Indore Mukesh Mangal Column : मुकेश मंगल, इंदौर (नईदुनिया)। इन दिनों सेंट्रल जेल का माहौल बदला-बदला सा है। हर कोई बहती गंगा में हाथ धोना चाहता है। यही वजह है कि अफसरों में तलवारें खिंची हुई है। मुख्यालय में बैठे अफसर एक-दूसरे की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। ताजा मामला सेंट्रल जेल में होने वाले शुभ-लाभ का है। सहायक जेल अधीक्षक इंदरसिंह, मनोज मिश्रा और सुनील मंडलेकर में चक्कर अधिकारी बनने की होड़ मची है। बड़े अफसरों ने लाखों रुपये महीना तय कर रखा है। इस कारण अफसर दो खेमों में बंट गए हैं। एक खेमा डीआइजी को जेल की पोलपट्टी बताता है। दूसरा सीधे डीजीपी से बात करता है। इस लड़ाई का असली आनंद जेलर संजीव मिश्रा ले रहे हैं। डीआइजी से जुड़े होने के कारण जेल अधीक्षक और सहायक जेल अधीक्षकों के बीच होने वाली तकरार से लेकर शुभ-लाभ की सारी बातें बखूबी पहुंचा देते हैं।

आखिर मंत्रीजी को गुस्सा क्यों आया...

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को सोमवार दोपहर अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ गया। गुस्साए सिलावट परदेशीपुरा थाना प्रभारी पंकज द्विवेदी से उलझ गए। सिलावट यह भूल गए कि वे मंत्री हैं। पहलवानी वाली शैली में ही टीआइ से पूछा लिया कि टीआइ कब बने। इंदौर में कब से हो। वाकया नगर निगम के प्रथम परिषद सम्मेलन का है। शहर अध्यक्ष गौरव रणदिवे के साथ पहुंचे सिलावट को टीआइ ने यह कहते हुए रोक दिया कि हाल में सिर्फ पार्षदों का प्रवेश है। रोका-टोकी मंत्री को नागवार गुजरी और टीआइ से पूछा कि इंदौर में कब से हो। प्रशासनिक अफसर ने स्थिति संभाली और मंत्री को सम्मानपूर्वक आगे ले गए। हालांकि तब तक मंत्री का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। वह लौट कर आए और टीआइ से नाम पूछा। उनकी नेमप्लेट पर नाम भी देखा। मौके पर खड़े एडिशनल डीसीपी राजेश व्यास, एसीपी भूपेंद्रसिंह ने टीआइ के मन का भाव बताया और मंत्री को शांत किया।

हाथ-पांव तोड़कर चुकाया बदला

राऊ थाना क्षेत्र में हुए शार्ट एनकाउंटर की हर कोई तारीफ कर रहा है, लेकिन घटना की असल कहानी कुछ और है। बदमाशों के हाथ-पैर तोड़कर पुलिस ने हीरानगर थाना क्षेत्र में हुए गोलीकांड का हिसाब पूरा किया है। हिस्ट्रीशीटर अनिल दीक्षित की हत्या के तार मल्हारगंज थाना क्षेत्र के अपराधियों से जुड़ गए थे। अफसरों ने उसी वक्त ठान लिया था कि दीक्षित को गोली मारने वाले बदमाशों को उनकी शैली में ही जवाब मिलेगा। हालांकि बाद में क्राइम ब्रांच की खींचतान में आरोपित शानू और चयन को कोर्ट में पेश करना पड़ गया। जैसे ही राजेंद्र नगर में फोटोग्राफर से लूट हुई, अफसरों ने तय कर लिया कि अब पुलिस की तरफ से गोली चलेगी। ऐनवक्त पर एसआइ दशरथ चौहान एनकाउंटर से मुकर गए। आनन-फानन में शार्ट एनकाउंटर की पटकथा लिखी गई और चिनार हिल्स में शार्ट एनकाउंटर दर्शाया गया।

सहायक आबकारी आयुक्त से हिसाब बराबर

पिछले कुछ सालों से आबकारी अमला गड़बड़ियों को लेकर सुर्खियों में है। 42 करोड़ के आबकारी घोटाले की फाइल अभी तक बंद भी नहीं हुई थी कि छह करोड़ का आबकारी घोटाला सामने आ गया। फर्क इतना है कि इस बार गड़बड़ी अमले से बागी अफसर ने ही पकड़ी और बगैर बदनाम हुए कायमी करवा दी। एसा कर उन्होंने सहायक आबकारी आयुक्त राजनारायण सोनी से हिसाब चुकता कर लिया। ग्वालियर में पदस्थ सोनी के समकक्ष इस अफसर के कार्यकाल में ही शराब ठेकों में 42 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। विभागीय जांच में भी उनकी भूमिका पाई गई थी। इसके बाद उन्हें लूपलाइन में दिन गुजारने पड़ रहे हैं। तभी से मौका तलाश रहे उक्त अफसर ने ठेकेदार (अनिल सिन्हा और मोहन कुमार) की गड़बड़ी पकड़ी और सीधे मुख्यालय को बता दी। यह भी बताया कि जांच निष्पक्ष हुई तो मास्टर माइंड सोनी ही निकलेंगे।

Posted By: Hemraj Yadav

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