कपिल नीले. इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। तेंदुए के शिकार को लेकर अब वन विभाग छर्रों की साइज से बंदूक की गोली का पता लगाने में जुटा है। इसके लिए विभाग ने सीटी स्कैन की फिल्म का सहारा लिया है। पूरी रिपोर्ट को सागर फॉरेंसिक सेंटर भेजा गया है। यहां से रिपोर्ट आने में करीब महीनेभर का वक्त लग सकता है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तेंदुए के सिर से छर्रे निकाले नहीं गए हैं। इसलिए थोड़ी परेशानी आ रही है। उधर वन विभाग मुख्यालय ने जांच इंदौर वनमंडल से छीनकर एसटीएफ को सौंप दी है।

10 जुलाई को नयापुरा वनक्षेत्र में तेंदुए के घायल होने की सूचना मिली थी। इंदौर रेंज ने रेस्क्यू कर तेंदुए को चिड़ियाघर में इलाज के लिए छोड़ा। जहां उसके सिर पर चोट लगने की बात सामने आई। बाद में भोपाल में सीटी स्कैन करवाया गया। यहां तेंदुए के सिर में 40 छर्रे लगे होने का पता चला। वन अधिकारियों ने वेटनरी डॉक्टरों से अॉपरेशन कर छर्रे निकालने पर जोर दिया। मगर डॉक्टरों ने अॉपरेशन करने से इंकार कर कहा कि छर्रे निकालने में तेंदुए की जान जा सकती है। बाद में बेंगलुरू के वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और डॉक्टरों की भी राय ली गई।

वन संरक्षक किरण बिसेन और तत्कालीन जांच अधिकारी राकेश लहरी ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की। छर्रे सिर में होने से विभाग को बंदूक का अंदाजा लगाने में मुश्किल आ रही थी। इसलिए अब सीटी स्कैन की फिल्म के जरिए गोली की साइज का पता लगाया जाएगा। ताकि बंदूक की पहचान हो सके। बताया जाता है कि विभाग ने नयापुरा और आसपास के क्षेत्र के ग्रामीणों के पास बंदूक की जानकारी निकाली है। फॉरेंसिक विभाग को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक 12 बोर बंदूक से गोली चली है।

कॉल डिटेल खंगाली जा रही

चार महीने की जांच में विभाग अभी तक शिकारियों से दूर है। मगर कुछ संदिग्ध टीम की रडार पर आ चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक उक्त घटना वाली रात को इन लोगों की मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल निकाली गई है। एक संदिग्ध फरार हो चुका है। जबकि दूसरा संदिग्ध खुद को बचाने के लिए वन मंत्री और वन अफसरों के चक्कर लगा रहा है, जिसमें कुछ एसटीएफ के अधिकारी भी शामिल हैं। अब ये अधिकारी भी उसे बचाने में लगे हैं।

चार महीने में बदले दो अधिकारी

तेंदुए के शिकार मामले में शुरू से वन विभाग की लापरवाही सामने आई है। महीनेभर तक दो तेंदुआें का आपसी झगड़ा माना जा रहा था। सीटी स्कैन होने के बाद रालामंडल अधीक्षक एके पारीख को जांच की जिम्मा दिया गया। मगर कोई नतीजा नहीं निकलता देख वन संरक्षक ने एसडीओ राकेश लहरी को जांच दी। इस बीच उन्हें महू एसडीओ बनाया गया। इससे जांच धीमी हो गई। बाद में इंदौर वनमंडल ने एसटीएफ को पत्र लिखा। वन संरक्षक किरण बिसेन का कहना है कि मुख्यालय से एसटीएफ को जांच सौंपने का आदेश आ चुका है। जल्द ही प्रक्ररण इंदौर एसटीएफ टीम को देंगे।

Posted By: dinesh.sharma

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस