Indore Lokesh Solanki Column : लोकेश सोलंकी, इंदौर (नईदुनिया)। राज्य के उद्योग विभाग के एक अधिकारी हाल ही में सेवानिवृत्त हो गए। जाने वाले को याद करने की परंपरा रही है। यहां उनको याद तो किया जा रहा है, लेकिन न तो तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे हैं उनके न रहने पर अफसोस जाहिर हो रहा है। इसके उलट अधिकारी के रवाना होने के बाद उन्हें जानने वाले खुशी मना रहे हैं। शहर के शीर्ष औद्योगिक संगठन के दबंग अध्यक्ष साफ कह रहे हैं, पांच लाख नहीं मिलने पर इन अधिकारी ने एक फैक्ट्री सील कर दी थी। हमने भोपाल में संघर्ष किया तो फैक्ट्री का ताला खुल सका। जाने की इस खुशी के बीच भी कुछ सहमे हुए उद्यमियों का कहना है कि उनके भोपाल वाले सूत्र दावा कर रहे हैं कि जाने वाले ने पहले ही भोपाल में मोटी भेंट पहुंचा दी है। सेवानिवृत्ति के बाद एक साल की संविदा पर उनकी वापसी करवाने की फाइल चल चुकी है। बताया तो यह भी जा रहा है कि एक साल के बदले पांच साल का वेतन चढ़ा दिया गया है।

कुछ तो बात है कि नियम खिलौना हो गए

नए औद्योगिक क्षेत्र टाय क्लस्टर के मामले में यह बात कही जा रही है। आरोप लगाने और कहने वालों में विपक्षी दल के लोग तो हैं ही, अंदर वाले भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। पहले तो यह क्लस्टर दो साल तक लगातार अटका रहा था। जमीन मांगने वाले उद्यमी ऊपर वालों के हाथ जोड़कर थक चुके थे। बीते दिनों ऐसा जादू हुआ कि क्लस्टर की फाइल ने एकाएक सुपर कार जैसी रफ्तार पकड़ ली। सुनने में आ रहा है जिस दाम पर सरकार क्लस्टर में जमीन दे रही है प्रति वर्ग फीट पर उससे कहीं ज्यादा का पेट्रोल डलवाने के बाद ही फाइल में सुपर कार का इंजन लग सका है। प्लाट चाहने वाले उद्यमियों को एक फर्नीचर वाले के दफ्तर में ऊपर का हिसाब करने बुलाया गया था। सुनने में आ रहा है कि पेट्रोल का चंदा इकट्ठा कर रहे उद्योगपति ने अपना हिस्सा भी दूसरों की जेब से निकलवा लिया है। साथ ही अपने रिश्तेदारों के नाम भी भूखंड पाने वालों की सूची में जोड़ दिए हैं।

युवा मोर्चा कहीं दिखे तो बताना

नगर निगम चुनाव में भाजपा का प्रचार करने में युवा नेता इंटरनेट से लेकर शहर के गली- चौबारों की खाक छानते दिखाई दे रहे हैं। अभाविप से जुड़े युवा जो खुद को गैर राजनीतिक संगठन वाले कहते थे, वे भी अपने पुराने साथी के लिए जी जान से प्रचार का शोर मचाने में कसर नहीं रख रहे। इन युवाओं के बीच युवा मोर्चा के लोगों की कमी शहर और यहां की राजनीति समझने वालों को खल रही है। न युवा मोर्चा न उसकी तरुणाई ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है। कारण किसी को भी समझ नहीं आ रहा। बताया जा रहा है कि मोर्चा की कुर्सी पर बीते दिनों बैठाए गए नगर अध्यक्ष के पास खुद ही टीम की कमी है। अन्य पुराने मोर्चा पदाधिकारी इसलिए खामोश हैं कि देख लें कि नया कितना जोर लगाता है। भाजपा की नजर भी अभी युवाओं की निष्क्रियता पर पड़ी नहीं क्योंकि संगठन अब तक तो वरिष्ठों को ही सक्रिय करने में ही जोर लगा रहा था। अब एक आवाज युवाओं के लिए भी लगाई जाएगी

सांवेर के डाक्टर साहब की मार्निंग वाक

सांवेर के पूर्व विधायक और भाजपा के जिला अध्यक्ष डा.राजेश सोनकर के राजनीतिक भविष्य को लेकर तमाम ठीयों-चौराहों पर पुराने जानकारों से लेकर नई पीढ़ी के नेता भी विश्लेषण कर समझने की कोशिश करते रहे हैं कि आगे क्या? सवाल का ठीक-ठीक जवाब इन सभी को अब तक नहीं मिला था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि विधानसभा सीट तो भाजपा में शामिल होने के बाद तुलसी पहलवान ने छीन ली है। क्या भैया जिलाध्यक्ष बनकर ही रह जाएंगे? इन सभी को पांच नंबर में जवाब मिल सकता है। बताया जा रहा है डाक्टर साहब की मार्निंग वाक आजकल पांच नंबर क्षेत्र के हरे-भरे क्षेत्रों में होने लगी है। कभी कृषि कालेज तो कभी डेली कालेज क्षेत्र के पास डाक्टर साहब लोगों से सुबह की राम-राम करते देखे जा सकते हैं। हो सकता है कि मार्निंग वाक के पीछे सिर्फ सेहत ही उद्देश्य है, लेकिन पांच नंबर पर पहले से रूमाल रखकर बैठे लोगों ने राजनीतिक अर्थ ढूंढना शुरू कर दिया है।

Posted By: Hemraj Yadav

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