Indore Lokesh Solanki Column : लोकेश सोलंकी, इंदौर (नईदुनिया)। आइडीए द्वारा गुमास्ता नगर के कार्नर पर तोड़ी गई बिल्डिंग मनी सेंटर की जमीन अब चार नंबर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में नजर आने लगी है। टूटे भवन की खाली जमीन पर चाट चौपाटी बसा दी गई है। क्षेत्र के पूर्व जनप्रतिनिधि पर आरोप लग रहे हैं कि 200 रुपये हर दुकान वाले से वसूले जा रहे हैं। इसकी शिकायत क्षेत्र के जनप्रतिनिधि तक भी पहुंच चुकी है। वहीं एमजी रोड की लाल बिल्डिंग में बैठकर क्षेत्र में फील्डिंग कर रहे भाजपा के प्रभावशाली के नेता अपने डाक्टर भाई को इस जमीन पर बसाना चाहते हैं। वसूली करने वाले पूर्व जनप्रतिनिधि भी इनके लिए ही लगे हैं क्योंकि पहले उन्हें बिना वोटिंग चुनाव जिताने में उन नेताजी की खास भूमिका रही है। इस ग्रुप की उम्मीदें अब बढ़ रही हैं क्योंकि आइडीए में उनकी चल रही है। दूसरा धड़ा काम बिगाड़ने के लिए सही मौके के इंतजार में है।

सरकारी स्वास्थ्य मेले में सरकारी मरीज

बीते गुरुवार और शुक्रवार को प्रशासन ने नेहरू स्टेडियम में विशाल स्वास्थ्य शिविर लगाया। मेले में मरीजों की सूची में खेल नजर आ रहा है। दोपहर में शहर के लोग तो मेले में जांच करवाने के लिए नहीं पहुंचे। पहुंचते भी कैसे, स्टेडियम तक पहुंचाने के लिए न तो सीधी बस सेवा है, न सार्वजनिक परिवहन। सरकार ने आदेश दिया था तो अधिकारियों ने मेला लगाकर छह लाख का बजट खर्च कर दिया। मरीज नहीं पहुंचे तो ड्यूटी दे रहे आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का ही चेकअप कर डाला। दो दिन बिना मरीजों के ड्यूटी करने वाले डाक्टर झल्लाए हुए थे। वे कह रहे थे कि भव्य आयोजन का खर्च किसी सरकारी डिस्पेंसरी या अस्पताल पर खर्च कर दिया जाता तो मरीजों का भला हो जाता। जिला अस्पताल या शहर के गरीब क्षेत्रों में स्वास्थ्य मेला लगा लिया जाता, लेकिन अधिकारियों तो भव्य आयोजन के फोटो भोपाल पहुंचाने से मतलब है।

शर्त लगा लो चुनाव हो जाए तो...!

नगर निगम चुनाव के घुंघरू बांधने वाले नेताओं को सावधान रहने की जरूरत है। 25 मई को आरक्षण का ऐलान होना है। पहली नजर में हर कोई मान बैठा है कि अब तो चुनाव होकर रहेंगे। इस बीच बारीक नजर से देखने वाले भोपाल के खास लोग फुसफुसा रहे हैं कि शर्त लगा लो, अगर इस हवा में चुनाव हो जाए तो...। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति में चार नंबर पेज पर दर्ज सरकार का बयान इनकी आशंका को बल दे रहा है। इसमें बिना मेरिट का विचार किए आरक्षण पर बनी कमेटी की सिफारिश मानने की बात सरकार ने कही थी। बताया जा रहा है कि आगे आरक्षण निकायों की मतदाता सूची में नजर आ रही श्रेणीवार जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा। आरक्षण की यह नई पद्धति लागू हुई तो फिर से बवाल होना तय है। ओबीसी के बाद दूसरे वर्गों का असंतोष सामने आए तो हैरानी नहीं होगी।

आप ने शुरू की भर्ती, कांग्रेस पड़ी ठंडी

आम आदमी पार्टी ने राजनेताओं की भर्ती शुरू की है। पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को आप में शामिल होने का न्योता दे दिया। पहली बार कोई दल फैक्ट्री के बाहर लगे 'भर्ती चालू है" का बोर्ड टांगे घूमता दिख रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस के जंगी प्रदर्शनों को जंग लग चुकी है। अधिकारियों और सत्ताधारियों से दोस्ती निभाने में लगे शहर के कांग्रेस वाले बिजली की आंख मिचौली को भी मुद्दा बनाने में विफल रहे। कमल नाथ के दफ्तर से प्रदर्शन का आदेश आया तो शहर अध्यक्ष के करीबियों ने ज्ञापन बनाया और बिजली दफ्तर के गेट पर जाकर अध्यक्ष के साथ पढ़ दिया। कांग्रेसियों का हाल ये रहा कि ज्ञापन लेने के लिए एमडी तक बाहर नहीं आए और सीजीएम को भेज दिया। भला हो संजय शुक्ला का, जिन्होंने प्रदर्शन में गिनने लायक सिर जुटा दिए।

Posted By: Hemraj Yadav

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