Indore Ka Man : पलक मुछाल, ख्यात पार्श्वगायिका। इंदौर संवेदनाओं, संभावनाओं व सपनों का शहर है। जिस किसी ने भी इंदौर से दोस्ती गांठी, यह शहर उसका हो गया, बल्कि वह शख्स भी इंदौर का होकर रह गया। मेरा बचपन और किशोरावस्था यहीं, इसी मिट्टी में बीते, लेकिन करियर के लिए मुझे मुंबई जाना पड़ा। मेरे लिए इंदौर से दूर रहना दिल पर पत्थर रखने जैसा है। मुझे लगता है कि अपना शहर हर मामले में सक्षम है। इस शहर की जमीन में उम्मीदों को जगाने और सपनों को उगाने की कूवत है।

इंदौर के लोग हर क्षेत्र में गुणी और हुनरमंद हैं। मैं मुंबई में कामकाज के दौरान देखती हूं कि वहां कई इंदौरी हैं, जिन्होंने कठोर मेहनत से जगह बनाई है। इंदौर के लोग बड़े सपने देखते हैं और उन्हें सच करने के लिए कठोर मेहनत भी करते हैं। अपन लोग संघर्ष से नहीं घबराते, इसलिए सफल होते हैं। मुझे लगता है कि इंदौर में वह क्षमता है कि कुछ ही वर्षों में यह हर क्षेत्र में तेज तरक्की करते हुए अपने समकक्ष अन्य कई शहरों को पीछे कर देगा।

इंदौर को लेकर यह सपना है कि जिस तरह हम स्वच्छता में अव्वल आए हैं, उसी तरह आने वाले वर्षों में शिक्षा, टेक्नोलाजी, इंडस्ट्री, स्टार्टअप आदि क्षेत्रों में भी खूब आगे बढ़ें। इतना आगे कि यहां के युवाओं को करियर के लिए बाहर न जाना पड़े, बल्कि ऐसा हो कि लोग यहां करियर बनाने आएं।

इंदौर ऐतिहासिक धरोहरों का भी नगर है। अपने प्रिय राजवाड़ा के जीर्णोद्घार अभियान में मैं भी शामिल रही। हमें इन धरोहरों के माध्यम से पर्यटन की संभावनाओं को तलाशना चाहिए। इंदौर के समीप दो ज्योतिर्लिंग, श्री महाकालेश्वर और श्री अोंकारेश्वर हैं। महेश्वर का अद्भुत नर्मदा घाट भी है। इन तीनों को इंदौर से जोड़ते हुए चतुर्भुज पर्यटन सर्किट जैसा कुछ बनाया जाना चाहिए। इसमें इंदौर की स्वच्छता, रात में सजने वाली सराफा चौपाटी जैसी चीजों को ब्रांडिंग में शामिल किया जाए। मुंबई में मुझे जब लोग कहते हैं कि तुम्हारा इंदौर स्वच्छता की मिसाल है और वहां के लोग गजब हैं, तो यह सुनना मुझे बहुत अच्छा लगता है। गर्व होता है। मुझे इंदौर के लिए स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसेडर बनने का सौभाग्य मिला है, इसलिए सबसे अनुरोध करती हूं कि हम स्वच्छता में हर बार अव्वल ही रहें।

हालांकि ट्रैफिक को लेकर हमें शर्मिंदा भी होना पड़ता है। यह ठीक नहीं। हमें नियम पालना सीखना ही होगा। हमें अपने शहर को लगातार अपडेट करना होगा, लेकिन आधुनिक होने के दौरान अपनी पहचान न खोएं। संस्कार, संस्कृति, अपनापन और देसीपन इंदौर की विशेषताएं हैं, इन्हें बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। मैं आज जो कुछ भी हूं, उसमें इंदौर का बहुत बड़ा योगदान है। छोटे बच्चों के दिल के आपरेशन करवाने का अभियान इंदौर की जमीन से ही शुरू हुआ था। शहरवासियों ने मेरा हौसला हमेशा बढ़ाया। इसके लिए मैं हमेशा अपने प्रिय इंदौर की कर्जदार रहूंगी।

Posted By: Hemraj Yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close