इंदौर, (नईदुनिया प्रतिनिधि), Indore News। बुजुर्गों को अमानवीय तरीके से शहर से बाहर छोड़ने के मामले में नगर निगम ने अपनी गोलमोल जांच में बड़े अधिकारियों को साफ-साफ बचा लिया है। जांच में रैनबसेरा के छह और कर्मी दोषी पाए गए हैं, जिन्हें मंगलवार को रिपोर्ट आने के बाद बर्खास्त कर दिया गया है। निगम उपायुक्त प्रतापसिंह सोलंकी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि उपायुक्त ने बगैर वरिष्ठ अफसरों की स्वीकृति के बुजुर्गों को रैनबसेरा भेजने के बजाय उन्हें शहर से बाहर भिजवाया। इस कारण उपायुक्त को भी दोषी ठहराया गया है। जिन छह और कर्मियों को बर्खास्त किया है, उनमें रैनबसेरा से संबद्ध जितेंद्र तिवारी, अनिकेत करोने, राज परमार, गजानंद माहेश्वरी शामिल हैं। बुजुर्गों को बाहर ले जाने के लिए रिमूवल विभाग का ट्रक ले जाने वाले ड्राइवर राजेश चौहान और उसके सहकर्मी सुनील सुरागे को भी बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई है।

29 जनवरी को हुई थी इंदौर को बदनाम करने वाली घटना

- 29 जनवरी को इंटरनेट मीडिया पर इंदौर के पास शिप्रा गांव के कुछ वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें नगर निगम की एक गाड़ी में भरकर लाए गए बुजुर्गों को निगमकर्मी अमानवीय तरीके से इंदौर-देवास सिक्स लेन हाईवे पर उतार-चढ़ा रहे थे।

- कर्मियों केहाथ में लट्ठ थे। वे उन्हें ट्रक से इंदौर-देवास हाईवे पर उतार रहे थे।

- गांव के लोगों ने कर्मियों को खरीखोटी सुनाते हुए वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिए।

- मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने तत्काल जिम्मेदारों पर कार्रवाई करते हुए उपायुक्त को निलंबित कर दिया था। अधिकारियों को जांच कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

- निगम प्रशासन ने रैनबसेरा के कर्मी बृजेश लश्करी और विश्वास वाजपेयी को तत्काल बर्खास्त कर दिया था।

कर्मियों ने की दो बड़ी लापरवाही

1. बिना वरिष्ठों की सक्षम स्वीकृति के केवल बुजुर्गों के कहने पर उन्हें छोड़ने के लिए निगम सीमा के बाहर तक गए। वहां विरोध होने पर बुजुर्गों को वे फिर शहर लाए और स्टार चौराहा व रोबोट चौराहा पर छोड़ दिया।

2. बुजुर्गों को ट्रक से चढ़ाते-उतारते समय उन्होंने लापरवाही बरती। अमानवीय तरीके से उन्हें ट्रक पर चढ़ाया-उतारा जा रहा था। कर्मियों के हाथ में डंडा था, जिससे वे बुजुर्गों का सामान फेंक रहे थे। (नगर निगम आयुक्त के अनुसार)

बुजुर्गों के मामले में जांच रिपोर्ट आ गई है। छह और कर्मियों को बर्खास्त किया है। रिपोर्ट की कापी तो नहीं दे सकते, लेकिन जांच के तथ्य बता सकते हैं। -प्रतिभा पाल, निगमायुक्त

इसलिए बचे बड़े अधिकारी

पहले चर्चा थी कि अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव ने निगमायुक्त प्रतिभा पाल के कहने पर उपायुक्त लता अग्रवाल को बुजुर्गों को ले जाने के लिए ट्रक की व्यवस्था करने को कहा था। रिपोर्ट में भी इस तथ्य का उल्लेख है। 'नईदुनिया' से चर्चा में निगमायुक्त ने बताया कि मैंने अपर आयुक्त को बेसहारा-बेघर लोगों को रैनबसेरा शिफ्ट करने को कहा था। श्रीवास्तव ने उपायुक्त अग्रवाल को ट्रक भेजने को कहा। फिर अपर आयुक्त मौके पर भी गए कि बुजुर्गों को रैनबसेरा ले जाया गया है या नहीं? जांच में अपर आयुक्त और उपायुक्त के बयानों से भी यही बात साफ हुई है।

पहले अपर आयुक्त कर रहे थे जांच, फिर समिति बनानी पड़ी

निगमायुक्त ने घटना की जांच पहले अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर को सौंपी थी। जांच में अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव और उपायुक्त लता अग्रवाल के बयान नहीं लिए गए थे। सवाल उठे तो आयुक्त ने अपर आयुक्त एसके चैतन्य को मुख्य जांच अधिकारी बनाया व उनके साथ जांच समिति में अपर आयुक्त राजनगांवकर और उपायुक्त एसके सिन्हा को शामिल कर जांच कराई। ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि श्रीवास्तव राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और राजनगांवकर नगरीय विकास विभाग के।

Posted By: Prashant Pandey

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