilpi: इंदौर। इस शहर का यूं ही संगीत की दुनिया में अपना मुकाम नहीं है। इस शहर ने दुनिया को न केवल उम्दा गायक-वादक कलाकार दिए हैं बल्की सुधी श्रोता भी दिए हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती संगीत के संग्रह से शहर को अलग पहचान दिलाने वाले भी इस शहर में हैं। शहर की संगीत परंपरा को और भी समृद्ध बनाते हुए आज की पीढ़ी को संगीत में शोध करने की सुविधा देने का काम कर रहे हैं सुमन चौरसिया। स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर को समर्पित करते हुए इन्होंने शहर में लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन रिकार्ड संग्रहालय बनाया जहां करीब 50 हजार रिकार्ड और दो लाख से अधिक गीत शामिल हैं। इस संग्रहालय के माध्यम से उन्होंने न केवल संगीत की विरासत को सहेजने का कार्य किया बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश भी कर रहे हैं।

शास्त्रीय, उपाशस्त्रीय और सुगम संगीत के नायाब रिकार्ड वाला यह संग्रह चंद वर्षों का नहीं बल्कि 1970 से शुरू हुए प्रयास का परिणाम है। इस संग्रह में हिंदी फिल्मों के गीत ही नहीं बल्कि सिंधी, गुजराती, राजस्थानी, मलयालम, तेलगू, छत्तीसगढ़ी, असमी, मराठी, भोजपुरी, अंग्रेजी भाषा-बोली के गीत भी शामिल हैं। यही नहीं संस्कृत के श्लोक के रिकार्ड भी इस संग्रह को संपन्न बना रहे हैं। यहां 10 से अधिक रिकार्डर और ग्रामोफोन हैं जो बिते दौर की याद दिलाते हैं। शहर में रहने वाले गैर हिंदी भाषी लोग जिन्हें संगीत का शौक है और पुराने गीत जो उन्हें कहीं नहीं सुनने को मिलते उन्हें वे गीत सुनाने का मौका इस संग्रहालय के माध्यम से मिल जाता है।

इस संग्रहालय के माध्यम से इन्होंने यह सिद्ध किया कि लता मंगेशकर ने 60 हजार गीत गाए हैं क्योंकि यह तमाम गीत इस संग्रहालय में रिकार्ड के रूप में सहेजे हुए हैं। इसमें से कई गीत तो ऐसे हैं जो खुद लता मंगेशकर के संग्रह में शामिल नहीं थे और उन्हें उनमें से चंद गीतों के रिकार्ड भेंट कर फिल्मी जगत में भी शहर का नाम बढ़ाया। इसके अलावा उत्साद अमीर खां के गीत, बुंदू खां का सारंगी वादन, मुनीर खां का सारंगी वादन, सुशीला टेबे, विष्णुदत्त पगनीस, अंजली देवी, अंगूरबाला सहित कई नामी और गुमनाम गायक-गायिकाओं व वादकों के गीत-संगीत को यहां सुना जा सकता है।

इसके अलावा हैदराबाद के निजाम का बैंड, होलकर राज्य का बैंड, जावरा राज्य का बैंड, जुबेदा, हीराबाई, गोहर जान, जानकीबाई, आजमबाई, इंदूबाला आदि के गीतों के रिकार्ड भी हैं। इसका सबसे ज्यादा लाभ शास्त्रीय, उपशास्त्रीय संगीत के साधकों को हो रहा है क्योंकि कई गीत वर्तमान में इंटरनेट मीडिया पर भी सहजता से नहीं मिलते। ऐसे में मूर्धन्य कलाकारों की प्रस्तुति को सुनकर अपनी गायकी को निखारने का प्रयास संगीत के साधक करते हैं।

बचपन में देखी गई फिल्मों के जरिए गीतों के संग्रह का शौक चौरसिया को लगा। संग्रह का शौक बढ़ता गया और इसका परिणाम यह हुआ कि शहर के हिस्से में केवल भारतीय कलाकारों के गीत ही नहीं आए बल्कि पाकिस्तान, हालैंड और इंग्लैंड के रिकार्ड भी आए। 1932 से 1990 तक के गीतों का संग्रह शहर में शामिल हैं। गीतों के केवल रिकार्ड ही नहीं बल्कि उससे जुड़ा साहित्य भी पाठकों को संगीत से जुड़ी जानकारी देने में मददगार साबित होता है।

- सुमन चौरसिया, संगीत रिकार्ड के संग्रहक व लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन रिकार्ड संग्रहालय के संस्थापक

Posted By: Sameer Deshpande

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