इंदौर। चुनाव में इंदौर संसदीय सीट पर भाजपा ने नया इतिहास रच दिया। यहां भाजपा ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी ने कांग्रेस के पंकज संघवी को हराकर सीट 5 लाख 47 हजार 754 वोटों से जीत ली। 2014 में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की 4 लाख 66 हजार से अधिक मतों से हुई जीत उस वक्त की सबसे बड़ी जीत थी। पर 2019 की इस जीत ने पांच साल पहले की उस जीत को भी फीका कर दिया। भाजपा प्रत्याशी को 16 लाख 24 हजार 87 मतों में से 10 लाख 68 हजार 569 मत मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 5 लाख 20 हजार 815 वोट मिले। कुल मतों में से भाजपा के लालवानी को 65.79 फीसदी मत मिले जबकि कांग्रेस के संघवी को 32 फीसदी ही मिल पाए। यानी लालवानी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी संघवी से दोगुने से भी ज्यादा वोट ले गए।

सुमित्रा महाजन का रिकॉर्ड तोड़ा

शंकर लालवानी ने इंदौर से सुमित्रा महाजन ताई की सर्वाधिक लीड 4.66 लाख से भी आगे निकल गए हैं। मतगणना शुरू होने के बाद जैसे जैसे रुझान आना शुरू हुए लोग अपने घरों में टीवी स्क्रीन पर ही नजरे जमाए हुए थे। शहर में राजवाड़ा, बीजेपी कार्यालय के सामने, भंवर कुआं, राजेंद्र नगर आदि क्षेत्र में चौराहे पर लगी स्क्रीन पर अपडेट लेते रहे।

कैलाश विजयवर्गीय के घर जश्न

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के घर पर उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय ने जीत का जश्न मनाते हुए कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई। एक स्क्रीन पर नंदा नगर के रहवासियों व आने वाले कार्यकर्ताओं को चुनावी अपडेट भी दिखाया जा रहा है। दोपहर तक सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता उनके घर के सामने मौजूद रहे।

लोकसभा चुनाव के सांतवें चरण में 19 मई को हुए मतदान में इंदौर लोकसभा सीट पर 69.34 प्रतिशत वोटिंग हुई। भाजपा ने पहली बार 1989 में इंदौर सीट जीती थी, इसके बाद से जीत का यह सिलसिला लगातार जारी है। इस बार इंदौर से लगातार आठ बार सांसद रही सुमित्रा महाजन का टिकट काटकर भाजपा ने शंकर लालवानी को प्रत्याशी बनाया गया था। इंदौर लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा और चार पर कांग्रेस का कब्जा है। 2014 में भी इंदौर लोकसभा सीट से सुमित्रा महाजन ने जीत दर्ज की थी, इसके बाद वे लोकसभा स्पीकर बनीं थी।

इंदौर सीट का इतिहास

आजादी के बाद 1951 से अभी तक 16 आम चुनाव और एक उपचुनाव में इंदौर के मतदाताओं ने सांसद चयन के चुनाव में मत दिया। इस तरह 17 लोकसभा के चुनावों (16 चुनाव 1 उपचुनाव) के मतदान के आंकड़े देखें तो इंदौर के मतदाताओं का मिलाजुला रुख देखने में आता है। आजादी के बाद हुए 1951 के प्रथम आम चुनाव में नगर के 46.12 प्रतिशत मतदाताओं ने ही मतदान किया था। जाहिर है आधे से भी कम मतदाताओं के अपने मताधिकार उपयोग किया। पिछले चुनावों में मतदान प्रतिशत का सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड 1967 का रहा है जब 64.77 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था। इसके बाद 1977 के आम चुनाव में भी 64.75 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था। सबसे कम मतदान का रिकॉर्ड 1957 का है जब 45.88 प्रतिशत मतदाताओं ने ही मतदान किया था।

यूं देखा जाए तो 1971 के उपचुनाव में इंदौर सीट पर मात्र 26.37 प्रतिशत मतदाताओं ने ही मतदान किया था जो अभी तक का सबसे न्यूनतम मतदान का रिकॉर्ड है। एक संयोग है कि 1962 में इंदौर संसदीय क्षेत्र का 59.08 का मतदान राज्य में हुए किसी सीट का सर्वाधिक मतदान था।

Posted By: Prashant Pandey

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