इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर देश में सबसे स्वच्छ शहर की अपनी ख्याति पर गर्वीला है। आम इंदौरी जब किसी दूसरे शहर या प्रदेश में जाता है तो लोग पूछते हैं कि आपके इंदौर में ऐसा क्या है कि यह देश का सबसे स्वच्छ शहर है। निस्संदेह इस सफलता में निगम प्रशासन के साथ आम नागरिकों के स्वच्छता के संस्कार भी शामिल हैं। मगर कम ही लोग जानते हैं कि इंदौर में जब पहली बार नगर पालिका की स्थापना की गई थी तो उसके पीछे भी कारण स्वच्छता ही था।

इंदौर नगर पालिका की स्थापना वर्ष 1870 में हुई थी। वर्ष 1818 के पहले इंदौर केवल परगना मुख्यालय हुआ करता था। आबादी भी बहुत कम थी। मगर 1818 के बाद यह होलकर राजधानी बना और इसी साल शहर में रेसीडेंसी की स्थापना हुई थी। इसके बाद इंदौर का विकास होता गया और यह व्यापारिक व शैक्षणिक केंद्र बनता गया। यहां कपड़ा मिलें स्थापित हुईं। इसी कारण यहां लोग आकर बसने लगे। वर्ष 1866 में यहां 10,731 मकान थे, जिनमें 56,730 लोग रहते थे। इनमें 39,862 व्यस्क थे। इंदौर रेसीडेंसी से भारत सरकार को वर्ष 1866 में भेजी रिपोर्ट में कहा गया, 'यह नगर बहुत संपन्न है, मुख्यत: अफीम के व्यापार के कारण। यह इतनी मात्रा में होता है कि हजारों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे अपनी आजीविका चलाते हैं। मगर नगर की स्वच्छता व्यवस्था की शर्मनाक तरीके से उपेक्षा की जा रही है। यहां के शासक को कई बार सलाह देने के बाद भी वे इस दिशा में स्थायी रूप से कुछ नहीं करते।" इसके बाद स्वच्छता मुद्दा बन गया।

शहर के बड़े व्यापारियों ने एकत्र होकर महाराजा से गंदगी हटाने के लिए चर्चा की। दरअसल, शहर में मकान मालिक निजी खर्चे पर सफाई करवाते थे। मगर सार्वजनिक स्थानों पर सफाई नहीं होती थी। नालियां भी नहीं थीं और घरों का गंदा पानी सड़कों पर बहता था। तब कृष्णपुरा मार्ग शहर का सबसे भीड़भरा इलाका था। यहां गंदा पानी बहता रहता था। आखिरकार शहर को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से वर्ष 1870 में नगर पालिका की स्थापना की गई। प्रारंभिक अनुदान के रूप में 12 हजार रुपये स्वीकृत किए गए। नगर पालिका ऐसे मकानों पर कर लगाती थी, जहां किराएदार रहते हैं। इस करारोपण से नगर पालिका की सालाना आय 36 हजार रुपये आंकी गई थी।

खुमान सिंह थे पहले अध्यक्ष - नगर पालिका के सदस्यों का चयन शासन ही करता था। प्रत्येक मोहल्ले से दो मकान मालिकों को सदस्य बनाया जाता था। इंदौर नगर पालिका के पहले अध्यक्ष बक्षी खुमानसिंह थे, जबकि उपाध्यक्ष रामजी वकील थे। नारो भीकाजी गर्दे को पहला सचिव नियुक्त किया गया था। समिति का कार्यकाल एक वर्ष का होता था। हालांकि अन्य अधिकारी निरंतर कार्य करते थे।

अगली रिपोर्ट में सफाई की तारीफ - इंदौर रेजीडेंट कर्नल एचडी डेली ने वर्ष 1873 में भारत सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में सफाई की तारीफ की। उन्होंने लिखा, 'सुधार कार्य जारी हैं, लेकिन प्रगति बहुत धीमी है। प्रमुख मार्ग पक्के हो गए हैं और दोनों ओर नालियां बना दी गई हैं। मुख्य बाजारों से गुजरना अभी भी मुश्किल है, लेकिन हालात पहले से बेहतर हुए हैं।"

Posted By: Hemraj Yadav

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