Indore Lokesh Solanki Column : लोकेश सोलंकी, इंदौर (नईदुनिया)। इंदौर से सटे महू क्षेत्र के रहवासी बिजली कटौती से परेशान हैं। वैसे तो इंदौर और आसपास के अन्य गांवों में भी बिजली की लुका-छिपी का खेल जारी है लेकिन महू में यह कुछ ज्यादा ही खेला जा रहा है। बताया जा रहा है कि देपालपुर और सांवेर के मुकाबले महू में कुछ ज्यादा ही कटौती की जा रही है। महू की बिजली कटौती के लिए इंदौर से राजनीतिक करंट प्रवाहित हो रहा है। क्योंकि महू के बहाने वहां की दीदी पर निशाना साधा जा रहा है। बिजली कंपनी के ग्रामीण अधिकारी इंदौर के कद्दावर राजनेताओं के पुराने विश्वासपात्र हैं। ऐसे में जब आधे घंटे की कटौती की बात होती है तो वे महू पर कृपा करते हुए एक घंटे की कटौती कर देते हैं। दीदी तक इस कटौती के खिलाफ क्षेत्रवासियों की नाराजगी पहुंचने लगी है। कटौती का खेल कर रहे अधिकारी इंदौर वाले का साथ देकर लाभ ले रहे हैं और आश्वस्त हैं कि दीदी को समझाना आसान है।

खिलौना क्लस्टर में "शिष्टाचार" का रेट

दो वर्षों से लंबित नए औद्योगिक क्षेत्र खिलौना क्लस्टर के जमीन पर आकार लेने की घड़ियां अब समाप्त होती दिख रही है। उद्योगपति खुश हैं कि देर से ही सही इंतजार खत्म तो हुआ। हालांकि प्रधानमंत्री के मन की बात से निकले इस खिलौना क्लस्टर के इंतजार का फल उतना भी मीठा नहीं है जितना ऊपर से दिख रहा है। अंदरखाने से खबर आ रही है कि इस प्रोजेक्ट के आखिरी दौर में गति पकड़ने के पीछे उद्योगपतियों द्वारा निभाया शिष्टाचार काफी हद तक कमाल दिखा रहा है। शिष्टाचार का धन्यवाद डीआइसी से लेकर भोपाल तक पहुंचाए जाने की खबर है। शिष्टाचार के चक्कर में क्लस्टर के भूखंडों का मूल्य उस दाम से दोगुना हो गया है जो सरकार द्वारा घोषित किया जा रहा। उद्योगपति फिर भी यह सोच कर खुश हो रहे हैं कि भले ही थोड़ी शकर ज्यादा डालना पड़े लेकिन मिठास भी तो ज्यादा महसूस होगी। क्योंकि रंगवासा में स्थित क्लस्टर की जमीन का बाजार मूल्य शिष्टाचार का खर्च जोड़ने के बाद भी ज्यादा ही हो रहा है।

स्वच्छता की झांकी फिर से हुई मुफ्त

इंदौर स्वच्छता में नंबर वन बना तो सफाई के इंदौरी माडल की चर्चा भी देशभर में होने लगी। शहर की सफाई व्यवस्था को देखने समझने देशभर के अलग-अलग हिस्सों से लोग भी आने लगे। लगातार इनाम जीता तो इंदौर आने वालों की भीड़ बढ़ने लगी। इसके बाद नगर निगम ने फैसला सुना दिया कि बाहर से आने वाले सफाई के दर्शनार्थियों को फीस देनी होगी। प्रति व्यक्ति सात हजार रुपये शुल्क नगर निगम ने तय कर दिया। इसके बाद इंदौर आने वाले सरकारी दल अचानक कम हो गए। बीते दिनों निगमायुक्त ने सफाई माडल देखने का शुल्क खत्म कर दिया। नतीजा अब फिर से बाहर से आने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है। तेलंगाना के 38 मंत्रियों के दल ने सफाई देखी, सरकारी मेहमाननवाजी का मजा लिया और फिर महाकाल की भस्मारती की इच्छा जता दी। उज्जैन के अधिकारियों को कहा गया तो उन्होंने साफ कह दिया भस्मारती का शुल्क तो देना पड़ेगा। इंदौर आ रहे हर दल की कहानी कुछ ऐसी ही है।

कांग्रेस में कार्रवाई का पत्र ही गायब

शहर कांग्रेस ने अनुशासनहीनता से निपटने के लिए अनुशासन समिति का गठन किया। जानने वाले जानते हैं कि वो कांग्रेस ही क्या जिसकी अनुशासनहीनता को ऐसी कमेटियां रोक सके। बताया जा रहा है कि शहर के एक कांग्रेसी ने संगठन प्रभारी के खिलाफ फेसबुक पर जमकर भड़ास निकाली। इसके बाद अस्तित्व में आई अनुशासन समिति से उम्मीद की जा रही थी कि वे इस कांग्रेसी पर कार्रवाई करेंगे। अनुशासन समिति ने तो कुछ किया नहीं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी को ही मजबूर होकर अनुशासनहीनता करने वाले कांग्रेसी को छह वर्ष के लिए कांग्रेस से बेदखल करने का आदेश जारी करना पड़ा। कमाल इसके बाद हुआ। भोपाल से निकला ये पत्र इंदौर पहुंचने के बाद कहीं नजर नहीं आ रहा। कांग्रेसी आपस में ही सवाल पूछ रहे हैं कि 30 अप्रैल को जारी इस पत्र को गायब करने वाली शहर कांग्रेस कमेटी पर भी अब क्या अनुशासनहीनता की कार्रवाई होगी?

Posted By: Hemraj Yadav

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