Indore News : लोकेश सोलंकी, इंदौर (नईदुनिया)। बिना किसी शोर-शराबे के इंदौर-उज्जैन संभाग में बिजली कटौती शुरू कर दी गई है। दोनों संभागों में बिजली वितरण का जिम्मा संभाल रही पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने गुरुवार शाम दस से अधिक जिलों में अघोषित कटौती की। यहांं डेढ़ से दो घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी गई। बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल बैठाने के लिए बिजली कंपनी को यह कटौती शुरू करना पड़ रही है। बड़े शहरों और जिला मुख्यालयों को छोड़कर तहसील और ग्रामीण स्तर पर बिजली गुल की जा रही है ताकि अंधेरे पर ज्यादा शोर न मचे।

केंद्र द्वारा बकाया वसूली के लिए की गई सख्ती के बाद बिजली वितरण कंपनियों पर कटौती करने का दबाव आया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से मिली जानकारी के अनुसारस गुरुवार शाम को पहले बड़वानी, रतलाम, मंदसौर, बुरहानपुर और खंडवा जिले के डीएल फीडरों पर कटौती की गई। इसके बाद धार, आगर व अन्य जिलों के फीडरों पर भी बिजली बंद रखी गई। दरअसल ग्रामीण क्षेत्र में वितरण कंपनी दो तरह के फीडरों से बिजली आपूर्ति करती है। एक फीडर कृषि फीडर होता है। दूसरा डीएल फीडर यानी घरेलू फीडर होता है। कृषि फीडर पर तो वैसे ही 24 घंटे में से 10 घंटे बिजली आपूर्ति करने का आदेश है। डीएल यानी घरेलू फीडर पर 24 घंटे आपूर्ति की जाती है। ऐसे में इसी पर कटौती की जा रही है।

फीडरों को बंद किया

बिजली कंपनी के सूत्रों के अनुसार गुरुवार को शाम 7.40 बजे बड़वानी, रतलाम, मंदसौर, बुरहानपुर और खंडवा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बंद की गई। आपूर्ति रात 9.10 बजे फिर से बहाल की गई। यानी करीब डेढ़ घंटा इन क्षेत्रों में बिजली बंद रही। इसके बाद रात 9.35 बजे से धार और आगर के साथ मालवा क्षेत्र के अन्य जिलों में बिजली बंद हुई। यहां भी एक से डेढ़ घंटे के लिए अंधेरा छाया रहा। ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य ग्रिडों से कंपनी को आपूर्ति बंद नहीं हुई थी। सीधा 33-11 केवी फीडरों को वितरण कंपनी के स्तर पर बंद किया गया था। शुक्रवार को कंपनी स्तर पर अनुमान लगाया गया कि इस कटौती से धार क्षेत्र में 77 मेगावाट, रतलाम में 67 मेगावाट, मंदसौर में 56 मेगावाट, खंडवा क्षेत्र में 47 मेगावाट और बड़वानी क्षेत्र में 28 मेगावाट बिजली की बचत कर ली गई।

त्योहारों के दौर में संकट बढ़ेगा

दरअसल एक दिन पहले ही केंद्रीय बिजली मंत्रालय के अधीन आने वाले राष्ट्रीय बिजली ग्रिड परिचालक ने बकाया बिल चुकता न करने पर 13 राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड करने का आदेश दिया है। इसका असर हुआ है कि राज्य की बिजली कंपनियां अल्पावधि स्रोतों से बिजली नहीं खरीद सकतीं। दरअसल बिजली वितरण कंपनियों में करीब 80 प्रतिशत विद्युत खरीदी दीर्घ अवधि के करार से होती है। शेष जरूरत के मुताबिक बिजली कंपनी हाजिर बाजार में जाकर उत्पादक कंपनियों से खरीद लेती है। इसी 20 प्रतिशत आपूर्ति पर प्रतिबंध का प्रभाव पड़ा है। राज्य और वितरण कंपनियां मांग और आपूर्ति को बैलेंस करने के लिए फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में ही कटौती कर रही हैं। अभी कृषि फीडरों पर सिंचाई की मांग नहीं है। वर्षा का दौर थमने और त्योहारों का दौर आने पर बिजली की मांग और बढ़ेगी। ऐसे में आशंका है कि कटौती का दायरा बढ़कर शहरों को भी प्रभावित कर सकता है। शुरू हुए कटौती के दौर पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी अमित तोमर और सीजीएम रिंकेश कुमार वैश्य ने चर्चा से इन्कार कर दिया।

Posted By: Hemraj Yadav

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