Indore Jitendra Yadav Column : जितेंद्र यादव, इंदौर (नईदुनिया)। नगर निगम और पंचायत चुनाव आए तो जिले के उन अधिकारियों में भी हलचल शुरू हो गई, जिनको एक ही जगह तीन साल पूरे हो गए। निर्वाचन आयोग के तीन साल के नियम का पालन करने के लिए ही कलेक्टर मनीष सिंह ने कुछ तहसीलदारों के तबादले किए हैं। बदलाव की जद में तहसीलदार पल्लवी पुराणिक, एचएस विश्वकर्मा, ब्रह्मस्वरूप श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार जयेशप्रताप सिंह और राकेशसिंह चौहान आए हैं। तीन साल से अधिक समय तो कुछ अन्य अधिकारियों को भी हो चुके हैं, लेकिन उनके लिए बचने की और भी गलियां हैं। वे यह सफाई दे सकते हैं कि हम सीधे चुनाव के काम से नहीं जुड़े हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो इंदौर में हैं तो लंबे समय से, लेकिन कभी तहसील बदलवा ली तो कभी अनुविभाग बदलवा लिया। सब जानते हैं, इंदौर में टिकाऊ बने रहने के लिए ऊंची जुगाड़ और स्थानीय सहयोग काम करता है।

सहकारी संस्थाओं में मनपसंद सीए और जुगाड़ का आडिट

प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाओं (पैक्स) में इस बार सहकारिता विभाग के आडिटर के बजाय सीए से आडिट कराने के मुख्यालय से निर्देश हैं। इसी कारण इंदौर जिले में इंदौर प्रीमियर को-आपरेटिव (आइपीसी) बैंक से जुड़ी पैक्स में भी सीए से आडिट कराया जाएगा। पर आइपीसी बैंक के अधिकारी अब तक उन सीए का ही चयन नहीं कर पाए हैं, जिनसे आडिट कराया जाना है। कुछ सीए अधिक से अधिक संस्थाओं का आडिट पाने के लिए जुगाड़ जमा रहे हैं तो बैंक के अधिकारी भी ऐसे सीए तलाश रहे हैं जो उनके हिसाब से आडिट कर सकें। ताली दो हाथ से बजती है, इसलिए दोनों ओर से एक-एक हथेली मिलाकर ताली बजाने का प्रयास किया जा रहा है। पर हिदायत यह भी दी जा रही है कि ताली बजाकर शोर मचाने के बजाय केवल हाथ मिलाकर चलो, जिससे दोनों का काम हो जाए

याद रहे एक हादसे से लिया सबक

कुछ दिन पहले शहर के जीपीओ चौराहे पर लक्ष्मी सर्विस स्टेशन पेट्रोल पंप में पेट्रोल व डीजल का टैंकर खाली करते समय लापरवाही के कारण आग लग गई। गनीमत रही कि इस आग से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। प्रशासन की जांच में पंप संचालक को दोषी ठहराया गया। पर इस हादसे से शहर के अन्य पेट्रोल पंप संचालकों ने भी सबक लिया। अब पंप पर ईंधन के टैंकर खाली करते समय उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाता। रस्सी बांधकर वाहन चालकों को तब तक रोककर रखा जाता है, जब तक कि टैंकर खाली नहीं हो जाता। सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है, लेकिन पंप संचालकों को यह सबक कब तक याद रहेगा, यह भी देखना है। कहीं ऐसा न हो कि इस सबक पर वक्त की धूल जम जाए और शहर में फिर नया हादसा होने पर पेट्रोलियम कंपनियों और पंप संचालकों को सब याद आए।

दुग्ध संघ की अफसरी में पड़ गई खटाई

इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के तीन बड़े अफसर 62 वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन दो साल के लिए इनकी सेवा अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया गया। इन अधिकारियों में संघ के सीईओ एएन द्विवेदी, महाप्रबंधक एसजी जाधव और ओपी झा शामिल हैं। संघ के संचालक मंडल के इस प्रस्ताव पर महासंघ ने सहमति दी और बाद में सहकारिता पंजीयक ने भी इस पर अनुमति की मुहर लगा दी। करीब पांच महीने बाद सहकारिता पंजीयक को याद आया कि सेवावृद्धि नियम विरुद्ध हो गई। लिहाजा तीनों अधिकारियों की सेवावृद्धि निरस्त तो कर दी गई है, लेकिन इस पर महासंघ को फैसला लेना है। इंदौर दुग्ध संघ के नेता कह रहे हैं कि दुग्ध संघ में वैसे ही स्टाफ की बहुत कमी है। जब सेवावृद्धि की तब भोपाल के अधिकारियों ने क्या देखा?

Posted By: Hemraj Yadav

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