Indore Mukesh Mangal Column : मुकेश मंगल, इंदौर (नईदुनिया)। खुलेआम शुभ-लाभ करने वाले थाना प्रभारियों की छुट्टी कर पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र ने बता दिया कि नेतागण पोस्टिंग तो करवा सकते हैं लेकिन हटाना तो उनके हाथ में ही है। आयुक्त ने उन थाना प्रभारियों को भी आईना दिखा दिया जो सिस्टम से ऊपर समझने लगे थे। बताया जाता है पहली बार थाना प्रभारियों की आमद-रवानगी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के आधार पर हुई है। कुछ निरीक्षक तो इसी दावे से आए थे कि उन पर भैया का हाथ है और दो साल के पहले कोई नहीं हटा सकता। इंटेलिजेंस ने आयुक्त को बताया कि ऐसे टीआइ न सिर्फ शुभ-लाभ में मशगूल हैं बल्कि छुटभैय्ये नेता थाना चला रहे हैं। चर्चा तो यह भी है कि आयुक्त ने कुछ थाना प्रभारियों की शुभ-लाभ संबंधित बातचीत भी सुन ली और ऐसे टीआइ थाने नहीं बल्कि जिले से ही जा सकते हैं।

असुविधाओं का शिकार आइजी कार्यालय

एक वक्त था जब इंदौर आइजी कार्यालय जोन की शान हुआ करता था। यही वजह थी कि एडीजी स्तर के अफसर भी आइजी बनने के लिए तरसते थे। आयुक्त प्रणाली के बाद आइजी शहर से कटकर ग्रामीण के हो गए। रेसीडेंसी वाला आइजी कार्यालय बड़वाली चौकी स्थित (महिला अपराध) इमारत में चला गया और तभी से सारी रौनक खत्म हो गई। आइजी कार्यालय में लगने वाला बड़े लोगों का मजमा भी लगभग खत्म ही हो गया। साहबों की बैठकें ही कम होने लगी हैं। इक्का-दुक्का गाड़ियां भी तब दिखती हैं जब कार्यालय में किसी कारणों से बैठक आहुत होती है। डीजीपी सुधीर सक्सेना तो खुद असुविधाओं से घिरे इस कार्यालय को देख कर चौंक गए। एक अफसर ने तो यह तक बोल दिया कि इससे अच्छे तो शहर के डीसीपी और एडिशनल डीसीपी के कार्यालय हैं जिनके रीडर और पीए शाखा सर्व सुविधायुक्त है।

आबकारी वाले नपे, पुलिसवाले बचे

पहली बार पब-बार वालों से मिलीभगत करने वाले आबकारी अफसर नप गए लेकिन वो पुलिसवाले बच गए जिनकी कृपा दृष्टि से देर रात शराब परोसी जा रही थी। तुकोगंज थाना क्षेत्र स्थित फोर मोर शाट्स में लव जिहाद के आरोपित पर कलेक्टर ने न सिर्फ रासुका लगाई बल्कि पब सील कर दोषी अफसरों को भी हटा दिया। लेकिन पुलिस अफसरों ने उन लोगों को बचा लिया जो आरोपितों से मिले थे। एडिशनल डीसीपी( आसूचना एवं सुरक्षा) प्रमोद सोनकर तो उनकी रिपोर्ट भी अफसरों तक भेज चुके थे। दरअसल विवाद की सूचना पर सोनकर ही सबसे पहले मौके पर पहुंचे बल्कि आरोपितों को पकड़कर हवालात में बंद कर दिया। सोनकर ने जाते-जाते पुलिस कंट्रोल रूम पर लंबी चौड़ी रिपोर्ट लिखी जिसमें घटना स्थल और समय का उल्लेख भी कर दिया ताकि बचने की कोई गुंजाइस ही न रहे। आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी लेकिन डीसीपी स्तर पर मामला दबा दिया गया।

ग्रामीण से क्यों शहर आना चाहते हैं टीआइ

अफसरों की सख्ती से परेशान ग्रामीण क्षेत्र के कई थाना प्रभारी शहर आने की जुगाड़ में हैं। दो टीआइ की थाने से छुट्टी होने के बाद तो सन्नाटा पसर गया है। दरअसल एसपी भगवत सिंह बिरदे क्षेत्र में खुद का दस्ता चलाते हैं जो थाना प्रभारियों की देखरेख में चल रहे अवैध अड्डों को पकड़ता है। इससे उनकी कमाई के रास्ते तो बंद होते हैं वहीं जांच अलग बैठ जाती है। खुड़ैल से महेंद्रसिंह भदौरिया, सिमरोल से धर्मेंद्र शिवहरे और महू से अरुण सोलंकी को हटाने के बाद टीआइ में एक ही चर्चा है कि अगला नंबर किसका आने वाला है।

Posted By: Hemraj Yadav

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