Indore Lokesh Solanki Column : लोकेश सोलंकी, इंदौर (नईदुनिया)। स्कीम नंबर 71 में इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा ढहा दिए गए मनी सेंटर की खाली जमीन से हो रही कमाई पर अब मिट्टी डल गई है। विधानसभा चार के दो राजनीतिक धड़ों में इस जमीन को लेकर रस्साकशी चल रही है। एक धड़े से जुड़े छुटभैये नेता ने खाली जमीन पर चाट-चौपाटी सजाकर वसूली शुरू कर दी थी। दूसरे के पास शिकायत पहुंची। उसे जमीन का ऐसा उपयोग रास नहीं आया। फिल्म ऐसी चली कि शनिवार को नगर निगम का अमला मौके पर पहुंचा और खाली मैदान तक जाने वाले रास्ते को मिट्टी के ढेर लगाकर रोक दिया। बांस की मदद से अस्थायी सीमांकन भी कर दिया है। चाट की दुकान वाले बोल रहे हैं कि हम तो यह सोचकर किराया भी दे रहे थे कि निगम वाले परेशान नहीं करेंगे। ये नहीं सोचा था कि दो गुटों की राजनीति में भी दुकान बंद हो सकती है।

सांसद के मेले में पार्किंग का दर्द !

इंदौर के सांसद शंकर लालवानी की संस्था लोक संस्कृति मंच हर साल मालवा उत्सव आयोजित करती है। खास बात यह है कि साल में एक बार लगने वाला मेला इस साल दो बार आयोजित हो रहा है। मालवा उत्सव में यूं तो प्रवेश शुल्क तो नहीं लिया जाता, लेकिन इस बार मेले की पार्किंग व्यवस्था मेले में आने वालों को काफी परेशान कर रही है। कार पार्किंग के बदले 50 रुपये का शुल्क वसूला जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि सांसद महोदय की संस्था टिकट की कसर पार्किंग शुल्क से ही निकाल रही है, जबकि नगर निगम शहर में तमाम जगह पर मुफ्त पार्किंग की सुविधा दे रहा है। मल्टी लेवल पार्किंग में भी शुल्क 20 रुपये है। शासन और नगर निगम से लेकर कुछ सरकारी विभाग संस्था को अनुदान भी देते रहे हैं। ऐसे में पुरातत्व विभाग की जमीन पर मेला लगाकर लिए जा रहे तगड़े शुल्क पर सवाल उठना वाजिब है।

बिजली कंपनी में मंत्री पर भारी एक अधिकारी

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में एक अधिकारी की चर्चा हर जुबान पर है। लंबे समय से इंदौर-देवास के आसपास घूम रहे अधिकारी का जलवा मंत्री पर भी भारी पड़ा है। बीते दिनों बिजली कंपनी में दो इंजीनियरों के तबादले हुए। बताया जा रहा है कि पीथमपुर से एक इंजीनियर को इसलिए इंदौर भेज दिया गया क्योंकि ये अधिकारी उन्हें वहां नहीं चाहते थे। इंदौर के मंत्री भी कुछ इंजीनियरों के तबादले की लंबे समय से सिफारिश कर रहे हैं। कई अधिकारी तो भोपाल तक चक्कर लगा चुके हैं। कंपनी नेे मंत्रियों के कहने पर भी तबादले नहीं किए। ऐसे में एक अधिकारी की चाहत पर दो इंजीनियरों को इधर से उधर करने का मामला चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि मृदुभाषी और गुणों से संपन्ना ये अधिकारी कंपनी के बड़े-बड़ों को भी अपने इशारों पर चला रहे हैं।

तीन वार्ड में परिवार के दावेदार चार, चालक का बेड़ा पार

नगर निगम चुनाव की सुगबुगाहट के साथ वार्डों से टिकट के दावेदार भी प्रकट हो रहे हैं। तीन वार्ड में चार दावेदारों पर हर किसी की नजर है। बताया जा रहा है कि प्रजापत नगर, सुदामा नगर और गुमाश्ता नगर के तीन वार्डों पर चार दावेदारों की नजर है। खास बात है कि ये दावेदार आपस में रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। इन्हें पता चल गया है कि परिवार के करीबी चालक का वार्ड तो तय हो गया है, लेकिन इनके लिए टिकट आसान नहीं है। चार में से एक का नाम आगे फाइनल हो भी जाए लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों मेें राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ जारी हमले इनकी नींद उड़ा रहे हैं। इस बार टिकट का सामंजस्य बैठा भी लिया तो विधानसभा चुनाव में कहीं परिवारवाद का जिन्ना ग्रहण न लगा दे। धर्मसंकट के बीच फंसे परिवार में रास्ता निकालने की कवायद जारी है।

Posted By: Hemraj Yadav

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